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तसिंग :- तसिंग ठिकाना जिला अलवर की बहरोड़ तहसील से 7 km दूर पश्चिम दिशा में स्थित है !


तसिंग :-

तसिंग ठिकाना जिला अलवर की बहरोड़ तहसील से 7 km दूर पश्चिम दिशा में स्थित है ! यह स्थल अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों की तलहटी में बसा हुआ है !
यहाँ पर बने हुए महल और दुर्ग बड़गूजर राजाओ की वैभव के प्रतीक है !आज भी इनको देखकर के ऐसा अनायास ही अनुमान हो आता है की तसिंग एक छोटा मोटा ठिकाना नही बल्कि अलवर राज्य का सामरिक व आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परगनो में से एक रहा है !

आईने अकबरी के अनुसार तहसील बहरोड़ के बडगूजरो के पास 58, 684 बीघा जमीन थी , जिसकी वार्षिक आय 4 , 43 , 612 रु. थी ! इनके पास 40 घोड़े व 500 पैदल सैनिक थे !

विक्रम संवत 1765 ( ईस्वी 1708 ) में माचेड़ी राज्य बड़गूजरों के हाथों से छूट गया तो वहाँ के राजा अधोत सिंह बड़गूजर अपने परिवार के जो सदस्य बचे उनको लेकर अपने नानेरा पाटण के तँवर राव इंदर सिंह के यहाँ आकर के रहने लगे !
कुछ समय के बाद पाटण के राव साहब व अन्य तंवरों ने राजा अधोत सिंह की सहायता करि जिसकी परिणामस्वरूप तसिंग पर राजा अधोत सिंह जी बड़गूजर ने तसिंग पर आक्रमण करने का विचार किया !
उस समय तसिंग पर तंवर नरेश हिन्दुसिंह की राजधानी थी ! लेकिन पाटण के तंवरों की सहायता से बड़गूजर सेना ने तसिंग पर आक्रमण किया ! तँवर व बड़गूजर की सम्मिलित सेना का हिन्दू सिंह सामना नही कर सका और तसिंग से भाग निकला !

इस प्रकार से विक्रम संवत 1786 ( ईस्वी 1729 ) में 12 गाँव कोटपूतली परगने के , 12 गाँव नारनोल परगने के , 12 गाँव बहरोड़ परगने के इस प्रकार से 36 गाँवो को मिलाकर के एक नया राज्य स्थापित किया व तसिंग को राजधानी बनाकर राजा अधोत सिंह का राजतिलक किया ! तसिंग काफी समय तक एक स्वतंत्र राज्य रहा !

विक्रम संवत 1797 ( ईस्वी 1740 ) में अधोत सिंह जी बड़गूजर ने एक महल बनवाया व ठाकुरजी का मंदिर बनवाया ! इस मंदिर में जो सालिग्राम जी की मूर्तियां है उन्हें राजा अधोत सिंह जी जब माचेड़ी से आये , उसी समय अपने साथ लेकर आये थे और तसिंग में जब यह मंदिर बनवाया तो वे सभी मूर्तियों उसमे स्थापित करवाई !
राजा अधोत सिंह बड़गूजर का पुराना गढ़ पहाड़ से नीचे समतल भूमि में महल चौक के पास खंडित अवस्था मे है !
अपने चारों पुत्रों के लिए अलग अलग महल भी बनवाये जो वर्तमान में जर्जर अवस्था मे है !

तसिंग में एक भव्य प्राचीन बावड़ी भी विद्यमान है , जिसके दर्शन करने से तसिंग के बड़गूजर राजाओं के गौरवशाली अतीत की स्मृतियां मानस पटल पर विचरने लगती है ! इसी बावड़ी में एक विशाल कुआ भी है जो नीचे तक पक्की ईंटो चुनाई द्वारा मजबूत स्थिती में है !

राजा अधोत सिंह बड़गूजर के 2 रानियां थी
1. जालूकी , अलवर के कछवाहा हरि सिंह की पुत्री विजय कंवर
2. चौमू के नाथावत , जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह के प्रधान सामन्त मोहन सिंह की बहन रंगावती कंवर

राजा अधोत सिंह बड़गूजर के 2 रानियों से कुल 7 पुत्र हुए
1 . कुँ दौलत सिंह ( बाद में राजा बने )
2 . कुँ गजसिंह
3 . कुँ गुमान सिंह
4 . कुँ जोध सिंह
5 . कुँ रूप सिंह
6 . कुँ सावंत सिंह
7 . कुँ रतन सिंह

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