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मिहिरभोज प्रतिहार ---


मिहिरभोज प्रतिहार ----
" ऐसा सूर्य तो रात के अंधेरे में निकला "
चारो ओर त्राहिमाम मचा था, तुर्की ओर अरब को सेनाएं जिस भी देश मे घुसती , उसे इस तरह लूटती ओर खसोटती की उनके जाने के बाद सालो तक उस देश से मातम खत्म तत् होता, यह एक नया धर्म आया था, वास्तव में शैतान ने धर्म का चोला पहन रखा था, इस्लाम के नाम पर इन अंतरास्ट्रीय डकैतों का एक ही काम था , तलवार और मशाल लेकर प्रत्येक हिन्दू घरों में घुसना, बच्चों को काटना, या उन्हें गुदामैथुन के लिए गुलाम बना लेना, स्त्रियों का बलात्कार करना , ओर ऐसे घोर कुकृत्य कर उन्हें इस्लाम की दीक्षा देना।
आज जो यह मुसलमान बने हुए है, वह सब उसी अत्याचार का शिकार लोग है, इनके पिता की हत्या हुई, माता का बलात्कार हुआ, उसके बाद ही यह मुसलमान बने है । कुछ एक आध अपवाद इसमे हो सकते है, जैसे कोई जाति बाहर हुआ हो, या खुद लालच में इस्लाम धर्म कबूल किया हो, लेकिन ऐसे लोग 100 में से पंद्रह ही है , बाकी के यह सारे लोग उसी ब्लात्कारी धर्म के अत्याचार का शिकार लोग है।
इस्लाम के आने से पहले भारत की अवस्था यह थी, की घरों में कभी ताले नही लगते थे, राजपूतो के शासन में जितनी आजादी थी, उतना ही कठोर कानून भी था, व्यक्ति के व्यभिचारी होने तक पर उसे कठोर दंड दिया जाता । बलात्कार , स्त्री अपमान जैसे अपराध पर तो ऐसा कठोर दंड दिया जाता, की स्वर्ग के देवता कांप उठते।
लेकिन अब भारत बदल चुका था, कासिम के आक्रमण के बाद इस्लाम का फंदा भारत मे डल चुका था। इस्लाम नाम का धर्म यह एक खलीफा ( एक राजा ) के यहां से संचालित होता, जो कि स्पेन, अफ्रीका और यूरोप तक पर अपना कब्जा कर चुके थे। उस समय विश्व मे सबसे बड़ी शक्ति कोई थी, तो उसका नाम था इस्लाम !!
भारत भी इस खतरे से परे नही था, बल्कि भारत और तो बड़ी क्रूर निगाह इन मल्लेचो की थी। लेकिन उस समय राजपूत कुल में एक ऐसे वीर प्रतापी महापुरुष ने जन्म लिया, जिसने भारत को अपने पूर्वजो के काल से भी सुंदर बना दिया, उनके पूर्वजो के काल मे तो घरों में केवल ताले नही लगते थे, लेकिन इस महापुरुष के गद्दी ओर बैठने के बाद तो सड़को पर पड़ा धन भी कोई उठाता ना था --
वो नाम था -- श्रीरामचन्द्र जी के छोटे भाई लक्ष्मण के वंश से आगे बढ़ा राजपुत कुल, वीरो के वीर , श्री विष्णु के मूर्त अवतार चक्रवर्ती सम्राट मिहिरभोज !!
मिहिरभोज का जन्म रामभद्र के यहाँ हुआ, उनके पिता महान सूर्यभक्त थे, उन्होंने सूर्यनारायण से अपने लिए कभी कुछ नही मांगा, सदैव यही प्रार्थना की , है सूर्यनारायण !! मुझे आप जैसा ही एक ऐसा प्रतापी पुत्र आप दे, जो इस राष्ट्र और धर्म की रक्षा कर सके ।
सूर्यनारायण के आशीर्वाद से रामभद्र को ऐसा ही पुत्र मिला, वो कम उम्र में में ही अपने दादा नागभट्ट के साथ हर युद्ध मे भाग लेते, ओर राजा तो क्या, राजकुमार बनने से पहले ही अपनी तलवार से मल्लेछो में धुंध मचा दी । पूरे भारत को विश्वास हो चुका था, की अब भारत की कमान एक ऐसे व्यक्ति के हाथ मे आने वाली है, जो स्वम् देवता है, जिसका प्रहार इंद्र के व्रज जैसा है, जिसकी छाती श्रीरामचन्द्र जी सी चौड़ी है।
लेकिन यह क्या ??? जाव राजतिलक का समय आया, तो मिहिरभोज कह उठे " मुझे नही चाहिए यह राजपाठ , मेरी खुशी तो भगवान की भक्ति में है, में योद्धा नही, एक सन्यासी बनना चाहता हूं । "
यह सुनकर तो सभी अवाक रह गए, जिसकी तलवार की आंधी से यमलोक हिल जाया करता था, वह आज सन्यास की बात कर रहा है ?
हे राजकुमार भोज !! तुम यह क्या कह रहे हो ? तुम्हे राजा नही, सन्यासी बनना है , उनकी माता ने कहा !!
हां माता !! में सन्यासी बनना चाहता हूं, में युद्ध के मैदान में भी सन्यासी ही था, लेकिन वहां मेरे कर्तव्य कुछ और थे, लेकिन मेरा इस रक्तपात से मन भर गया है, कर वैसे भी, इतने क्षत्रिय है, कोई भी राजा बने, क्या समश्या है ?
तुम जानते भी हो, की तुम कौन हो ?? हर राजपूत विष्णु का अंश होता है पुत्र, ओर तुम तो हमे ऐसे मिले भी नही, सूर्यनारायण से तुम्हारे पिता ने केवल आजतक यह मांगा की मेरा पुत्र राष्ट्र और धर्म की रक्षा करें !! और तुम ??
तुम शायद तुम भल रहे हो, की तुम्हारे सन्यास के बाद कैसे कैसे संकट राष्ट्र पर आ सकते है, निर्बल महिलाओं का मान भंग होगा, बच्चे गुलाम बनाये जाएंगे !! इतिहास खुद तुम्हारे सामने है !!
इस तरह के वचन जब माता ने कहे, तो भोज बोल उठे, की माता, आप स्त्री जाति को निर्बल ना कहे, जिसने मिहिरभोज को जन्मा है, वो स्त्री जाति कमजोर कैसे हो सकती है।
" मैं लक्ष्मण का वंसज, भोज यह प्रतिज्ञा करता हूँ, की में इन्ही मातृशक्ति की एक ऐसी सेना बनाउंगा, जो सम्पूर्ण धरती से मल्लेछो का सर्वनाश करेंगी । ""
ओर यही हुआ। मिहिरभोज की सेना में महिलाओं की भर्ती हुई, उन्हें शस्त्र हाथ मे दिए गए ।
उसके बाद जो हुआ, वह इतिहास है, विश्व शक्ति इस्लाम अपने बचने के ठिकाने ढूढ़ने लगी, सिंध में केवल 2 गुफा तक यह सीमित रह गए। मल्लेचो क् ऐसा घोर संघार पहले कभी नही हुआ । कश्मीर से कन्या कुमारी, आसाम , विंध्य पर्वत तक एक ही राजा और एक ही शाशक था !!
सम्राट मिहिरभोज ....

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