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परम वीर चक्र 1947 - कंपनी हवलदार मेजर पीरु सिंह शेखावत


||| वीर भोग्या वसुंधरा-राजा रामचन्द्र की जय |||

#परमवीरचक्र__विजेता
#हवलदार_मेजर_पीरू_सिंह_शेखावत जी को उनके शहीदी दिवस पर शत शत नमन ....

परम वीर चक्र 1947 - कंपनी हवलदार मेजर पीरु सिंह शेखावत
6th बटालियन राजपुताना राइफल्स(20 मई 1918 - 18 जुलाई 1948)

पाकिस्तानी फ़ौज ने तिथवाल के दक्षिण में एक चोटी पर कब्ज़ा कर रखा था। डी कंपनी के हवलदार मेजर पीरु सिंह को आदेश दिया गया की अपनी कंपनी के साथ मिलकर दुश्मनों पर हमला कर के उस चोटी को पुन: हासिल करना। 
दुश्मन पहले से के विजयी स्तिथि में था। उनके पास MMG (medium machine gun) थी, जिसे वे हर ओर से अपने आप को सुरक्षित रखे हुए थे। दुश्मनों को ऊंचाई का भी लाभ मिल हुआ था।

जब हवलदार मेजर पीरु सिंह अपनी कंपनी के साथ आगे बढे तो भारी गोला-बारी चालू हो गई। पाकिस्तानी सैनिक MMG से अँधा-धुंध फायरिंग करनी शुरू कर दी। साथ ही हथगोले भी आने लगे। दुश्मन ऊंचाई पर होने के कारण हवलदार मेजर पीरु सिंह और उनकी डी कंपनी दुश्मनों के सामने थी और एक आसन निशाने पर थी। इस शुरुआती जंग में पीरु सिंह के आधे से ज्यादा सैनिक साथी शहीद हो गये या बुरी तरह से घायल हो गए। परन्तु हवलदार मेजर पीरु सिंह ने हिम्मत नहीं हारी।

पीरु सिंह इन हालात में गरजते हुए आगे बढे और अपने साथियो की हिम्मत बढ़ते हुए सबसे नजदीक की दुश्मन के MMG की ओर बढ़ने लगे। उसी समय एक हथगोला उनके पास फटा और उनके शरीर पर कई जगह पर गहरे घाव हो गये। फिर भी हवलदार मेजर पीरु सिंह अपनी चिंता किये बिना आगे बढ़ते गये।स्टेन गन से फायरिंग करते हुए पीरु सिंह MMG तक पहुच गये। उनके शरीर के घावों में से लगातार रक्त बह रहा था फिर भी पीरु सिंह पीरु सिंह शेखावत दुश्मनों की MMG पर कूद गये और वहां सभी दुश्मनों को मार गिराया।

जब MMG के गूंज बंद हुई, तब पीरु सिंह को एहसास हुआ की उनकी डी कंपनी के सभी सैनिकों में वे अकेले ही बचे है। बाकि के साथी या तो वीर गति को प्राप्त हो गये है या केवल जान बची है। इसी समय दूसरी ओर से दुश्मनों ने एक ग्रेनेड उनकी ओर फेंका जो हवलदार मेजर पीरु सिंह के ठीक सामने फटा जिससे उनका चेहरा घायल हो गया।

अब उनके चेहरे से खून बहने लगा और आँखों में भी घाव हो गये, आगे बढ़ कर पीरु सिंह ट्रेंच से बाहर निकले और हाथ में ग्रेनेड लिए दुश्मन के अगले पोजीशन पर पहुचे।ज़ोर से गरजते हुए वे दुश्मनों के ट्रेंच में कूद पड़े और वहां दो दुश्मनों को मार गिराया। यह सब कुछ सी कंपनी के कमांडर ने देखा जो डी कंपनी के लिए समर्थन में फायरिंग कर रहे थे।

अब तक हवलदार मेजर पीरु सिंह दो दुश्मनों के बंकरों पर हमला कर वहां के सभी दुश्मनों को मार चुके थे। अब वे तीसरे दुश्मन के बंकर की ओर बढ़ने लगे। पीरु सिंह ने एक ग्रेनेड दुश्मन के ट्रेंच में फेंका तभी एक दुश्मन की गोली उनके सर में लगी और वे वहीं गिर गये। इसके साथ ही दुश्मन के ट्रेंच में पीरु सिंह के फेंके गये ग्रेनेड का धमाका हुआ। अब कंपनी हवलदार मेजर पीरु सिंह शेखावत वीर गति को प्राप्त हो चुके थे।कंपनी हवलदार मेजर पीरु सिंह शेखावत को उनके एकल निडर युद्ध कौशल के लिए मरणोंपरंत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह राजपूताना रायफल्स को मिलने वाला पहला ''परमवीर चक्र'' था..!

वाकी-टाकी पर सुने गए उनके अंतिम शब्द थे, ''राजा रामचंद्र की जय''

||| जय भारत-वंदे मातरम् |||


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