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Showing posts from September, 2018

अरब विजयता राजपूत सम्राट विग्रहराज चतुर्थ वीसलदेव चाहमान

#अरब_विजयता_राजपूत_सम्राट_विग्रहराज_चतुर्थ_वीसलदेव_चाहमान जीवन परिचय 🔶🔶सम्राट विग्रहराज चतुर्थ अथवा वीसलदेव (चाहमान वंश) के एक अति प्रतापी और विख्यात नरेश था, जिसने चाहमानों (चौहानों) की शक्ति में पर्याप्त वृद्धि तथा उसे एक साम्राज्य के रूप में परिणत करने का प्रयास किया । सन् ११५३ में विग्रहराज चतुर्थ वीसलदेव शाकम्भरी राजसिंहासन पर बैठा। ने सम्पूर्ण भारत में विजय पायी थी और अरबों को खदेड़ा था ११५३ से ११६४ तक राज्य किया, दिल्ली पर भी अधिकार किया था उन्होंने , मेवार से एक लेख प्राप्त हैं एवं मध्यकालीन इतिहास में लिखा हैं , को परास्त कर दिल्ली छीनकर अपने राज्य में मिला लिया था । डॉ. आर.सी. मजूमदार ने लिखा हैं की अपनी पराक्रम और शौर्य का परिचय देते हुये कई राज्य को जीत लिया था , अरबों को ना केवल भारत से खदेड़ा अपितु शौर्य का परचम तुर्क के शासक खुसरो शाह को परास्त कर लाहौर पर विजय पाया था । महाकवि सोमदेव ने वीसलदेव के प्रताप और शौर्य की प्रशंसा में 'ललित विग्रहराज' नमक ग्रन्थ लिखा । चाहमान वंश को आज नवीनतम इतिहास में चौहान कहा जाता हैं चाहमान वंश २५०० साल तक सम्पूर्ण जम्बूद्वी...

गाथा वीर चौहानों की ( भाग - 4 )

गाथा वीर चौहानों की ( भाग - 4 ) अंतिम लेख गाथा वीर चौहानों की आपने गोपेन्द्रराज तक पढ़ा था, गोपेन्द्रराज के बाद 784 ईस्वी में चाहमान शासन की बागडोर दुर्लभराज प्रथम के हाथ आयी, पृथ्वीराज विजय के अनुसार "" दुर्लभराज ने अपनी तलवार की धाक से गंगा तथा दक्षिण के समुद्र तक को हिला दिया । दुर्लभराज ने अपनी तलवार के दम पर बहुत उपलब्धियां तथा प्रसिद्धि प्राप्त की ।। दुर्लभराज ने भारत से लेकर दक्षिण तक के बहुत से राज्यो पर विजय प्राप्त की, दुर्लभराज का पुत्र गुवक प्रथम महान प्रतिहार साम्राज्य में सम्मानित सदस्य थे, उस समय प्रतिहार शाशन महापराक्रमी, महावीर नागभट्ट द्वितीय के हाथों में था, ओर ऐसे विराट साम्राज्य में सम्मानित सदस्य होना आम बात नही थी ।। पृथ्वीराज विजय के अनुसार दुर्लभराज ने अपना विजय अभियान बंगाल तक चलाया था, प्रतिहार राजा वत्सराज ने जब अपनी तलवार से चारो यत् धुंध मचा दी थी, उसमे दुर्लभराज का बहुत बड़ा योगदान था, दुर्लभराज प्रथम के विषय मे तो पृथ्वीराज रासो में कहा गया है कि " उन्होंने अपनी तलवार को गंगासागर में डूबा कर शुद्ध किया " गंगासागर को रक्...

कुछ लोगों को क्षत्रियों से बहुत जलन थी

#कुछ लोगों को क्षत्रियों से बहुत जलन थी, वे इतिहास की सच्चाई जानना चाहते थे....! कम समय में उन्हें सटीक जानकारी मिल जाए इसलिए वो एक प्रसिद्ध इतिहासकार के पास गए.....! इतिहासकार ने उन्हें बताया कि.....! भारत का इतिहास बहुत विशाल और बहुत पुराना है.....! जिसे पकड़ने में सालों साल लग जाएंगे............! आपको किस बारे में जानकारी लेना है.....! तो उन्होंने बोला कि हम क्षत्रिय, क्षत्रिय, क्षत्रिय सुनकर परेशान हो चुके हैं...! आप हमें उस इतिहास की जानकारी दीजिए जिनमें क्षत्रियों का नामों निशान ना हो.....! इतिहासकार ने कुछ देर सोचा और फिर उनको एक कोरा कागज दे दिया और कहा यह रहा भारत का इतिहास.....! कोरा कागज़ देखकर वे बोले इसमें तो कुछ नहीं है यह तो पूरा खाली है इसमें स्याही का एक कतरा भी नहीं है......! तो इतिहासकार ने हंसकर जवाब दिया......! जिस तरह बगैर स्याही के यह कागज शुन्य है, उसी तरह क्षत्रिय के बगैर भारत का इतिहास शून्य है........! कागज तो स्याही से लिखा जा सकता है। पर इतिहास रक्त एवं क्षत्रियों🚩 के बलिदान से लिखा जाता है। !!! क्षत्रिय धर्म युगे युगे !!! ...

क्यूँ ना #घमंड करूँ अपने वीर पूर्वजों पर ??

👉👉क्यूँ ना #घमंड करूँ अपने वीर पूर्वजों पर ??🤔 1. #बप्पा_रावल,- अरबो को हराया ओर हिन्दुऔ को बचाए रखा... 2 . #भीम_देव_द्वितीय -, मोहम्मद गौरी को 1178 मे हराया और 2 साल तक जेल मे रखा.. 3.#पृथ्वीराज_चौहान - गौरी को 17 बार हराया और हिन्दुओ की साख बचाई.. 4.#हमीरदेव - खिलजी को 1296 में काटा और हिन्दुओं की ताकत का लोहा मनवाया .. 5. #मानसिहं_तोमर- 1516 तक इब्राहिम लोदी को कई बार हराया.. 6. #वीर_शिवाजी- औरंगजेब को हराया ओर मुल्लों को बुरी तरह काटा.. 7. #वीर_संभाजी -जिन्होने जान दी लेकिन धर्म नही छोडा. 8. #राणा_सांगा - बाबर को भीख दी और धोका मिला ओर युद्ध मे 80 घाव के बाद भी लड़े लोधी को हराया.. 9. #राणा_कुम्भा- अपनी जिदगीँ मे 17 युद्ध लडे,एक भी नही हारे.. 10. #रानी_दुर्गावती-एक औरत नें अकबर को 3 बार हराया.. 11. #कान्हड_देव -1300 मे अलाउद्दीन खिलजी को हराया और सोमनाथ का शिवलिगं को वापिस लिया.. 12. #विरम_देव- जिसकी वीरता पे खिलजी की बेटी फिरोजा फिदा हो गई थी.. 13 . #पोरस_परमानंद_कटोच- क्षत्रिय कुल का सबसे पहला राजा जिसने सिकंदर को हराया.. 14 . #महाराणा_प्रताप- इन...

मित्रों रोचक जानकारी - विक्रमादित्य परमार

 👇🏽मित्रों रोचक जानकारी👇🏽 🌄 विक्रम संवत का उदय क्षत्रिय राजपूत राजा चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य परमार आईये उनके बारे मेँ कुछ रोचक तथ्य जानते हैँ। विक्रमादित्य का नाम उनके जन्म से पहले ही भगवान शिव ने रख दिया था। ¤ विक्रमादित्य परमार वंश के 8वेँ राजा थे। ¤ विक्रमादित्य ने मात्र 20 वर्ष की उम्र मेँ ही शकोँ को पूरे एशिया से खदेड़ दिया था। ¤ विक्रमादित्य ने भारत और एशिया को स्वतंत्र करवाने के बाद वे खुद राजगद्दी पर नहीँ बैठे बल्कि अपनेँ बड़े भाई भृर्तहरी को राजा बनाया पर पत्नी से मिले धोखे ने भृर्तहरी को सन्यासी बना दिया और उसके जब भृर्तहरी के पुत्रोँ ने भी राजसिँहासन पर बैठने से मना कर दिया तब विक्रमादित्य को ही राजसिँहासन पर बैठना पड़ा। ¤ विक्रमादित्य का राज्याभिषेक दिपावली के दिन हुआ था। ¤ विक्रमादित्य ने शको पर विजय हासिल कर विश्व के प्रथम कैलेँडर विक्रम संवत की स्थापना की थी। ¤ विक्रमादित्य ने अश्वमेध यज्ञ कर चक्रवर्ती सम्राट बनेँ थे। ¤ विक्रमादित्य के शासन मेँ वर्तमान भारत, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, जापान, अफगानिस्तान, म्यांमार. श्री ...

महाराजा विक्रमादित्य परमार

#महाराजा_विक्रमादित्य_परमार महाराज विक्रमादित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है,जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था । इन्ही के नाम से विक्रमी संवत चलता है। उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन परमार , जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य...बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी, जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली , आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमदित्य के कारण अस्तित्व में हैअशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया थाभारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित कियाविष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचायाविक्रमदित्य के 9 रत्नों में ...

कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत वंश का क्रमबद्द इतिहास

#__राजपूताना_इतिहास_कछवाहा_कछवाह #__क्षत्रिय_राजपूत_वंश_का_इतिहास ================================= कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत वंश का क्रमबद्द इतिहास लिखने से पहले मैं माँ भवानी के चरणों में नमन करता हूँ कछवाहा (कछवाह) क्षत्रिय राजपूत वंश का इतिहास लिखने के साथ-साथ मै आपको नरवर व उससे भी पहले के इतिहास के बारे में भी में विस्तार से बताने का प्रयास करूँगा नरवर से इस कछवाहा (कछवाह) वंश के वट वृक्ष कि शाखाएँ प्रफुलित होकर सर्वत्र फैली है जो कछवाहा (कछवाह) वंश का इतिहास समझने से पहले बहुत जरुरी है क्योंकि आज कल कुछ अवसरवादी व हल्कि सोच के गैर राजपूत लोग दूसरो का इतिहास चुराकर तोड़मरोड़कर पेश कर रहे हैं वे लोग उसमे अपने वंशजो के नाम जोङकर राजपूत वंश के हमारे पूर्वजो को अपने पूर्वज बताकर अपनी जाती या खाँप को उच्च एँव महान साबित करने की सोची समझी चाल के तहत हमारा इतिहास मिटाने कि कोशिस कर रहे हैं।  मगर सच तो यह हैकि आज हमारी युवा पीढ़ी जो अक्सर अपना और अपनें पूर्वज वंसजों का जातिगत इतिहास केवल बाज़ारू किताबों और इन्टरनेट पर दी गयी जानकारी की सहायता से कुछ ही जानकार...

बैस राजपूत वंश

==== बैस राजपूत वंश===== मित्रों आज हम आपको मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहुत सशक्त राजपूत वंश बैस क्षत्रियों के बारे में जानकारी देंगे, कृपया शेयर जरूर करें। ================================ बैस राजपूतो के गोत्र,प्रवर,आदि---- वंश-बैंस सूर्यवंशी क्षत्रिय कुल है।हालाँकि कुछ विद्वान इन्हें नागवंशी भी बताते हैं। गोत्र-भारद्वाज है प्रवर-तीन है : भारद्वाज ; बार्हस्पत्य और अंगिरस वेद-यजुर्वेद कुलदेवी-कालिका माता इष्ट देव-शिव जी ध्वज-आसमानी और नाग चिन्ह वंश नाम उचारण--- BAIS RAJPUT Bhais Rajput Bhains Rajput Bhainse Rajput Bains Rajput Bens Rajput Bhens Rajput Bhense Rajput Baise Rajput Bes Rajput Bayas Rajput Vais Rajput प्रसिद्ध बैस व्यक्तित्व--- शालिवाहन,हर्षवर्धन,त्रिलोकचंद,सुहेलदेव,अभयचंद, राणा बेनीमाधवबख्श सिंह,मेजर ध्यानचंद आदि शाखाएँ--- कोट बहार बैस,कठ बैस,डोडिया बैस,त्रिलोकचंदी (राव,राजा,नैथम,सैनवासी) बैस,प्रतिष्ठानपुरी बैस,रावत,कुम्भी,नरवरिया,भाले सुल्तान,चंदोसिया,आदि प्राचीन एवं वर्तमान राज्य और ठिकाने--- प्रतिष्ठानपुरी,स्यालकोट,स्थानेश्वर, मुंगी...

Raja Bhoj Parmar

 #राजा भोज ने अपने जीवन में हिंदुत्व की रक्षा के लिए 5 हजार से भी ज्यादा युध्द लडे आज तक किसी ने इतने युद्ध नहीं लडे । In Bhopal....Raja Bhoj Parmar Setu Aur unki pratima..... Jai Rajputana...

क्षत्रिय शेर

#ये बात उस दौर की है जब फैसले संसद में नहीं मैदान में हुआ करते थे... बात उस दौर की जब कानून कलम नहीं तलवारें लिखा करती थी... ये बात उस दौर की है जब इतिहास स्याही से नहीं रक्त से लिखा जाता था... ये बात उस दौर की जब आज की तरह जनतंत्र या लोकतंत्र नहीं था... तब होता था राजाओं का राज और चलता था राजतंत्र...  #क्षत्रिय_शेर🚩🚩🚩🚩 🚩#Jai_Shri_Ram 🙏 🚩#Jai_Shri_Krishna🙏 🙏#Maharana_Pratap🚩 🙏#Prithviraj_Chauhan🚩 🙏#Shivaji_Maharaj🚩 🙏#Maharaja_Chhatrasal🚩 🙏#Maharana_Sanga🚩 🙏#Durgadas_Rathore🚩 🙏#Maharana_Kumbha🚩 🙏#Banda_Singh_Bahadur🚩 🙏#Bappa_Rawal🚩 🙏#Bajjar_Singh_Rathore🚩 🙏#Bhimdev_Solanki🚩 🙏#HARSHVARDHAN_BAIS🚩 🙏#Bhoj_Parmar🚩 🙏#Anangpal_Tomar🚩 🚩जय राजपूताना 🚩जय माँ भवानी 🚩धर्म क्षत्रिय युगे युगे

मनुष्य अपने कठीन परिश्रम और कष्टो से ही अपने नाम को अमर कर सकता है। महाराणा प्रताप

🚩🚩मनुष्य अपने कठीन परिश्रम और कष्टो से ही अपने नाम को अमर कर सकता है। महाराणा प्रताप🚩🚩 ================================ 🚩मातृभूमि और अपने माँ मे तुलना करना और अन्तर समझना निर्बल और मुर्खो का काम है। 🚩हर मां कि ये ख्वाहिश है, कि एक प्रताप वो भी पैदा करे। देख के उसकी शक्ती को, हर दुशमन उससे डरा करे॥ 🚩धन्य हुआ रे राजस्थान,जो जन्म लिया यहां प्रताप ने। धन्य हुआ रे सारा मेवाड़, जहां कदम रखे थे प्रताप ने॥ 🚩करता हुं नमन मै प्रताप को,जो वीरता का प्रतीक है। तु लोह-पुरुष तु मातॄ-भक्त,तु अखण्डता का प्रतीक है॥ 🚩हे प्रताप मुझे तु शक्ती दे,दुश्मन को मै भी हराऊंगा। मै हु तेरा एक अनुयायी,दुश्मन को मार भगाऊंगा॥ 🚩जब-जब तेरी तलवार उठी, तो दुश्मन टोली डोल गयी। फीकी पड़ी दहाड़ शेर की, जब-जब तुने हुंकार भरी॥ 🚩था साथी तेरा घोड़ा चेतक, जिस पर तु सवारी करता था। थी तुझमे कोई खास बात, कि अकबर तुझसे डरता था॥ 🚩है धर्म हर हिन्दुस्तानी का,कि तेरे जैसा बनने का। चलना है अब तो उसी मार्ग,जो मार्ग दिखाया प्रताप ने॥ 🚩माई ऐडा पूत जण जैडा राणा प्रताप अकबर सोतो उज के जाण सिराणे साँ...

#Do_you_know...?? विश्वप्रसिद्ध आगरा किला जो विश्व की ऐतिहासिक धरोहरो में शामिल है

#Do_you_know...?? विश्वप्रसिद्ध आगरा किला जो विश्व की ऐतिहासिक धरोहरो में शामिल है, अपनी मजबूती और लाजवाब शिल्पकला के लिए जाना जाता है। अकबर के समय में #यदुवंशी_साम्राज्य_कल्याणपुरी (#करौली) में #जादौन_महाराजा_गोपालदास (1445 ई. से 1569 ई.) का शासन था। महाराज साहेब का राजतिलक ऊँटगिरी के दुर्ग में हुआ था। इन्होंने मुगलो को आतंकित कर करौली शहर को आबाद कराया। मीणा जनजाति द्वारा जगह जगह लूटपाट और आम जीवन को आतंकित होने की घटनाएं दिन ब दिन बढ रही थी जिसे महाराज बहादुर ने शांत कर एक जगह समेट दिया। आगरा किले के संस्थापक - जादौन राजपूत आगरा किले की नींव भी महाराजा गोपालदास ने ही रखी थी। बडे-बडे प्रकाण्ड ज्योतिषीयो ने भविष्यवाणी की थी कि जमुना किनारे कोई भी किला टिक नहीं सकता। अकबर हिन्दू रीति-रिवाज और सत्यता से भलीभाँति परिचित था। अकबर के द्वारा उपाय पूछने पर ज्योतिषाचार्यो ने बताया कि अगर इस किले की नींव #सम्राट_गोपालदास स्वयं अपने हाथो से रखे तो इस दुविधा से बचा जा सकता है क्योंकि अगर भगवान श्रीकृष्ण के वंशज के हाथो से नींव पडेगी तो, जमुना नदी का प्रवाह उस किले को कोई भी किसी ...

महाराजा_हरि_सिंह: जन्मदिवस पर शत शत नमन

#महाराजा_हरि_सिंह: जन्मदिवस पर शत शत नमन.💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 जम्मू-कश्मीर के अंतिम राजा जिन्हें कश्मीर समस्या का जिम्मेदार साबित करने की पुरजोर कोशिश कि गई. राजा अमर सिंह के पुत्र राजा हरि सिंह ने 1925 में जम्मू-कश्मीर रियासत की बागडोर अपने हाथ में ली. राजगद्दी पर बैठने के बाद राजा हरि सिंह ने अपनी इस रियासत से वेश्यावृत्ति, बाल-विवाह, अशिक्षा जैसी कई कूप्रथाओं का नामोनिशान मिटा दिया. ब्रिटेन सरकार हर हाल में जम्मू-कश्मीर रियासत पाकिस्तान को देना चाहती थी. लेकिन भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत वो सिर्फ ब्रिटिश भारत का विभाजन कर सकती थी.हालांकि पाकिस्तान में शामिल होने के लिए राजा हरि सिंह पर काफी दबाव डालने की कोशिश की गई. इसके लिए माउंटबेटन 15 अगस्त से दो महीने पहले श्रीनगर भी गए थे, लेकिन राजा हरि सिंह अपनी रियासत को पाकिस्तान में मिलाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे. महाराजा हरि सिंह एक साथ तीन तीन मोर्चों पर अकेले लड रहे थे। पहला मोर्चा भारत के गवर्नर जनरल और ब्रिटिश सरकार का था जो उन पर हर तरह से दबाव ही नहीं बल्कि धमका भी...