== प्रतिहार शैली में बने बटेश्वर मंदिरों का इतिहास ===
मित्रों कुछ दिनो पहले इपिक चैनल द्वारा दिखाए जा रहे " एकांत सीरियल" में लक्ष्मणवंशी प्रतिहार राजवंश के शासन काल के समय बनवाये गये बटेश्वर मंदिर, पडावली मंदिर, चौसठ योगिनी मंदिर को बनवाने वाले परिहार वंश के बारे मे जानकारी दी गई।
एस. के. द्विवेदी ने प्रतिहार क्षत्रिय साम्राज्य पर भी चर्चा की और बताया की आज अगर हिन्दू धर्म भारत में बचा हुआ है उसका श्रेय परिहार राजवंश को जाता है। जिन्होंने अरबों से 300 वर्ष तक लगभग 200 से ज्यादा युद्ध किये जिसका परिणाम है कि हम आज यहां सुरक्षित है।
प्रतिहार क्षत्रियों का इतिहास सौ दो सौ वर्षों का न होकर हजारो वर्षो का यह कटु सत्य है कि इस धरती पर स्थाई रुप से किसी राजवंश ने शासन नही किया है। यहां अनेको क्षत्रिय राजवंशो ने समयानुसार शासन किया और अपने वीरता, शौर्य , कला का प्रदर्शन कर सभी को आश्चर्य चकित किया।
मित्रों मनुस्मृति में प्रतिहार ,परिहार, पडिहार, यह सभी शब्द एक है। जहां मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, में प्रतिहार लोग परिहार लिखते है वही राजस्थान में प्रतिहार लोग पडिहार शब्द से जाने जाते है और गुजरात के प्रतिहार लोग पढियार नाम से जाने जाते है।
आइये जानते है बटेश्वर के इतिहास को जो प्रतिहार शैली पर बना है जो अपने आप मे एक अदभुत कला है।
---- > बटेश्वर मंदिर का इतिहास < ----
मध्य प्रदेश के मुरैना से लगभग 35 किलोमीटर दूर बीहड़ों में एक जगह पड़ती है "बटेश्वर तीर्थ" वहां आठवीं से दसवीं शताब्दी के बीच परिहार क्षत्रिय वंशों द्वारा बनवाई गई अब तक सबसे बेहतरीन कला है करीब एक ही जगह पर 200 मंदिरों का निर्माण किया गया था।।
इन मंदिरों का निर्माण प्रतिहार/परिहार क्षत्रिय राजवंश के सम्राट मिहिरभोज के शासनकाल से प्रारम्भ हुआ और सम्राट विजयपाल प्रतिहार के शासनकाल के समय इन मंदिरों का निर्माण कार्य पूरा हुआ।।
भगवान् शिव और विष्णु को समर्पित ये मंदिर खजुराहो से भी तीन सौ वर्ष पूर्व बने थे चम्बल में डाकुवों के आतंक के कारण ये और भी उपेक्षित रहे और लगभग सारे के सारे गिर चुके थे।।
भारतीय पुरातत्व विभाग के डायरेक्टर (ASI) "के के मुहम्मद" ने इन मंदिरों को पुनर्स्थापित करने का जिम्मा उठाया हैं।।
के के मुहम्मद की वजह से ही आज प्रतिहार / परिहार क्षत्रियों द्वारा बनावाये दो सौ भी अधिक मंदिर वहां अपने पुराने रूप में लाये जा चुके हैं। के के मुहम्मद इन मंदिरों को अपना तीर्थ मानते हैं और चाहते हैं कि आने वाले समय में इस स्थान को तीर्थ यात्रा के रूप में मान्यता मिले, के.के. जी ने भारत के विभिन्न स्थानों पर कई मंदिरों का जीर्णोद्वार किया है।।
के के मुहम्मद मंदिरों और भारतीय मान्यातों का बहुत गूढ़ ज्ञान और श्रद्धा रखते है, और बिना श्रद्धा के इस तरह का पुनर्निर्माण संभव नहीं होता है ।।
बटेश्वर मंदिर के अलावा भी प्रतिहार राजपूतों ने कई चीजो का निर्माण किया था जिसमे मुरैना मप्र.के पडावली मंदिर, चौसठ योगिनी मंदिर आदि जो आप सभी मित्रों को वहां जाकर देखने को मिलेगा। आप सभी मित्रों से एवं परिहार क्षत्रियों से अनुरोध है कि अपने पूर्वजों की कला को जरुर देखे अभी यहां काम चल रहा टूटे हुए मंदिरों के जोडऩे पर काफी समय लगेगा फिर भी एक बार जरुर जाकर देखे।
https://www.youtube.com/watch?v=NQAzOmHE-fA&feature=youtube_gdata_player
जय मिहिरभोज।।
जय राजपूताना।।
https://www.rajputland.in/
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