MS Dhoni❤
"Mahendra Singh Dhoni: The story of a young lad and unprecedented success"
ईर्ष्या के कारण भले ही आप किसी की योग्यता को उसकी अच्छी किस्मत कहकर नकार दें, आपका इगो संतुष्ट हो जाए पर इससे सच्चाई नहीं बदलेगी.
महेंद्र सिंह धोनी का भारतीय क्रिकेट में पदार्पण और उत्थान, सफलता की ऐसी कहानी है जो भारतीय क्रिकेट में पहले बहुत कम देखी गई है, एक छोटे शहर से उठकर लम्बे समय तक क्रिकेट की दुनिया को डॉमिनेट करना केवल क्रिकेटर्स ही नहीं बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो दूरदराज से बड़े शहर में आया हो. एक खालिस देसी लौंडा जिसे "ऑर्थोडॉक्स" चीज़ों से कोई लेना देना ना था, वो UPSC निकालनेवाले उन लौंडों जैसा था जो सस्ती कोचिंग से निकलकर सीमित साधनों के साथ बिना किसी ताम झाम के एग्जाम निकाल लेते थे. लेकिन अक्सर भौकाल ऐसे ही लौंडों का होता था... उस दौर में जब तमाम टीमों के पास बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाज थे, लेकिन भारतीय टीम में विकेटकीपर द्वारा बीस रन बना लेना भी एक बेहतरीन प्रदर्शन माना जाता था. शायद यही वजह थी कि महान भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली ने 2003 विश्वकप में कोई भी विशेषज्ञ विकेटकीपर खिलाने की बजाये राहुल द्रविड़ से पूरे विश्वकप में विकेटकीपिंग करा दी थी.
नयन मोंगिया के बाद पांच साल तक दीप दास गुप्ता, अजय रात्रा, पार्थिव पटेल और दिनेश कार्तिक जैसे कई असफल प्रयोगों के बाद चयनकर्ताओं ने रांची से आये महेंद्र सिंह धोनी को मौका दिया, जब कोई और विकल्प शेष ना बचा था... एक दो सीरीज के दम पर टीम में जगह बनाने वाले खिलाडी जब ट्राई कर लिए गए, तब एक और प्रयोग किया गया. पहले ही साल में पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ दो घोषणात्मक पारियों (Daddy Hundreds) ने बता दिया था कि धोनी मात्र प्रयोग का हिस्सा बनने नहीं बल्कि इतिहास लिखने आये थे, ये सिर्फ शुरुआत थी, भारतीय फैन्स को वो स्टार मिल चुका था जो रन चेज़ में चोक नहीं करता था, उस दौरान 2005-06 में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में भारतीय टीम ने चेज़ करते हुए रिकॉर्ड संख्या में मैच जीते. डेढ़ साल बाद जब इस खिलाड़ी को T20 विश्वकप के लिए जा रही टीम का कप्तान बनाया गया तो किसी ने उम्मीद नहीं की होगी कि टीम कप लेकर लौटेगी, लेकिन टीम ने इतिहास रचा और केवल "बाईलैटरल सीरीज की परफ़ॉर्मर" होने का भ्रम भी दूर कर दिया, बड़े बड़े ब्रांड अब धोनी के साथ दिखने लगे. अगले एक साल में अनिल कुंबले के संन्यास लेने के बाद धोनी को टेस्ट टीम की कमान भी सौंप दी गई.. आगे के चार सालों में भारतीय टीम ने जो सफलता हासिल की उसमे कप्तान धोनी के रोल को नजरअंदाज़ करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी, चाहे वो ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज हो या न्यूजीलैंड में टेस्ट और वन डे सीरीज में विजय, भारतीय क्रिकेट फैन्स के लिए लगातार इतने सेलिब्रेट करने के इतने सारे मौके एक साथ पहले कभी नहीं आये थे.
इन सब के बाद आया 2 अप्रैल 2011 का दिन, अपन तो यही चाहते थे कि मोहल्ला क्रिकेट से रिटायर होने से पहले एक वर्ल्ड कप का जश्न मना लें, 2003 के फाइनल में दर्शकों की जो पीढ़ी ग्रेजुएट हुई थी, उसके पास अभी भी एक दो साल बचे थे लौंडेपने के, और अपनी टीम ने इस बार निराश नहीं किया.. 23 मार्च 2003 को रिकी पोंटिंग ने जो दर्द दिया था, वो अब ख़त्म हो चुका था, और रवि शास्त्री का डायलॉग "Dhoniiiiii finishes off in style" दिल दिमाग पे हमेशा के लिए छप गया. अब कुछ नहीं चाहिए था टीम से. इसके बाद का दौर मिली जुली सफलता का रहा, जहां एक ओर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में लगातार आठ टेस्ट मैचों में हार मिली वही 2013 चैंपियंस ट्राफी भी भारतीय टीम के नाम रही. 2015 के वर्ल्ड कप और 2016 के टी20 वर्ल्ड कप में टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। एक बल्लेबाज के तौर पर भी धोनी पिछले दस सालों में सबसे सफल बल्लेबाजों में एक रहे हैं, लक्ष्य का पीछा करते हुए जीते गए मैचों में उनकी सौ से ज्यादा की औसत इसका प्रमाण है, नंबर 6 पर खेलते हुए सबसे ज्यादा रन बनानेवालों में भी धोनी पहले नंबर पर हैं. वो भले ही ऑर्थोडॉक्स ना हों, उनके शॉट भले ही ए बी डीविलीयर्स या विराट कोहली की तरह दिलकश और खूबसूरत ना लगें लेकिन उनका असर कतई कम नहीं है. उम्मीद है जब अपनी जीवनी मार्केट में लाएंगे तो लास्ट बॉल से अपने ऑब्सेशन को क्लेरीफाई करेंगे. किताब का नाम यही होगा, "The Bottom hand coming into play"
"माही" 😍


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