#यादव #चन्द्रवँशी__राजपूत_वँश की एक शाखा है. जो महाराज यदु के वंशज है...जिनके वंशज आज भी उस परम्परा को निभा रहे हैं...यादव कुल के वंशज आज भी
( जादौन /जाधव /भाटी /जाडेजा) रियासतों के रूप में मिलते हैं.....यादव शव्द का उपयोग ये राजवँश शुरू से करते आ रहे है....पर करीब 90 साल पहले कई छोटी जातियों द्वारा इस शव्द का उपयोग शुरू क़रने से और बाद में यादव शव्द को अपना सरनेम बना लेने से लोग इसकी सच्चाई से भृमित हो गए हैं.... भगवान श्री कृष्ण के वंशज या असली यदुवंशी सभी के सभी राजवाड़े वाले हैं..चाहें वो किसी भी राज्य में हैं...और जिनके पास पूरे साक्ष्य है...की वो यदुवंशी है.....जैसे जैसलमेर का भाटी वँश इस वँश के पास भगवान श्री कृष्ण का छत्र आज भी मौजूद है जो 5000 से ज्यादा पुराना है जिसका उल्लेख्य भी पुराणों में है...इसलिए इस वँश को ( छत्राला यादव पति) कहा गया है....ऐसा ही द्वारिका क्षेत्र में रह रहे इसी वँश के दूसरे वंशज जाडेजा राजपूत वँश के पास ऐतिहासिक प्रद्युम्न का महल इन्ही के पास है...प्रद्युम्न भगवान श्री कृष्ण के पुत्र थे ..जिस महल को हाईकोर्ट ने सरकार से लेकर इन्हें दिया था..वो इसलिए किंयुकि इन्होंने भगवान श्री कृष्ण के वंशज होने का दावा ठोका था और साक्ष्य भी दिए थे.....इसलिए सिर्फ यादव लिखने से कोई यदुवंश राजपरिवार से नही जुड़ सकता........जो इंसान इन राजघरानो के अंतर्गत आता है वो तो असली यदुवंशी हो सकता है वाकी सिर्फ अनुयायी या भक्त हो सकते हैं ।।
जय श्री कृष्ण
( जादौन /जाधव /भाटी /जाडेजा) रियासतों के रूप में मिलते हैं.....यादव शव्द का उपयोग ये राजवँश शुरू से करते आ रहे है....पर करीब 90 साल पहले कई छोटी जातियों द्वारा इस शव्द का उपयोग शुरू क़रने से और बाद में यादव शव्द को अपना सरनेम बना लेने से लोग इसकी सच्चाई से भृमित हो गए हैं.... भगवान श्री कृष्ण के वंशज या असली यदुवंशी सभी के सभी राजवाड़े वाले हैं..चाहें वो किसी भी राज्य में हैं...और जिनके पास पूरे साक्ष्य है...की वो यदुवंशी है.....जैसे जैसलमेर का भाटी वँश इस वँश के पास भगवान श्री कृष्ण का छत्र आज भी मौजूद है जो 5000 से ज्यादा पुराना है जिसका उल्लेख्य भी पुराणों में है...इसलिए इस वँश को ( छत्राला यादव पति) कहा गया है....ऐसा ही द्वारिका क्षेत्र में रह रहे इसी वँश के दूसरे वंशज जाडेजा राजपूत वँश के पास ऐतिहासिक प्रद्युम्न का महल इन्ही के पास है...प्रद्युम्न भगवान श्री कृष्ण के पुत्र थे ..जिस महल को हाईकोर्ट ने सरकार से लेकर इन्हें दिया था..वो इसलिए किंयुकि इन्होंने भगवान श्री कृष्ण के वंशज होने का दावा ठोका था और साक्ष्य भी दिए थे.....इसलिए सिर्फ यादव लिखने से कोई यदुवंश राजपरिवार से नही जुड़ सकता........जो इंसान इन राजघरानो के अंतर्गत आता है वो तो असली यदुवंशी हो सकता है वाकी सिर्फ अनुयायी या भक्त हो सकते हैं ।।
जय श्री कृष्ण

Comments
Post a Comment