चित्तौड़गढ़ के बहादुर राजपूतों और अकबर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा :-
अकबर ने चित्तौड़ विजय के कुछ महीने बाद इस विजय के उपलक्ष्य में एक जश्न रखा
इस जश्न में कई राजा और मुगल सिपहसालार आए
अकबर नशे में धुत्त था, उसने देखा कि कुछ मुस्लिम सिपहसालार चित्तौड़गढ़ के राजपूतों की बहादुरी की तारीफ कर रहे थे
अकबर खुद को मेवाड़ के राजपूतों की तरह बहादुर बताते हुए अपनी तलवार अपने ही सीने में घोंपने लगा
किसी की हिम्मत नहीं कि अकबर को उसका हाथ पकड़ कर रोक सके
तभी आमेर का कुँवर मानसिंह कच्छवाहा दौड़ता हुआ आया और अकबर को झटका दिया
इस झटके से अकबर की तलवार दूर जा गिरी, लेकिन तलवार से अकबर का अंगूठा थोड़ा कट गया
इस बात से अकबर को बड़ा क्रोध आया और उसने मानसिंह को जमीन पर पटक दिया
(मुगलकालीन पेंटिंग में नशे में धुत्त अकबर मानसिंह पर ज़ोर आज़माता हुआ और दूर गिरी तलवार देखी जा सकती है)
इस किस्से से पता चलता है कि मेवाड़ के राजपूतों ने किस तरह मुगलों के दिल और दिमाग पर अपनी वीरता की छाप छोड़ रखी थी ।।
अकबर ने चित्तौड़ विजय के कुछ महीने बाद इस विजय के उपलक्ष्य में एक जश्न रखा
इस जश्न में कई राजा और मुगल सिपहसालार आए
अकबर नशे में धुत्त था, उसने देखा कि कुछ मुस्लिम सिपहसालार चित्तौड़गढ़ के राजपूतों की बहादुरी की तारीफ कर रहे थे
अकबर खुद को मेवाड़ के राजपूतों की तरह बहादुर बताते हुए अपनी तलवार अपने ही सीने में घोंपने लगा
किसी की हिम्मत नहीं कि अकबर को उसका हाथ पकड़ कर रोक सके
तभी आमेर का कुँवर मानसिंह कच्छवाहा दौड़ता हुआ आया और अकबर को झटका दिया
इस झटके से अकबर की तलवार दूर जा गिरी, लेकिन तलवार से अकबर का अंगूठा थोड़ा कट गया
इस बात से अकबर को बड़ा क्रोध आया और उसने मानसिंह को जमीन पर पटक दिया
(मुगलकालीन पेंटिंग में नशे में धुत्त अकबर मानसिंह पर ज़ोर आज़माता हुआ और दूर गिरी तलवार देखी जा सकती है)
इस किस्से से पता चलता है कि मेवाड़ के राजपूतों ने किस तरह मुगलों के दिल और दिमाग पर अपनी वीरता की छाप छोड़ रखी थी ।।

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