महाराजा गंगासिंह जी बीकानेर
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राज राजेश्वर नरेंद्र शिरोमणि महाराजा श्री गंगा सिंह जी राठौड़ , बीकानेर राज्य ।
महाराजा गंगा सिंह जी राठौड़ का नाम उन परोपकारी राजाओं में शामिल है जिन्होंने अपने राज्य को अड़ाने रखके प्रजा हित मे कार्य किये। महाराजा गंगा सिंह जी एक सबक है उन तथकथित सेक्युलरों के लिए जो कहते है महाराजाओं ने खाली अपने ही पेट भरे। लेकिन वास्तविकता ये नही है वास्तविकता तो ये है कि ये एक भ्रांति है जोकि राजनीतिक दलों द्वारा अपने आप को सक्षम सिद्ध करने के लिए घड़ी गए है।
महाराजा गंगा सिंह राठौड़ का जन्म 3 अक्टूबर 1880 को महाराजा लाल सिंह जी के घर हुआ। आप महाराजा डूंगर सिंह जी के छोटे भाई थे। बड़े भाई डूंगर सिंह जी देहत्याग के बाद आप बीकानेर के 1888 में महज 8 साल की उम्र में महाराजा बने।
आपने स्नातक अजमेर के मेयो कॉलेज से किया। शस्त्र एवं शास्त्र की विद्या आपने चुरू के लाल सिंह जी की देख रेख में ली।
जैसे ही महाराजा 18 साल के हुए बीकानेर रियासत में इतिहास कुख्यात छप्पणिया अकाल अथवा त्रिकाल पड़ा। महाराजा गंगा सिंह जी ने अपने सामने अपनी प्रजा को भूख से मरते हुए देखा। इस त्रिकाल में बीकानेर रियासत के एक लाख लोग भुखमरी से मर गए। लोग उस समय जांटी(खेजड़ी) की छाल भी रोटी बना के खा गए थे। रियासत के लगभग सभी पशु मारे गए बस ऊंट ही जीवित रहे। इसके बाद ऊंट का प्रचलन ज्यादा हो गया।
इस त्रिकाल की विभीषिका ने युवा महाराजा की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। महाराजा ने अपने बीकानेर राज्य में पानी लाने के लिए नहर लाने का सोचा। परन्तु पानी पंजाब के सतलुज नदी से ही लाया जा सकता था। बीकानेर के आड़े आने वाली रियासत बहावलपुर(पाकिस्तान में) एवं पटियाला रियासत थी। इन दोनों रियासतों ने महाराजा के रास्ते मे अनेक रोड़े अटकाए लेकिन महाराजा ने अंग्रेजो पर दबाव बनाके नहर बीकानेर के धोरों अथवा टीबों में ले आये। जिसका नाम था गंग कैनाल। लेकिन लोकतंत्र की सरकारों ने इसको भी नही छोड़ा और इसका नाम बदलकर इंदिरा गांधी नहर रख दिया।
महाराजा ने नहर लाने के पश्चात पंजाब से सिखों एवं अन्य काश्तकार जातियों को खेती करने के लिए लाए। हनुमानगढ़ ,सूरतगढ़ एवं गंगानगर में सिकलीगर, सांसी एवं सिख महाराजा द्वारा अपनी रियासत में खेती काम करने के लिए लाए गए थे। बाद में उनको बीकानेर रियासत द्वारा रहने के लिए भूमि प्रदान की गए।
महाराजा गंगा सिंह बीकानेर रियासत में रेलवे लेकर आये। जिसमे सादुलपुर, बीकानेर, चुरू, भादरा एवं हनुमानगढ़ की रेल लाइन उलेखनीय है। पहले रेल भादरा तक आती थी एवं वापस मुड़कर हनुमानगढ़ चली जाती थी। बाद में महाराजा जी को फरियाद के बाद भादरा से सादुलपुर लाइन 1938 में बनी। ये रेलवे लाइन आसपास के गांव के लोगो ने एक एक रूपया मजदूरी करके बनाये है। इस लाइन में कलाना, अनूपशहर, सिधमुख, हांसियावास एवं पहाड़सर शामिल है।
महाराजा गंगा सिंह ने सेना का आधुनिकीकरण किया एवं गंगा रिसाला का निर्माण किया।
महाराजा गंगा सिंह जी ने बीकानेर में कोर्ट की स्थापना की एवं रियासत में तहसील सिस्टम को लागू किया।
गंगा सिंह जी ने बीकानेर रियासत में हॉस्पिटल की स्थापना की एवं राज्य की स्वस्थ्य को सुधारने का प्रयास किया।
बीकानेर में डूंगर राजकीय कॉलेज की स्थापना की जो बीकानेर का सर्वश्रेठ कॉलेज है।
गंगा सिंह जी ने पंडित मदनमोहन मालवीय के साथ मिलकर बनारस हिन्दू अथवा काशी हिन्दू विश्वविधालय की स्थापना बनारस(वाराणसी) , उत्तरप्रदेश में की। महाराजा BHU के पैट्रन एवं कुलपति 15 साल तक रहे।
महाराजा गंगा सिंह जी भारत के सभी राजाओं के अध्यक्ष अथवा चेयरमैन ऑफ प्रिंस ऑफ चैम्बर रहे।
भारत के प्रथम एवं द्वितीय महायुद्ध में भाग लेने वाले एकमात्र महाराजा थे। इनकी टुकड़ी गंगा रिसाला इतिहास प्रसिद्ध है। जिसने मेसोपोटामिया (इराक) एवं चीन मे दुश्मन को नाकों चने चबवा दिए।
श्री गंगानगर शहर को बसाने का श्रेय भी आपको जाता है। आपने इस शहर को इंग्लैंड के पेरिस की तर्ज पर बसाया है।
बीकानेर की यूनिवर्सिटी का नाम 2003 मे महाराजा गंगा सिंह जी बीकानेर यूनिवर्सिटी आपके मान में कर दिया गया।
ऐसे सैंकड़ो परोपकारिता के काम गंगा सिंह जी के नाम है लेकिन मेरी लेखनी कम पड़ जाएगी।
महाराजा जी को सत सत नमन ।
आभार: प्रोफेसर लाल सिंह राठौड़ द्वारा रचित पुस्तक " महाराजा गंगा सिंह द रीगल पेट्रियट
राजपुताना को आप पर गर्व है।
जय भवानी
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