#अरब_विजयता_राजपूत_सम्राट_विग्रहराज_चतुर्थ_वीसलदेव_चाहमान जीवन परिचय 🔶🔶सम्राट विग्रहराज चतुर्थ अथवा वीसलदेव (चाहमान वंश) के एक अति प्रतापी और विख्यात नरेश था, जिसने चाहमानों (चौहानों) की शक्ति में पर्याप्त वृद्धि तथा उसे एक साम्राज्य के रूप में परिणत करने का प्रयास किया । सन् ११५३ में विग्रहराज चतुर्थ वीसलदेव शाकम्भरी राजसिंहासन पर बैठा। ने सम्पूर्ण भारत में विजय पायी थी और अरबों को खदेड़ा था ११५३ से ११६४ तक राज्य किया, दिल्ली पर भी अधिकार किया था उन्होंने , मेवार से एक लेख प्राप्त हैं एवं मध्यकालीन इतिहास में लिखा हैं , को परास्त कर दिल्ली छीनकर अपने राज्य में मिला लिया था । डॉ. आर.सी. मजूमदार ने लिखा हैं की अपनी पराक्रम और शौर्य का परिचय देते हुये कई राज्य को जीत लिया था , अरबों को ना केवल भारत से खदेड़ा अपितु शौर्य का परचम तुर्क के शासक खुसरो शाह को परास्त कर लाहौर पर विजय पाया था । महाकवि सोमदेव ने वीसलदेव के प्रताप और शौर्य की प्रशंसा में 'ललित विग्रहराज' नमक ग्रन्थ लिखा । चाहमान वंश को आज नवीनतम इतिहास में चौहान कहा जाता हैं चाहमान वंश २५०० साल तक सम्पूर्ण जम्बूद्वी...