आओ सुनाता हूँ तुम्हे एक गौरव भरी कहानी, जिनके कारण मिट्टी भी चंदन है राजस्थानी ।
यह लगभग 1133 की बात है, कासिम ओर गजनवी उस समय तक भारत को लूट चुके थे, ओर इस्लाम का फंदा भारत के गले मे लटका चुके है । इस बार भारतीयों के सामने चुनोती ऐसी थी, जिससे पार पाना इतना आसान नही था, इस बार शैतान धर्म का चोला ओढ़कर प्रकट हुआ था । सिंध से लेकर आसाम तक कि प्रजा त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही थी, यहां तक कि वीरो की भूमि राजस्थान के पुष्कर क्षेत्र तक मातंग यानी मुसलमान बड़ी आबादी में फैल चुके थे, दूसरी ओर बाहरी आक्रमणों का खतरा भी लगातार बना रहता था ।
स्थिति बड़ी दयनीय थी । लेकिन उस समय अजयराज चौहान और सोम्म्लदेवी के राजमहल में भगवान शिव के रुद्रावतार की तरह एक महापराक्रमी योद्धा ने जन्म लिया, जिसका नाम था अर्णोराज चौहान !!
पृथ्वीराज विजय में अर्णोराज चौहान को लेकर कहा गया है -
अर्णोराजोथ सादाशिवमनिश मनुध्यायरूपप्रसन्ना
दसमात्रेवजन्मयतुलबलमिव प्राप्तपंचाननत्वम्
सर्वोवीपुण्डरीप्रकटविद्यटनोन्मत् मातङ्गराज
त्रासायाकारअवतार व्यवसितमकरोत पुष्करक्षेत्रम !!
सर्वोवीपुण्डरीप्रकटविद्यटनोन्मत् मातङ्गराज
त्रासायाकारअवतार व्यवसितमकरोत पुष्करक्षेत्रम !!
जिस समय मानव जीवन और संकट आ खड़ा हुआ था, उस समय पुष्कर क्षेत्र में एक अवतार पुरूष ने जन्म लिया। शिव के आशीर्वाद से हुए उस वीर का नाम अर्णोराज चौहान था । वह म्लेच्छ हांथियो को कुचलने वाला सिंह था । अपार बल से युक्त अर्णोराज नर में सिंह अवतार था ।
अर्णोराज चौहान के समय सिंध क्व गर्वनर ने अजमेर पर आक्रमण किया । यह संघर्ष अर्णोराज के पिता अजयराज के समय से चल रहा था। लेकिन इस बार अजमेर पर आक्रमण करके मुसलमानों ने बड़ी भूल कर दी । अर्णोराज चौहान और वीर राजपूतो की टोली में शत्रु सेना को घेर लिया, ओर रगेद रगेद कर मारा । कुछ जान बचाकर भागे, लेकिन अर्णोराज ने ऐसा प्रबन्ध किया कि जाते समय पानी तो दूर, घोड़े को खाने तक घांस नही मिली, सभी म्लेच्छ राजस्थान की बालू में धंस कर मर गए। यह एक महान ओर विशाल मलेछ नरसंघार था । इसके कारण ही अर्णोराज चौहान को मातंगराज यानी मल्लेचो पर शासन करने वाला कहा गया है । इसके बाद तो अर्णोराज चौहान के तलवार की आंधी ऐसी चली की सिंध तक चौहानों ने अपना झंडा गाड़ दिया ।
वास्तव में चौहान साम्राज्य के पितामह अर्णोराज चौहान ही थे । जिन्होंने अपने राज्य की सीमाओं को बाढ़ की गति से बढ़ाया था । यह आपके पूर्व पूर्व पूर्व पूर्वजो की कहानी है, ओर हमारे राजाओ की कहानी है, जिन्के कारण आज हमारा धर्म सुरक्षित है । हम स्वतंत्र है ।

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