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जय देव ! #धर्मवीर_बाबा_हासिल_देव_जी_की_जय_हो ! #आज_बाबा_हासिल_देव_जी_की_जयंती_है , बाबाजी को कोटि कोटि नमन !
जिस तरह जय सिंह खिंची चौहान जी , सिक्ख गुरु जी , बाबा बन्दा बहादुर जी और सम्भाजी महाराज के साथ बर्बरता करके शहीद किया गया था उसी तरह इस वीर राजपूत को शहीद किया गया था !
ये वो #राजपूत_वीर थे जिन्होंने शहादत देदी लेकिन सर नहीं झुकाया ! दिल्ली के बादशाह ने उन्हें तसीहें देकर शहीद कर दिया लेकिन बाबाजी बादशाह के आगे झुके नहीं !
जय देव ! #धर्मवीर_बाबा_हासिल_देव_जी_की_जय_हो ! #आज_बाबा_हासिल_देव_जी_की_जयंती_है , बाबाजी को कोटि कोटि नमन !
जिस तरह जय सिंह खिंची चौहान जी , सिक्ख गुरु जी , बाबा बन्दा बहादुर जी और सम्भाजी महाराज के साथ बर्बरता करके शहीद किया गया था उसी तरह इस वीर राजपूत को शहीद किया गया था !
ये वो #राजपूत_वीर थे जिन्होंने शहादत देदी लेकिन सर नहीं झुकाया ! दिल्ली के बादशाह ने उन्हें तसीहें देकर शहीद कर दिया लेकिन बाबाजी बादशाह के आगे झुके नहीं !
राजा हमीर देव जम्वाल का बिक्रमी 1456 से लेकर 1483 तक जम्मू पर राज था ! उनके दो बेटे थे - अजैब देव और हासिल देव ! राजा हमीर के देहांत के बाद उनका बड़ा बेटा अजैब देव राजा बना और कुछ समय बाद राजा अजैब देव के छोटे भाई बाबा हासिल देव जी को जम्मू की रियासत का वज़ीर बना दिया गया ! राजा अजैब देव जी की बिक्रम सम्वत 1514 में मृत्यु हो गई ! राजा का बेटा कुंवर बीरम देव उस समय बोहत छोटे थे ! वज़ीर हासिल देव जी ने अपने भतीजे को पाला और साम्राज्य को चलाने में पूर्ण मदद की , और साफ सुथरे ढंग से राज्ये चलाना सिखाया ! गुढ़ा स्लाथीआ और जम्मू में ये कहानी सुनाई जाती है के दिल्ली में लोधीओ का राज था ! सुल्तान ने बिराम देव को दिल्ली न्योता भेजा ! राजा बिराम देव बोहत खूबसूरत जवान थे सुल्तान की बेटी को राजा बिराम देव को देखते ही प्यार हो गया ! सुल्तान ने राजा बिराम देव को फरमान भेजा के वह इस्लाम कुबूल कर उसकी बेटी से शादी करें ! राजा बिराम देव के साथ वज़ीर बाबा हासिल देव भी उनके साथ आये हुए थे ! जब ये फरमान राजा बिराम देव तक पहुचा तो उन्होंने धरम बदलने की शर्त से मना कर दिया लेकिन शादी के लिए हाँ केह दी ! जब इस बात का सुल्तान को पता चला के राजा बिराम देव ने इस्लाम कुबूल करने से इंकार कर दिया और शादी के लिए मान गये , ये सुनकर सुल्तान आग बबूला हो उठा और बोहत गुस्से में आ गया ! उसने तुरंत क़ाज़ी को बुलाकर पूछा के राजा को क्या सजा दी जाये; क़ाज़ी ने राजा को सजाये मोत सुना दी ! जब इस बात का वज़ीर हासिल देव जी को पता चला तो वह राजा के बचाव के लिए सुल्तान के पास गये और सुल्तान को कहा के वह राजा को मनाने का मौका बक्शे क्युके राजा बिराम देव उन्हें अपना बाप समान इज़्ज़त करते हैं ! सुल्तान मान गया , हालात को देखते हुए वज़ीर हासिल देव जी ने राजा बिराम देव को रात के अँधेरे में कुछ चुनिंदा सिपाहियों के साथ वहां से निकालकर जम्मू भेज दिया ! इस बात की खबर सुल्तान को लग गई और उसने वज़ीर बाबा हासिल देव जी को कैद कर लिया ! सुल्तान ने फरमान जारी किया के बाबाजी की चमड़ी को जीतेजी उतार दिआ जाए और उनके ज़ख्मो में नमक डाला जाए , कुछ घंटो के अत्याचार और तसीहो के बाद बाबाजी हासिल देव जी को शहीदी प्राप्त हुई ! वज़ीर बाबा हासिल देव जी ने दिल्ली के सुल्तान के आगे सर नहीं झुकाया और ना इस्लाम कुबूला , हस्ते हस्ते उसके सब जुल्मोसितम सहे और अपने धरम की खातिर बलिदान दे गये ! बादशाह ने राजा बिराम देव जी को कैद करने के लिए शाही फौज भेजी लेकिन राजा बिराम देव ने युद्ध किआ और वह भी उस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए ! वज़ीर हासिल देव के दो बेटे थे - १) दाता राम जी और २) ओवाळी जी ! दाता राम जी के वंशज को मंगला की जागीर दी गयी और उन्हें मंगलिआ राजपूत कहा जाता है ! छोटे लड़के ओवाळी जी को गुरहा की जागीर दी गयी जो बाद में स्लाथीआ राजपूत कहाए ! Rajputs of Himalayas बाबा जी हासिल देव जी के बलिदान को कोटि कोटि नमन करता है जिनके कारन आज हम खुद को फकर से राजपूत कहते है और जिनके कारन आज हमारा धर्म कायम है !
जय राजपुताना !
जय डुग्गर !
जय राजपुताना !
जय डुग्गर !

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