History of Bulandshahr (Uttar Pradesh)
-बरन(बुलंदशहर) के राजा चंद्रसेन डोड और डोड वंश-----
आजकल क्षत्रिय समाज द्वारा जगह जगह पर महाराणा प्रताप व पृथ्वीराज चौहान की जयंती मनाई जा रही हैं जो कि अच्छी बात है लेकिन इस सबको देखकर यह लगता है कि इतने विशाल क्षत्रिय समाज में जिसने कई हजार साल तक भारत पर राज किया, दर्जनों चक्रवर्ती सम्राट इस समाज में हुए, उस समाज में महाराणा प्रताप या चौहान साहब के अलावा कोई और महापुरुष पैदा ही नही हुआ। यहाँ तक की हर क्षेत्र, हर जिले तक में क्षत्रिय समाज के सैकड़ो महापुरुष रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य से इन महापुरुषों को याद करना तो छोड़ो, समाज के लोगो को इनके बारे में कोई जानकारी तक नही है।
संदर्भ - Govt. बुलंदशहर गजेटियर 1901
इसी तरह बुलंदशहर जिले में क्षत्रिय समाज की बहुत बड़ी आबादी है और इतिहास में अनेको क्षत्रिय महापुरुष इस जिले में पैदा हुए हैं जिनके बारे में यहाँ के बड़े बुजुर्गो को भी ज्यादा जानकारी नही है। इसीलिए उनके बारे में कम से कम संक्षिप्त रूप से बताया जाना जरुरी है। इसी कड़ी में सबसे पहले हैं डोड राजपूत वंश और राव चंद्रसेन डोड।
उत्तर मध्य काल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ से जलेसर, एटा और संभल तक पवार/परमार राजपूत वंश की शाखा डोड राजपूतो का शासन था जिनकी राजधानी बरन(आधुनिक बुलंदशहर) थी। बुलंदशहर में जिस इलाके को आज उपरकोट कहा जाता है वहां इनका किला होता था जिसे बलाई कोट भी कहा जाता था। आज भी वहां की इमारतो के नीचे किले और डोड राजपूतो की विरासत के अवशेष दबे हुए हैं। यही से मिले एक शिलालेख से ज्ञात होता है कि यहाँ डोड वंश की 16 पीढ़ियों ने राज किया है। जनश्रुतियो के अनुसार राजा विक्रमसेन डोड ने इस राज्य की स्थापना की। इस वंश में प्रतापी राजा हरदत्त डोड हुए जिनको मेरठ, हापुड़(हरिपुर), कोल(वर्तमान अलीगढ़) जैसे नगरो को बसाने का और उपरकोट किले को बनाने का श्रेय जाता है। महमूद गजनी के आक्रमण के समय इन्होने ही बरन(बुलंदशहर) में उसका मुकाबला किया था।
मोहम्मद गौरी की सेना ने जब बरन पर आक्रमण किया तो उस समय यहाँ राव चंद्रसेन डोड का राज था। गौरी की सेना ने महीनो तक किले(उपरकोट) का घेरा डाला लेकिन उसे सफलता नही मिली। इस दौरान राजपूत बार बार किले से बाहर निकल तुर्को पर हमले करते रहे जिनमे एक हमले में खुद राव चंद्रसेन ने अपने तीर से गौरी के मुख्य सेनापति ख्वाजा लाल अली को मौत के घाट उतार दिया। तुर्को ने राव चंद्रसेन को अनेक प्रलोभन दिए, धर्म परिवर्तन कर बड़ा राज्य प्राप्त करने का प्रलोभन भी दिया लेकिन राव चंद्रसेन ने घुटने नही टेके। परन्तु राव चन्द्रसेन के एक दरबारी जयपाल और पुजारी हीरादास ने गद्दारी कर रात को किले के दरवाजे खोल दिए जिसके बाद किले में भीषण शाका और जौहर हुआ। राव चंद्रसेन के नेतृत्व में हजारो राजपूतो ने लड़ते हुए अपनी जान दी।
गद्दार अजयपाल को बरन नगर की चौधराहट मिल गई और वह मुसलमान बन गया जिसके बाद गौरी ने उसे मलिक मुहम्मद दराज की उपाधि दी। उसके वंशज आज भी उपरकोट इलाके में मिलते हैं जिन्हें चौधरी या तन्ता भी कहा जाता है और 1947 तक ये लोग बुलंदशहर नगर की आधी जमीन के मालिक हुआ करते थे।
इस शाके में क्षेत्र में डोड राजपूत वंश का लगभग खात्मा हो गया और आज बुलंदशहर जिले में सिर्फ एक ही गाँव डोड राजपूतो का मिलता है जहां कई सदियों तक इनका शासन था। अलीगढ़, एटा जिले में कोल, जलाली, अतरंजीखेड़ा आदि से डोड राजपूत लोदी वंश के समय तक शासन करते रहे जिनमे राव बुद्धसेन और राव मंगलसेन जैसे पराक्रमी शासक हुए। जनश्रुतियो के अनुसार राव बुद्धसेन ने गंगा माँ की आराधक अपनी पुत्री के लिए कोल में इतनी ऊँची मीनार बनवाई थी जिसपर चढ़ कर गंगा जी दिखती थीं। यह अंग्रेजो के समय तक थी और उन्होंने बिना किसी कारण उसे डहा दिया। राव मंगलसेन जलाली या अतरंजीखेड़ा से शासन करते थे और उन्होंने कई बार तुर्को का मुकाबला किया। एटा, मैनपुरी क्षेत्र के जिस राजपूत राजाओ के संघ से लड़ते हुए युद्ध में बहलोल लोदी की मौत हुई थी उसमे राव मंगलसेन प्रमुख थे। लोदी शासको से लड़ते हुए ही अतरंजीखेड़ा में राव मंगलसेन के नेतृत्व में शाका हुआ और आज अलीगढ़ जिले के कुछ ही गाँवों में डोड वंश के राजपूत हैं।
मेरठ, मुरादाबाद जिलो में भी पवार वंश के कुछ गाँव मिलते हैं लेकिन वो डोड शाखा से हैं या नही इसकी पुष्टि नही हो पाई है।
लेकिन सबसे दुर्भाग्य की बात है कि बुलंदशहर में उपरकोट से थोड़ी दूरी पर जहां ख्वाजा लाल अली को राव चंद्रसेन ने मौत के घाट उतारा था वहां आज उसकी मजार है जहां मुसलमानों से ज्यादा हिन्दू मत्था टेकने जाते हैं लेकिन राव चंद्रसेन का स्मारक होना तो दूर बुलंदशहर के क्षत्रिय समाज के लोग तक उनके बारे में जानकारी नहीं रखते। क्षत्रिय समाज का इतना विशाल इतिहास होने के बावजूद क्षत्रिय समाज अपने इतिहास और पूर्वजो के प्रति जितना उदासीन है उतना दुनिया में कोई और समाज नही है। उत्तर भारत के मैदानों में ही ऐसी मुसलमानों की हजारो मजारे मिल जाएंगी जो राजपूतो के हाथो मारे गए और उन्हें गाजी पीर आदि मान कर पूजा जाता है लेकिन इन्ही मैदानों में हजारो राजपूत योद्धा तुर्को मुगलों से लड़ते हुए खेत रहे जिनके बलिदान के कारण आज हम गर्व से अपने को राजपूत कह पाते हैं लेकिन इन योद्धाओ में से किसी की स्मारक या समाधी होना तो दूर इनके बारे में इनके वंशजो को ही कोई जानकारी नही है और सिर्फ राजस्थान के कुछ राजपूत योद्धाओ के नाम पर उछलते रहते हैं। जिस तरह गुजरात में जगह जगह राजपूत योद्धाओ की समाधियाँ हैं और विस्तार से उनका इतिहास लिखा हुआ है जिस कारण सर्व समाज वहां के राजपूतो का सम्मान करता है उसी तरह उत्तर भारत में भी स्थानीय राजपूत इतिहास को संगृहीत कर हर जिले में कम से कम एक स्मारक ऐसा बनना चाहिए जिसमे उस जिले के इतिहास में क्षत्रिय समाज के ज्ञात अज्ञात हर बलिदानी को श्रधान्जली दी जा सके।
बुलंदशहर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है। बुलंदशहर, अनूपशहर,जहांगीराबाद,खुर्जा, स्याना, डिबाई, सिकंदराबाद व शिकारपुर इसके प्रमुख नगर हैं व बुलन्दशहर नगर इस जनपद का मुख्यालय है। बुलंदशहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिल्ली से ६४ किलोमीटर की दूरी पर बसा शहर है। साथ ही बहती है काली नदी। यह शहर मुखयतः सड़कों से मेरठ, अलीगढ़, बदायूं, गौतम बुद्ध नगर व गाजियाबाद से जुडा हुआ है। बुलंदशहर जनपद के नरौरा क्षेत्र में गंगा के किनारे भारत वर्ष में विद्यमान परमाणु विद्युत ताप ग्रह में से एक विद्युत ताप ग्रह स्थापित व सुचारू रूप से प्रयोग में है।
राजा अनूपराय ने भी यहाँ शासन किया जिन्होंने अनूपशहर नामक शहर बसाया उनकी शिकारगाह आज शिकारपुर नगर के रूप में प्रसिद्ध है। मुगल काल के अंत और ब्रिटिश काल के उद्भव समय में जनपद में ही मालागढ़ रियासत, छतारी रियासत व दानपुर रियासत की भी स्थापना हो चुकी थी जिनके अवशेष आज भी जनपद में विद्यमान है। दानपुर रियासत का नबाब जलील खान कट्टर इस्लामिक था और छतारी रियासत ब्रिटिश परस्त रही। अनूपशहर की तरफ जंगहरा तौमर खाप के राजपूतो के काफी गांव है, झंगीराबाद व सटे क्षेत्रो मे गोर/गोड राजपूतो के बाहुल गांव है, जिले मे राघव राजपूत चौहान राजपूतो के भी अधिक गांव है, खुर्जा मे सोलंकी राजपूत बैल्ट है व भाटी राजपूतो के भी बहुत गांव है ओर सटे जेवर क्षेत्र मे भाटी ठाकुर बेल्ट है, व जादोन ,कछवाह ये गोत के भी गांव जिले मे पाये जाते है।
#भूगोल
बुलन्दशहर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के ठीक पश्चिम में स्थित है। पूर्व में गंगा नदी व पश्चिम में यमुना नदी इसकी सीमा बनाती है। बुलन्दशहर के उत्तर में मेरठ तथा दक्षिण में अलीगढ़ ज़िले हैं। पश्चिम में राजस्थान राज्य पड़ता है। इसका क्षेत्रफल 1,887 वर्ग मील है। यहाँ की भूमि उर्वर एवं समतल है। गंगा की नहर से सिंचाई और यातायात दोनों का काम लिया जाता है। निम्न गंगा नहर का प्रधान कार्यालय नरौरा स्थान पर है। वर्षा का वार्षिक औसत 26 इंच रहता है। पूर्व की ओर पश्चिम से अधिक वर्षा होती है।
यातायात और परिवहन
#वायु_मार्ग
सबसे निकटतम हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। बुलन्दशहर से दिल्ली 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
#रेल_मार्ग
भारत के कई प्रमुख शहरों से रेलमार्ग द्वारा बुलन्दशहर पहुँचा जा सकता है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हापुड़ है।
#सड़क_मार्ग
बुलन्दशहर सड़क मार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, आगरा, अलीगढ़ और जयपुर आदि शहरों से सड़कमार्ग द्वारा जुड़ा है।
#उद्धयोग और #व्यापार
आज की तारिख मे दूध के कारोबार में बुलंदशहर देश में अपनी एक नयी पहचान बना रहा है। बुलंदशहर की पारस डेरी मधुसूधन डेरी सेवा डेरी जिले के साथ साथ एन सी आर को भी दूध मुहैया करा रही है। कुछ स्थानों पर राजपूतों तथा गुर्जरो, जाटों व ब्राह्मणो के परिश्रम से भूमि कृषि योग्य कर ली गई है।आज यहा बाहुल किसान जमिंदारी संख्या मे राजपूत जाती व जाट जाती के पास है, यहाँ की मुख्य उपजें गेहूँ, चना, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा, कपास एव गन्ना आदि हैं। सूत कातने, कपड़े बनाने का काम जहाँगीराबाद में, बरतनों का काम खुर्जा, लकड़ी का काम बुलंदशहर व शिकारपुर में होता है। कांच से चूड़ियाँ, बोतलें आदि भी बनती हैं।
खुर्जा में बनने वाली क्रॉकरी विश्व प्रसिद्ध है। गणतंत्र दिवस पर जिले का नाम बढ़ने वाली क्रॉकरी खुर्जा में ही बनाई जाती है। करघे से कपड़ा बुना जाता है। नगर बुलन्दशहर में पानी के हेंडपम्प बनाने की भी कई ईकाई है। खुर्जा व बुलन्दशहर नगर में कई नामी आयुर्वेदिक चिकित्सक भी रहे है।
#पर्यटन
बुलन्दशहर जनपद पर्यटन की दृष्टि से भी भारतवर्ष में उत्तम स्थान है। जनपद बुलंदशहर महान संतों, वैद्यों व योगियों की जन्म व् कर्म भूमि रहा है। यहाँ पर महाभारतकालीन साक्ष्य भी प्रमाण स्वरूप प्राप्त हुए है। वर्तमान में भी कई उच्च स्थिति संत व योगी यहाँ निवास करते है क्योकिं यह जनपद दो महत्त्वपूर्ण नदियों गंगा व यमुना के मध्य स्थित है और इस कारण से यह पवित्र भूमि है।
#बुलंदशहर-
यह जनपद का मुख्यालय नगर है। यहाँ ब्रिटिश कालीन टाउन हॉल है, जिसमें वर्तमान में जिला निर्वाचन कार्यालय है। नगर के मध्य काला आम चौराहे पर पार्क है जिसमें ब्रिटिश काल का विक्टोरिया क्लॉक टावर आज भी है। काला आम चौराहा शहीदों की वीर भूमि है इसका वर्तमान में नामकरण शहीद भगत सिंह के नाम पर शहीद चौक है, यहाँ पर ब्रिटिश अधिकारी क्रांतिकारियों को सरेआम फाँसी पर लटकाते थे, इसी वजह से इसे क़त्ल-ए-आम चौराहा कहते थे जो वर्तमान में अपभ्रन्शित होकर काला आम चौराहा हो गया। नगर में स्वयंभू शिवलिंग मंदिर है जिसका नाम राजराजेश्वर मंदिर है इस मंदिर का निर्माण राजा अनूपराय ने कराया था। नगर में तीन पुरातन मंदिर है भूतेश्वर महादेव, कालेश्वर मंदिर और देवी भवन मंदिर
नगर के चौक बाज़ार में प्राचीन राम मंदिर है और वही मंदिर के सड़क पार स्वयंभू प्रकट है सिद्ध हनुमान जी जहाँ मंगलवार व शनिवार को भक्तों की भारी भीड़ रहती है।
#अनूपशहर-
गंगा तट पर बसा यह शहर छोटी काशी के नाम से भी प्रसिद्ध है, इस शहर को राजा अनूपराय ने बसाया था इसी नगर के अंतर्गत महर्षि भृगु जी की तपस्थली है जिसे भृगु आश्रम के नाम से जानते है। महाकवि सेनापति की यह जन्मभूमि है।
#कर्णवास-
किवदंती है कि यहाँ प्रत्येक दिवस गंगा में स्नान कर के राजा कर्ण सवा मन स्वर्ण दान किया करते थे। यहाँ सिद्ध साधु बंगाली बाबा का भी आश्रम है जहाँ आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द अपनी भारत यात्रा के दौरान आये थे।
#अहार-
गंगा तट पर ही स्थापित माँ देवी का मंदिर है जहाँ भगवान कृष्ण की पटरानी रुक्मणी जी पूजा के लिए आती थी तथा भगवान कृष्ण व देवी रुक्मणी का प्रथम मिलन यही हुआ था। यही पास में सिद्ध बाबा (श्री महादेव) जी का मंदिर है जिसमें भगवान शिव की स्वयंभू लिंग है श्रावण मास व महाशिवरात्रि में लाखों श्रद्धालु गंगोत्री व ऋषिकेश से कावंड (गंगाजल) लाकर शिवलिंग पर चढाते है।
#बेलौन-
इस स्थान पर सिद्ध शक्ति पीठ है। यहाँ माँ दुर्गा से मनोकामना मांगने पर मनोकामना पूरी होती ही है। यह स्थान डिबाई नगर व नरौरा उपनगर के मध्य स्थित है।
#नरौरा-
यह स्थान परमाणु विद्युत ताप ग्रह के स्थापित होने से प्रसिद्ध है। आजादी के बाद गंगा पर प्रथम बैराज यहीं बना था जिसका उदघाटन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरु ने किया था।
#तथ्य
जनसंख्या - 50 लाख
क्षेत्रफल - 4352 वर्ग किलोमीटर
टेलीफोन कोड - 05732
जनपद में विधानसभा क्षेत्र-. #बुलंदशहर
2. #सिकंदराबाद
3. #शिकारपुर
4. #खुर्जा
5. #डिबाई
6. #अनूपशहर
7. #स्याना
अभी तक बुलंदशहर का इतिहास पढ़ रहे थे।गजेटियर बुलंदशहर मे सब लेखा जोखा है -सरकारी दस्ताबेज व इतिहासकारक रचना तथ्य सबूत अभिलेख भी पाए गए थे #धन्यवाद 👏👏
https://www.rajputland.in/
#ҡรɦαƭ૨เყα_૨αʝρµƭ


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