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गोंडवाना की रानी दुर्गावती - भाग 2

गोंडवाना की रानी दुर्गावती - भाग 2

1541 ई.

* गोंडवाना के राजा संग्रामशाह का देहांत हुआ और उनके पुत्र दलपतिशाह गोंडवाना के शासक बने

दलपतिशाह के छोटे भाई चंद्रशाही नाराज़ होकर महाराष्ट्र चले गए, जहां उन्होंने चंद्रपुर में अपना राज कायम किया

1542 ई.

"रानी दुर्गावती का विवाह"

रानी दुर्गावती गोंडवाना के शासक राजा दलपतिशाह से विवाह करना चाहती थीं, लेकिन इस विवाह के लिए उनके पिता राजा शालिवाहन राजी नहीं हुए और उन्होंने एक स्वयंवर रखा, जिसमें दलपतिशाह को न्यौता नहीं भेजा

रानी दुर्गावती भागकर विवाह करने के पक्ष में नहीं थीं, इसलिए उन्होंने दलपतिशाह को पत्र लिखा, जिसमें कहा कि वे अपने पराक्रम और वैभव से स्वयं को साबित करते हुए मेरा हरण करे

स्वयंवर के अवसर पर राजा दलपतिशाह ने 12 हजार की फौज समेत हमला किया और विरोधी पक्षों पर जोर जमाते हुए कुछ को पराजित कर दिया | फौज की कमी के चलते राजा शालिवाहन भी कुछ न कर सके और दलपतिशाह रानी दुर्गावती को साथ ले गए |

रानी दुर्गावती का विवाह 18 वर्ष की उम्र में 25 वर्षीय दलपतिशाह के साथ हुआ

1543 ई.

राजा दलपतिशाह व रानी दुर्गावती के पुत्र वीर नारायण का जन्म हुआ

1546 ई.

* गढ़ा राज्य के प्रतापगढ़ पड़रिया के लोधी ज़मींदार ने विरोध किया, तो राजा दलपतिशाह ने उसे हटाकर श्यामचंद्र को वहां की ज़मींदारी सौंपी

* राजा दलपतिशाह ने अपनी राजधानी गढ़ा से सिंगोरगढ़ स्थापित कर ली

* राजा दलपतिशाह ने उमर खां रूहिल्ला नामक आक्रांता को पराजित किया

* राजा दलपतिशाह के शासनकाल में आधारसिंह बाघेला का योगदान महत्वपूर्ण रहा

1548 ई.

राजा दलपतिशाह की मृत्यु हो गई | इनका शासनकाल मात्र 7 वर्ष रहा |

इस समय उनके पुत्र वीर नारायण मात्र 5 वर्ष के थे

आधारसिंह बाघेला और मान ब्राह्मण की सलाह से राज्य की बागडोर रानी दुर्गावती ने संभाली और वीर नारायण को राजा की पदवी दे दी

रानी दुर्गावती का देवर चंद्रशाही मौके का फायदा उठाकर गोंडवाना का उत्तराधिकारी बनने के इरादे से आया, लेकिन प्रजा के विरोध के कारण उसे भागकर चांदा में शरण लेनी पड़ी

रानी दुर्गावती ने सिंगौरगढ़ के स्थान पर चौरागढ़ (वर्तमान मध्य प्रदेश में स्थित) को राजधानी बनाई | सतपुड़ा पर्वत के शिखर पर स्थित चौरागढ़ दुर्ग बहुत मजबूत था |

"मियानां आक्रमण"

होशंगाबाद के मियानां अफगानों के सरदार महंत खां की मौत के बाद नेतृत्वविहीन अफगानों के दल ने गढ़ कटंगा पर एक रानी का राज होने की ख़बर सुनकर बिना विचारे गढ़ा पर हमला कर दिया

रानी दुर्गावती के नेतृत्व में गौड़ राजपूतों ने मियानां अफगानों को बुरी तरह पराजित किया

इनमें से कई अफगान भाग निकले और बचे-खुचे अफगानों ने रानी की अधीनता स्वीकार की और सेना में भर्ती हो गए

शमशेर खां मियानां, मियां मिकारी, खान जहां आदि रानी दुर्गावती की फौज में प्रमुख अधिकारियों में से थे

* अगले भाग में रानी दुर्गावती व बाज बहादुर के बीच लड़े गए युद्धों के बारे में लिखा जाएगा

Written by - Tanveer Singh Sarangdevot 

* रानी दुर्गावती जी *

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