Kuchaman Fort
#कुचामन फोर्ट
_____ कुचामन का किला _____
मित्रों आज हम आपको ऐसे किले की जानकारी देगे जो अपने आप में अदभुत है
लक्ष्मणवंशी प्रतिहार नरेश सम्राट नागभट्ट द्वारा निर्मित यह किला राजस्थान में है। प्रतिहार वंश के शासनकाल में ऐसे कई किलो का निर्माण हुआ जिसमे मण्डौर, जालौर, कुचामन, कन्नौज, ग्वालियर के किले प्रतिहार राजाओं के अत्यधिक मात्रा में समृद्धि होने के
का प्रमाण देते है। छठवीं शताब्दी से लेकर ग्यारहवीं शताब्दी तक इस प्रबल क्षत्रिय राजवंश ने हिन्दू धर्म को भारत से विलुप्त होने से बचाया है। धन्य है ऐसे राजवंश को जिसने इतिहास ही बदल दिया।।
300 वर्षो तक अगर विदेशी अरबों की आंधी को रोकने का पूर्णतयः श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह केवल प्रतिहार राजवंश को है जिसने हरिश्चन्द्र, नागभट्ट, वत्सराज, मिहिरभोज, महेन्द्रपाल, महीपाल, वीरराजदेव जैसे क्षत्रिय योद्धा दिये। भारत और भारत के वासी सदैव ही इस क्षत्रिय वंश के रिणी रहेगे।
कुचामन का किला राजस्थान के नागौर में स्थित है। यह किला राजस्थान के सबसे पुराने किलों में से है। यह किला पर्वत के सबसे ऊपरी हिस्से पर स्थित है जैसे के एक चील का घोंसला होता है । इसका निर्माण प्रतिहार क्षत्रिय वंश के महान सम्राट नागभट्ट प्रथम ने 750 ईo में इसका निर्माण कराया।।
कुचामन का किला अपने प्रखर और भीमकाय परकोटो, 32 दुर्गों, 10 द्वारो और विभिन्न प्रतिरोधक क्षमता वाला किला है। यह एकमात्र अनोखी वास्तुकला वाला किला है। इस किले में जल संरक्षण और प्रबंधन के अच्छे इंतेजाम है।।
किले में कई भूमिगत टैंक आज भी विद्यमान है कुचामन किले में कई भूमिगत गुप्त ठिकाने, प्राचीन अंधकूप, कारागार हैं जिन्हें आज भी देखा जा सकता है। वर्तमान मे अब ये हेरिटेज होटल में तब्दील हो गया है।।
#ध्यान_दे
#क्षत्रिय वंश प्रतिहार राजपूत वंश की ही एक शाखा है
#राजस्थान के दक्षिण पश्चिम में (गुर्जरात्रा प्रदेश) में प्रतिहार वंश की स्थापना हुई। ये अपनी उत्पति लक्ष्मण से मानते है। लक्षमण राम के प्रतिहार (द्वारपाल) थे। अतः यह वंश प्रतिहार वंश कहलाया। नगभट्ट प्रथम पश्चिम से होने वाले अरब आक्रमणों को विफल किया। नागभट्ट प्रथम के बाद वत्सराज शासक बना। वह प्रतिहार वंश का प्रथम शासक था जिसने त्रिपक्षीप संघर्ष त्रिदलीय संघर्ष/त्रिराष्ट्रीय संघर्ष में भाग लिया।
#गुर्जर-(प्रतिहार)
-प्रतिहार का अर्थ द्वारपाल होता है
-गर्जर-प्रतिहारो मे (गुर्जर जाति) का प्रतिक न होकर एक क्षेत्र/जगह विशेष का प्रतिक है
-चीनी यात्री हवेंसाग ने भी गुर्जर-प्रतिहार मे गुर्जर जगह का प्रतिक है व अपनी पुस्तक सी.यु.कि मे लिखा है कि #प्रतिहार (गुजरात्रा) कि सिमा के सुरक्षा प्रहरी थे*
#अग्निकुल के राजपूतो में सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रतिहार वंश था जो गुर्जरी की शाखा से संबधित होने के कारण इतिहास में गुर्जर प्रतिहार (Gurjara Pratihara) कहा जाता है |
#प्रतिहार वंश का यह अर्थ नहीं हुआ की ये गुर्जर जाती से है
#प्रतिहार वंश क्षत्रिय राजपूत वंश की ही एक शाखा है
जय नागभट्ट ।।
जय मिहिरभोज ।।
जय राजपूताना ।।

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