ईतिहास
कि सच्ची जानकारी ना होना ईशारा है पतन का ।
आज कुछ राजपूत क्षत्रिय समाज मै ही राजपूत , ठाकुर ,
राणा जैसे शब्दो का
क्षत्रिय वर्ण कि जाती बताया है , जो कि गलत हैं ।
पहलै राजा आपने वंशो से जाने जाते थे जैसे - सूर्यवंशी ,
चंद्रवंशी ,
अग्निवंशी ।
फिर हमको क्षत्रिय शब्द कि संज्ञा मिली और क्षत्रिय
एक वर्ण बन ग्या ।।
क्षत्रिय कुल तिलक भगवाल राम ओर लक्ष्मण
को पहली बार भगवाम परशुराम जी ने
राजपूत्र कहकर पुकारा था तब से क्षत्रियो को राजपूत्र
कहा जाने लगा ।
फिर विदेशी शक्ति ( अफागानो ) के साथ युध्द
कियो क्षत्रियो ने , अफगानो के पता
करने पर ये वीर जाती राजपूत्र थी ।
तब राजपूत्र ना कहकर उसने क्षत्रिय राजपुत्रों के
राजपूत कि संज्ञा दी ओर
संपूर्ण भारत मे क्षत्रिय वंश राजपूत नाम से प्रसिद्ध हुआ
।
राजपूत एक उपाधी है जो हम क्षत्रियो को प्राप्त हुई
थी ।
क्षत्रियो का नया नाम राजपूत हैं । अर्थात राजपूत
कहो सा क्षत्रिय एक हि
बात हैं ।

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