एक छोटे से राजपूत भाई ने बड़े दिल से राजपुताना कविता लिखी है
पढ़ कर जरूर बताएं कैसे लगा
" भरते जो म्हारे हुक्के, वो अपनी औकातौं को भूल गये ",
" देते थे जो म्हारे पूर्वज , वो उन सौगातों को भूल गये "........,
" दिये थे हमने जिनको खेत खलियान, वो अहसानों को भूल गये ",
" जिनके ख़ातिर हमने शीश कटाये , वो बलिदानों को भी भुल गये "........,
" तुम्हरी रक्षा करते-करते, हमने प्राण ही त्याग दियें ",
" थारे कुल की भुख मिटाणे के खातिर, खज़ाने हमनें बांट दियें "........,
" तुम घात लगा कर बेठे हो, की रजपूतों से पंगा कर लेंगे ",
आना कभी मैदानों में, वहीं तुम को हम नंगा कर देंगे "........,
" सोच थारी ओछी है, ना जाने थारी कौम की बीमारी है ",
दो कौड़ी के ख़च्चर से ज़्यादा, ना औकात तुम्हारी है "........,
" मैदानों में आकर लड़ना खच्चरों, के बस की बात नहीं ",
" मैदानों में जाकर चरना खच्चरों, की बस औकात यहीं "........,
" म्हारी कौम स सबसे ऊपर, इसने हिंदू धर्म बचाया है ",
" थारी लूगायां न बेग़मा बनने से, म्हारे पूर्वजो ने ही बचाया है "........,
" हाथ जोड़ कर खड़े होतें थे, और नमन करती थी प्रकृति सारी"
" आज तो राजपूत नाम सुनते ही, जल जाती है दुनिया सारी"........,
" जाती वाद का ज्ञान हमें ना बांटो, हमनें रक्त बहाया है ",
"मर-कर कट-कर कुछ भी कर कर, हमने ही हिंदू धर्म बचाया है "........,
" क्षत्रिय कुल में राम जन्में, यदुवंशी कृष्ण राजपूत ही थे ",
" थारे घर की लाज राखणें, वाले क्षत्रिय राजपूत ही थे "........,
" हमनें अकबर को हराया, और हराया सिकंदर लोदी को ",
" देश हित में होगा जरूरी, तो हरा देंगे नरेंदर मोदी को "........,
" इससे भी बात ना बनीं, तो इससें भी ज्यादा लिख दूंगा में ",
" ठाकुर श्याम हूँ क्षत्रियों का वंशज,
" बिखरे हुए क्षत्रियों को, एक छत के नीचे ला दूंगा में "........,
जय भवानी...
जय राजा राम....
💪जय राजपूताना.....💯💯

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