#जब_राजपुतानी_ने_काट_दि_मोहम्मद_घोरी_कि_गुदा
पढने मे टाइटल थोडा अजीब लगे किंतु सत्य है ।
राजपुत इतिहास मे सम्राट , राजा , महाराजा , महारावलो कि कमी नही जिन्होने अपनी तलवार के दम पर इस्लामी आतंकीयो से लोहा मनवाया हो । लेकिन ऐसी राजपुत वीरांगनो कि भी कमी नही जिन्होने राजपुतो के इतिहास को अपनी वीरता से गौरान्वीत किया हो ।
बात उस वक्त कि है , जब घोर साम्राज्य कि पताका सेनापती मोहम्मद घोरी के हाथो मे थी । मध्य एशिया से आए इन लुटेरो ने गजनी और मुल्तान जीत लिया जो कभी चौहान साम्राज्य का हिस्सा थे । उनका अब अगला निशाणा महान चालुक्य साम्राज्य था ।
मुहम्मद घोरी ने गुजरात की रानी नायका देवी की खूबसूरती के बारे में काफी कुछ सुन रखा था । नायकी देवी कंदब (आज के गोवा) के महामंडलेश्वर पर्मांडी की पुत्री थी। इनका विवाह गुजरात के महाराजा अजयपाल से हुआ था। अंगरक्षक द्वारा वर्ष 1176 में अजयपाल की हत्या के बाद राज्य की बागडोर महारानी नायका देवी के हाथ में आ गई थी , क्योंकि तब उनके पुत्र बाल्य अवस्था में थे।
पति की मौत के बाद वह अपने नवजात शिशु भीमदेव सोलंकी को साथ लेकर गुजरात की राजपाठ चलाती थीं । इतना सब सुनने के बाद नरपिशाच मुहम्मद गोरी खुद को रोक नहीं पाया बड़े पैमाने में जिहादी लूटेरो की सेना के साथ पाटण गुजरात की राजधानी की और निकल पड़ा । गोरी राज्य के साथ साथ नायिकी देवी को भी पाना चाहता था ।
रानी नायका देवी को बहुत अच्छे से पता था कि उनका मुकाबला किस दरिन्दे से होने वाला हैं उनके पास जितने भी सेना बल थे सबको एकत्रित कर के गुजरात की सीमा की और बढी और रानी नायका देवी ने रणनीति के तेहत अपनी सेनाओ को तैयार किया और घोरी को गुजरात सीमा के अन्दर आने से रोकना हैं । साथ ही उन्होंने महिलाओं और लड़कियो को अपनी आवरू बचाने के लिए प्राण त्यागने की बात कही थी ।
वहीं , गोरी के आक्रमण की पूर्व सूचना के आधार पर नायका देवी की सेना ने गुजरात की राजधानी पाटण से दूर आबू पर्वत की तलहटी में कयादरा के निकट पहुँच कर घोरी से युद्ध किया । इस युद्ध में गोरी बुरी तरह से घायल हुआ और उसे प्राण बचा कर भागते वक्त महारानी के वार से घोरी कि गुदा कट गई जिससे वह नपुसंक हो गया। घोरी को घसीटते हुए पाटण लाया गया वहा घोरी दो सालो तक कैद रहा बाद मे बडी रकम तथा कभी चालुक्य साम्राज्य पर आक्रमण ना करने कि शपथ लेकर उसे छोड दिया गया । कहते हैं नायका देवी के पराक्रम के आग पस्त होने के बाद गोरी ने कभी गुजरात की ओर मुड़ कर नहीं देखा । देश के इतिहास मे इतने बडे युद्ध को स्थान ना मिल पाना इतिहास के साथ गद्दारी ही है ।
जय महान चालुक्य ( सोलंकी ) साम्राज्य
जय राजपुताना
https://www.rajputland.in/
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