गोंडवाना की रानी दुर्गावती - भाग 3
1556 ई.
"रघुनंदन राय की नाराजगी"
राजपुरोहित महेश ठाकुर हमेशा रानी दुर्गावती को पुराण सुनाया करते थे, लेकिन एक दिन किसी कारण से नहीं आ पाए, तो उन्होंने अपने शिष्य रघुनंदन राय को भेज दिया
रानी को रघुनंदन राय की भाषा क्लिष्ट लगी और रानी ने कुछ आक्षेप किया, जिससे नाराज होकर रघुनंदन राय बस्तर के राजा के यहां चले गए, जहां उन्हें 7 हाथी देकर सम्मानित किया गया
रघुनंदन राय ने वापिस लौटकर एक हाथी रानी दुर्गावती को भेंट किया व शेष हाथी अपने गुरु महेश ठाकुर को दान कर दिए
रघुनंदन राय अकबर के पास चले गए, जहां अकबर ने उनको मिथिला की जागीर दी
1556-61 ई.
"बाज बहादुर का पहला हमला"
मालवा के बाज बहादुर ने गोंडवाना पर हमला किया
रानी दुर्गावती ने बाज बहादुर को बुरी तरह परास्त किया
इस लड़ाई में बाज बहादुर का चाचा फतह खां मारा गया
"बाज बहादुर का दूसरा हमला"
तारीख-ए-फरिश्ता में फरिश्ता लिखता है "रानी दुर्गावती से पहली दफ़ा शिकस्त खाकर बाज बहादुर सारंगपुर लौट आया और उसने गढ़ा पर हमला करने का इरादा किया | गढ़ा में कदम रखते ही उसे रानी दुर्गावती की फौज से लोहा लेना पड़ा | एक दर्रे के सिरे पर गौड़ राजपूतों की फौज से टक्कर हुई, जिसमें बाज बहादुर भाग निकला | लड़ाई की शुरुआत में ही बाज बहादुर की फौज घेर ली गई | उसकी फौज के बहुत से आदमी रानी ने बंदी बना लिए और बहुत से मौत के घाट उतार दिए | बाज बहादुर भागते हुए सारंगपुर पहुंचा | इस हार से बाज बहादुर ने खुद को बहुत ज़लील महसूस किया और खुद को हरम में कैद कर लिया | वह कई दिनों तक अपनी रानियों के बीच हरम में बैठा रहा"
बाज बहादुर अपनी पत्नी रूपमति के साथ शिकार करता हुआ
1562 ई.
"रानी दुर्गावती के राज्य के आसपास मुगलों को आधिपत्य"
अकबर की धाय माँ माहम अनगा के बेटे आधम खां ने रानी दुर्गावती के शत्रु बाज बहादुर को पराजित किया
बाज बहादुर की प्रिय रानी रूपमती ने ज़हर खाकर आत्महत्या की
बाज बहादुर भागकर मेवाड़ नरेश महाराणा उदयसिंह की शरण में चला गया
मालवा पर अकबर का अधिकार हुआ और रानी दुर्गावती के राज्य के आसपास मुगलों का आधिपत्य प्रारंभ हुआ
1562-63 ई.
"अकबर द्वारा रानी दुर्गावती का राज छीनने की लालसा"
* अकबर का पहला कूटनीतिक प्रयास :-
विशाल मुगल सल्तनत में मुगल बादशाह अकबर को रानी दुर्गावती के विस्तृत प्रदेश की स्वतंत्रता सहन नहीं हुई | इसके अतिरिक्त यह भी मान्यता है कि वह रानी दुर्गावती की सुंदरता के किस्से सुनने के बाद उन्हें पाना चाहता था |
अकबर ने गोप महापात्र और नरहरि महापात्र को दूत बनाकर रानी दुर्गावती के दरबार में भेजा
आधारसिंह बाघेला ने आदर सहित इन्हें दरबार के भीतर बुलाया
इन दूतों ने आगरा लौटकर अकबर को रानी के राजकाज के बारे में बताया
* अकबर का दूसरा कूटनीतिक प्रयास :-
अकबर ने आधारसिंह बाघेला को मुगल दरबार में आमंत्रित किया और रानी से मुगल अधीनता स्वीकार करवाने का प्रस्ताव रखा
आधारसिंह बाघेला ने अकबर के प्रस्ताव को नामंजूर करते हुए कहा कि "हमारा प्रदेश स्वर्ण से संपन्न है, लेकिन शत्रुओं के लिए हमसे अधिक कटु और कोई नहीं"
* अगले भाग में नराई-नाले के भीषण युद्ध के बारे में लिखा जाएगा
Written by - Tanveer Singh Sarangdevot
1556 ई.
"रघुनंदन राय की नाराजगी"
राजपुरोहित महेश ठाकुर हमेशा रानी दुर्गावती को पुराण सुनाया करते थे, लेकिन एक दिन किसी कारण से नहीं आ पाए, तो उन्होंने अपने शिष्य रघुनंदन राय को भेज दिया
रानी को रघुनंदन राय की भाषा क्लिष्ट लगी और रानी ने कुछ आक्षेप किया, जिससे नाराज होकर रघुनंदन राय बस्तर के राजा के यहां चले गए, जहां उन्हें 7 हाथी देकर सम्मानित किया गया
रघुनंदन राय ने वापिस लौटकर एक हाथी रानी दुर्गावती को भेंट किया व शेष हाथी अपने गुरु महेश ठाकुर को दान कर दिए
रघुनंदन राय अकबर के पास चले गए, जहां अकबर ने उनको मिथिला की जागीर दी
1556-61 ई.
"बाज बहादुर का पहला हमला"
मालवा के बाज बहादुर ने गोंडवाना पर हमला किया
रानी दुर्गावती ने बाज बहादुर को बुरी तरह परास्त किया
इस लड़ाई में बाज बहादुर का चाचा फतह खां मारा गया
"बाज बहादुर का दूसरा हमला"
तारीख-ए-फरिश्ता में फरिश्ता लिखता है "रानी दुर्गावती से पहली दफ़ा शिकस्त खाकर बाज बहादुर सारंगपुर लौट आया और उसने गढ़ा पर हमला करने का इरादा किया | गढ़ा में कदम रखते ही उसे रानी दुर्गावती की फौज से लोहा लेना पड़ा | एक दर्रे के सिरे पर गौड़ राजपूतों की फौज से टक्कर हुई, जिसमें बाज बहादुर भाग निकला | लड़ाई की शुरुआत में ही बाज बहादुर की फौज घेर ली गई | उसकी फौज के बहुत से आदमी रानी ने बंदी बना लिए और बहुत से मौत के घाट उतार दिए | बाज बहादुर भागते हुए सारंगपुर पहुंचा | इस हार से बाज बहादुर ने खुद को बहुत ज़लील महसूस किया और खुद को हरम में कैद कर लिया | वह कई दिनों तक अपनी रानियों के बीच हरम में बैठा रहा"
बाज बहादुर अपनी पत्नी रूपमति के साथ शिकार करता हुआ
1562 ई.
"रानी दुर्गावती के राज्य के आसपास मुगलों को आधिपत्य"
अकबर की धाय माँ माहम अनगा के बेटे आधम खां ने रानी दुर्गावती के शत्रु बाज बहादुर को पराजित किया
बाज बहादुर की प्रिय रानी रूपमती ने ज़हर खाकर आत्महत्या की
बाज बहादुर भागकर मेवाड़ नरेश महाराणा उदयसिंह की शरण में चला गया
मालवा पर अकबर का अधिकार हुआ और रानी दुर्गावती के राज्य के आसपास मुगलों का आधिपत्य प्रारंभ हुआ
1562-63 ई.
"अकबर द्वारा रानी दुर्गावती का राज छीनने की लालसा"
* अकबर का पहला कूटनीतिक प्रयास :-
विशाल मुगल सल्तनत में मुगल बादशाह अकबर को रानी दुर्गावती के विस्तृत प्रदेश की स्वतंत्रता सहन नहीं हुई | इसके अतिरिक्त यह भी मान्यता है कि वह रानी दुर्गावती की सुंदरता के किस्से सुनने के बाद उन्हें पाना चाहता था |
अकबर ने गोप महापात्र और नरहरि महापात्र को दूत बनाकर रानी दुर्गावती के दरबार में भेजा
आधारसिंह बाघेला ने आदर सहित इन्हें दरबार के भीतर बुलाया
इन दूतों ने आगरा लौटकर अकबर को रानी के राजकाज के बारे में बताया
* अकबर का दूसरा कूटनीतिक प्रयास :-
अकबर ने आधारसिंह बाघेला को मुगल दरबार में आमंत्रित किया और रानी से मुगल अधीनता स्वीकार करवाने का प्रस्ताव रखा
आधारसिंह बाघेला ने अकबर के प्रस्ताव को नामंजूर करते हुए कहा कि "हमारा प्रदेश स्वर्ण से संपन्न है, लेकिन शत्रुओं के लिए हमसे अधिक कटु और कोई नहीं"
* अगले भाग में नराई-नाले के भीषण युद्ध के बारे में लिखा जाएगा
Written by - Tanveer Singh Sarangdevot

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