चित्तौड़गढ़_किले_के_बारे_में_कुछ_रोचक_तथ्य.
#जरूर__पढ़ें
#चित्तौड़गढ़ किला राजपूत शौर्य के इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान रखता है।
#लगभग 700 एकड़ के क्षेत्र में फैला यह किला 500 फुट ऊंची पहाड़ी पर खड़ा है।
#राजस्थान का गौरव है चित्तौड़गढ़ का दुर्ग।
#चित्तौड़गढ़ दुर्ग भारत का सबसे विशाल दुर्ग है। यह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है जो भीलवाड़ा से कुछ किमी दक्षिण में है। यह एक विश्व विरासत स्थल है। चित्तौड़ मेवाड़ की राजधानी थी।
#राजस्थान अपनी स्थापत्य कला में काफी प्रसिद्ध है. यहां अनेक किले (Forts). दूर्ग आदि पाए जाते हैं जिससे यह पता चलता है कि यहां के शासकों को स्थापत्य कला में काफी दिलचस्पी थी. इसलिए सम्पूर्ण दुनिया को राजस्थान आकर्षित करता है. पूरी दुनिया से लोग यहां की कला को देखने के लिए आते हैं.
#कई सारे किलों में से एक है चित्तौड़गढ़ का किला. ये बेराच नदी (Berach River valley) के किनारे बसा हुआ है और अपनी ऐतिहासिक भव्यता के लिए काफी प्रसिद्ध है. यह भारत के सभी किलों में सबसे बड़ा माना जाता है. पहाड़ी पर बसा यह किला राज्य के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है. आइये इस लेख के माध्यम से चित्तौड़गढ़ किले के बारे में कुछ रोचक तथ्यों पर अध्ययन करते हैं.
#भारत के सबसे बड़े किलो में से एक जो UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल है वह है चित्तौड़गढ़ का किला. यह भारत का सबसे बड़ा किला माना जाता है. इसकी लम्बाई लगभग 3 किलोमीटर, परिधि 13 किलोमीटर लम्बी और तकरीबन 700 एकड़ ज़मीन पर फैला हुआ है.
#चित्तौड़गढ़ किले के परिसर में लगभग 65 ऐतिहासिक निर्मित संरचनाएं हैं, जिनमें से 4 महल परिसर, 19 मुख्य मंदिर, 4 स्मारक और 22 कार्यात्मक जल निकाय शामिल हैं. इस किले में 7 प्रवेश द्वार हैं: राम पोल, लक्ष्मण पोल, पडल पोल, गणेश पोल, जोरला पोल, भैरों पोल और हनुमान पोल. यानी की इस किले में अंदर जाने के लिए इन सात प्रवेश द्वारों से होकर जाना होगा और फिर सूर्य पोल को भी पार करना होगा जो कि मुख्य द्वार है.
#साथ ही पहाड़ की शिखा पर दुर्ग परिसर में कई जलाशय भी दुर्ग को विशेष बनाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि पहले इस किले में 84 जल निकाय थे जो 50,000 सैनिकों को 4 साल तक पानी की आपूर्ति प्रदान कर सकते थे, जिनमें से केवल अब लगभग 22 बचे हैं.
#इन सब आकर्षणों के अलावा सबसे खास हैं यहां के दो पाषाणीय स्तंभ, जिन्हें कीर्ति स्तंभ और विजय स्तंभ कहा जाता है. ये दो स्तंभ, किले के और राजपूत वंश के गौरवशाली अतीत को दर्शाते हैं. अपनी खूबसूरती, स्थापत्य और ऊंचाई से ये दोनो स्तंभ पर्यटकों को बहुत आकर्षित करते हैं.
#चित्तौड़गढ़ किले के अंदर कई महल व अन्य रचनाएं भी स्थापित हैं. जैसे कि पद्मिनी महल, राणा कुंभा महल और फ़तेह प्रकाश महल आदि. क्या आप जानते हैं कि इस किले का सबसे खास और खूबसूरत हिस्सा राणा कुभा का महल है. महल के अंदर झीना रानी का महल, सुंदर शीर्ष गुंबद और छतरियां, झीना रानी महल के पास गौमुख कुंड आदि खूबसूरत पर्यटन क्षेत्र हैं.
#इस किले का एक और खूबसूरत हिस्सा पद्मिनी महल है . यह महल किला परिसर के बीच एक छोटे सरोवर के निकट स्थित बहुत ही खूबसूरत है. एक अन्य ऐतिहासिक मंदिर जो कि भगवान सूर्य को समर्पित है इसी महल के नजदीक है. पद्मिनी महल का जनाना महल शीशों से निर्मितकक्षों से भरा हुआ है जो काफी अदभुत है.
#चित्तौड़गढ़ का किला जौहर कुंड के लिए भी जाना जाता है. हम आपको बता दें की 'जौहर प्रथा' राजस्थान में काफी प्रचलित है. यह सती प्रथा की तरह ही है परन्तु इसका उपयोग तब किया जाता था जब कोई राजा किसी युद्ध में अपने शत्रु से हार जाता था और अपने सम्मान को बचाने के लिए शत्रुओं के हाथ लगने की बजाय, महल की स्त्रियां कुंड की अग्नि में खुद को न्योछावर कर देती थी.
#चित्तौड़गढ़ किले में कई सारे मंदिर स्थापित हैं जैसे कलिका मंदिर, जैन मंदिर, गणेश मंदिर, सम्मिदेश्वरा मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर और कुंभश्याम मंदिर आदि. किले के दक्षिणी परिसर में कुंभश्याम मंदिर बना हुआ है. यह मीरां बाई का ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मंदिर है. ये सब मंदिर अपने बारीक़ नक्काशीदार कामों के लिए काफी प्रसिद्ध हैं.
#यह किला राजस्थान के शासक राजपूतों, उनके साहस, बड़प्पन, शौर्य और त्याग का प्रतीक है. अगर इस किले को विहंगम दृश्य से देखा जाये तो, यह कुछ-कुछ मछली के आकार का लगता है. इसको चित्तौर, चित्तौरगढ़, चित्तोर, चितोड़गढ़ अन्य नामों से भी बुलाया जाता है.
चित्तौड़गढ़ किले के बारे में जिसने 27 युद्ध झेले हैं।
#इतिहासकार कृष्ण कांत शर्मा ने बताया कि चित्तौड़गढ़ फोर्ट कुल 27 युद्ध झेल चुका है। जिसमें से 24 लड़ाइयों में यहां के राजाओं को जीत हासिल हुई थी। - वहीं 3 युद्ध ऐसे थे जिसमें युद्ध में हार का सामना करना पड़ा था। कृष्ण कांत ने हार का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि अगर किले को लाखों सैनिकों से घेर लिया जाए तो अंदर मौजूद लोगों का अनाज-पानी रुक जाता था। जिसके कारण राजा को दरवाजे खोलने पड़ते थे और युद्ध करना पड़ता था।
#1540 में प्रताप का जन्म हुआ, उसी समय महाराणा उदयसिंह ने खोए चित्तौड़ को जीता। इस जीत के साथ ही किले में एक विजय स्तंभ की स्थापना की गई।
- इससे पहले इस किले पर गहलोत, सिसोदिया, सूर्यवंशी और चा तारी राजपूतों का राज रहा। इस जीत में प्रताप की मां जयवंत बाई भी उदयसिंह के साथ थीं।
#चित्तौड़गढ़ का किला अपनी स्थापत्य कला और खूब सारे पर्यटक स्थलों जैसे की महल, जलाशय, स्तंभ, अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों का नज़ारा आदि के लिए काफी प्रसिद्ध है. दूर-दूर से इस किले को देखने के लिए पर्यटक आते हैं. यह राजस्थान की एक महत्वपूर्ण धरोहरों में से एक है.
क्षत्रिय राजपूत Kshatriya Rajput
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#चित्तौड़गढ़ किला राजपूत शौर्य के इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान रखता है।
#लगभग 700 एकड़ के क्षेत्र में फैला यह किला 500 फुट ऊंची पहाड़ी पर खड़ा है।
#राजस्थान का गौरव है चित्तौड़गढ़ का दुर्ग।
#चित्तौड़गढ़ दुर्ग भारत का सबसे विशाल दुर्ग है। यह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है जो भीलवाड़ा से कुछ किमी दक्षिण में है। यह एक विश्व विरासत स्थल है। चित्तौड़ मेवाड़ की राजधानी थी।
#राजस्थान अपनी स्थापत्य कला में काफी प्रसिद्ध है. यहां अनेक किले (Forts). दूर्ग आदि पाए जाते हैं जिससे यह पता चलता है कि यहां के शासकों को स्थापत्य कला में काफी दिलचस्पी थी. इसलिए सम्पूर्ण दुनिया को राजस्थान आकर्षित करता है. पूरी दुनिया से लोग यहां की कला को देखने के लिए आते हैं.
#कई सारे किलों में से एक है चित्तौड़गढ़ का किला. ये बेराच नदी (Berach River valley) के किनारे बसा हुआ है और अपनी ऐतिहासिक भव्यता के लिए काफी प्रसिद्ध है. यह भारत के सभी किलों में सबसे बड़ा माना जाता है. पहाड़ी पर बसा यह किला राज्य के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है. आइये इस लेख के माध्यम से चित्तौड़गढ़ किले के बारे में कुछ रोचक तथ्यों पर अध्ययन करते हैं.
#भारत के सबसे बड़े किलो में से एक जो UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल है वह है चित्तौड़गढ़ का किला. यह भारत का सबसे बड़ा किला माना जाता है. इसकी लम्बाई लगभग 3 किलोमीटर, परिधि 13 किलोमीटर लम्बी और तकरीबन 700 एकड़ ज़मीन पर फैला हुआ है.
#चित्तौड़गढ़ किले के परिसर में लगभग 65 ऐतिहासिक निर्मित संरचनाएं हैं, जिनमें से 4 महल परिसर, 19 मुख्य मंदिर, 4 स्मारक और 22 कार्यात्मक जल निकाय शामिल हैं. इस किले में 7 प्रवेश द्वार हैं: राम पोल, लक्ष्मण पोल, पडल पोल, गणेश पोल, जोरला पोल, भैरों पोल और हनुमान पोल. यानी की इस किले में अंदर जाने के लिए इन सात प्रवेश द्वारों से होकर जाना होगा और फिर सूर्य पोल को भी पार करना होगा जो कि मुख्य द्वार है.
#साथ ही पहाड़ की शिखा पर दुर्ग परिसर में कई जलाशय भी दुर्ग को विशेष बनाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि पहले इस किले में 84 जल निकाय थे जो 50,000 सैनिकों को 4 साल तक पानी की आपूर्ति प्रदान कर सकते थे, जिनमें से केवल अब लगभग 22 बचे हैं.
#इन सब आकर्षणों के अलावा सबसे खास हैं यहां के दो पाषाणीय स्तंभ, जिन्हें कीर्ति स्तंभ और विजय स्तंभ कहा जाता है. ये दो स्तंभ, किले के और राजपूत वंश के गौरवशाली अतीत को दर्शाते हैं. अपनी खूबसूरती, स्थापत्य और ऊंचाई से ये दोनो स्तंभ पर्यटकों को बहुत आकर्षित करते हैं.
#चित्तौड़गढ़ किले के अंदर कई महल व अन्य रचनाएं भी स्थापित हैं. जैसे कि पद्मिनी महल, राणा कुंभा महल और फ़तेह प्रकाश महल आदि. क्या आप जानते हैं कि इस किले का सबसे खास और खूबसूरत हिस्सा राणा कुभा का महल है. महल के अंदर झीना रानी का महल, सुंदर शीर्ष गुंबद और छतरियां, झीना रानी महल के पास गौमुख कुंड आदि खूबसूरत पर्यटन क्षेत्र हैं.
#इस किले का एक और खूबसूरत हिस्सा पद्मिनी महल है . यह महल किला परिसर के बीच एक छोटे सरोवर के निकट स्थित बहुत ही खूबसूरत है. एक अन्य ऐतिहासिक मंदिर जो कि भगवान सूर्य को समर्पित है इसी महल के नजदीक है. पद्मिनी महल का जनाना महल शीशों से निर्मितकक्षों से भरा हुआ है जो काफी अदभुत है.
#चित्तौड़गढ़ का किला जौहर कुंड के लिए भी जाना जाता है. हम आपको बता दें की 'जौहर प्रथा' राजस्थान में काफी प्रचलित है. यह सती प्रथा की तरह ही है परन्तु इसका उपयोग तब किया जाता था जब कोई राजा किसी युद्ध में अपने शत्रु से हार जाता था और अपने सम्मान को बचाने के लिए शत्रुओं के हाथ लगने की बजाय, महल की स्त्रियां कुंड की अग्नि में खुद को न्योछावर कर देती थी.
#चित्तौड़गढ़ किले में कई सारे मंदिर स्थापित हैं जैसे कलिका मंदिर, जैन मंदिर, गणेश मंदिर, सम्मिदेश्वरा मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर और कुंभश्याम मंदिर आदि. किले के दक्षिणी परिसर में कुंभश्याम मंदिर बना हुआ है. यह मीरां बाई का ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मंदिर है. ये सब मंदिर अपने बारीक़ नक्काशीदार कामों के लिए काफी प्रसिद्ध हैं.
#यह किला राजस्थान के शासक राजपूतों, उनके साहस, बड़प्पन, शौर्य और त्याग का प्रतीक है. अगर इस किले को विहंगम दृश्य से देखा जाये तो, यह कुछ-कुछ मछली के आकार का लगता है. इसको चित्तौर, चित्तौरगढ़, चित्तोर, चितोड़गढ़ अन्य नामों से भी बुलाया जाता है.
चित्तौड़गढ़ किले के बारे में जिसने 27 युद्ध झेले हैं।
#इतिहासकार कृष्ण कांत शर्मा ने बताया कि चित्तौड़गढ़ फोर्ट कुल 27 युद्ध झेल चुका है। जिसमें से 24 लड़ाइयों में यहां के राजाओं को जीत हासिल हुई थी। - वहीं 3 युद्ध ऐसे थे जिसमें युद्ध में हार का सामना करना पड़ा था। कृष्ण कांत ने हार का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि अगर किले को लाखों सैनिकों से घेर लिया जाए तो अंदर मौजूद लोगों का अनाज-पानी रुक जाता था। जिसके कारण राजा को दरवाजे खोलने पड़ते थे और युद्ध करना पड़ता था।
#1540 में प्रताप का जन्म हुआ, उसी समय महाराणा उदयसिंह ने खोए चित्तौड़ को जीता। इस जीत के साथ ही किले में एक विजय स्तंभ की स्थापना की गई।
- इससे पहले इस किले पर गहलोत, सिसोदिया, सूर्यवंशी और चा तारी राजपूतों का राज रहा। इस जीत में प्रताप की मां जयवंत बाई भी उदयसिंह के साथ थीं।
#चित्तौड़गढ़ का किला अपनी स्थापत्य कला और खूब सारे पर्यटक स्थलों जैसे की महल, जलाशय, स्तंभ, अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों का नज़ारा आदि के लिए काफी प्रसिद्ध है. दूर-दूर से इस किले को देखने के लिए पर्यटक आते हैं. यह राजस्थान की एक महत्वपूर्ण धरोहरों में से एक है.
क्षत्रिय राजपूत Kshatriya Rajput

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