एक छोटे से राजपूत भाई ने बड़े दिल से राजपुताना कविता लिखी है पढ़ कर जरूर बताएं कैसे लगा " भरते जो म्हारे हुक्के, वो अपनी औकातौं को भूल गये ", " देते थे जो म्हारे पूर्वज , वो उन सौगातों को भूल गये "........, " दिये थे हमने जिनको खेत खलियान, वो अहसानों को भूल गये ", " जिनके ख़ातिर हमने शीश कटाये , वो बलिदानों को भी भुल गये "........, " तुम्हरी रक्षा करते-करते, हमने प्राण ही त्याग दियें ", " थारे कुल की भुख मिटाणे के खातिर, खज़ाने हमनें बांट दियें "........, " तुम घात लगा कर बेठे हो, की रजपूतों से पंगा कर लेंगे ", आना कभी मैदानों में, वहीं तुम को हम नंगा कर देंगे "........, " सोच थारी ओछी है, ना जाने थारी कौम की बीमारी है ", दो कौड़ी के ख़च्चर से ज़्यादा, ना औकात तुम्हारी है "........, " मैदानों में आकर लड़ना खच्चरों, के बस की बात नहीं ", " मैदानों में जाकर चरना खच्चरों, की बस औकात यहीं "........, " म्हारी कौम स सबसे ऊपर, इसने हिंदू धर्म बचाया है ", ...