#इतिहास_के_महान_योद्धा #जरूर_पढ़े शायद इन क्षत्रिय राजपूतो ने गलती कर दी मुग़ल तुर्को से लड़ाई कर के अपनी संस्कृति को बनाये रखा
#इतिहास_के_महान_योद्धा #जरूर_पढ़े
शायद इन क्षत्रिय राजपूतो ने गलती कर दी मुग़ल तुर्को से लड़ाई कर के अपनी संस्कृति को बनाये रखा
1. ➡ बाप्पा रावल - मेवाड़ के गेहलोत वंशी राजपूत योद्धा जिन्होंने एक भी अरब मुस्लिम आक्रांता को भारत में नही आने दिया और हरा कर बहार खदेड़ा ईनके नाम तक से अरबी महिलाओ के गर्भ गिर जाया करते थे समूचा अरब खौफ खाता था
2. ➡ नागभट्ट प्रतिहार - अरब सेनाओं ने जिन जिन देशों व् साम्राज्यों को विजय किया ,वंहा कितनी भी सम्पन्न संस्कृति थी उसे समाप्त किया तथा वंहा के निवासियों को अपना धर्म छोड़ कर इस्लाम स्वीकार करना पड़ा। ईरान , मिश्र आदि मुल्कों की संस्कृति जो बड़ी प्राचीन व विकसित थी ,वह इतिहास की वस्तु बन कर रह गयी। अगर अरब हिंदुस्तान को भी विजय कर लेते तो यहां की वैदिक संस्कृति व धर्म भी उन्ही देशों की तरह एक भूतकालीन संस्कृति के रूप में ही शेष रहता। इस सबसे बचाने का भारत में कार्य नागभट्ट प्रतिहार ने किया। उसने खलीफाओं की महान आंधी को देश में घुसने से रोका और इस प्रकार इस देश की प्राचीन संस्कृति व धर्म को अक्षुण रखा। देश के लिए यह उसकी महान देन है। प्रतिहार/परिहार राजपूतो ने लगातार तीन सौ वर्षों तक अरब खलीफाओं से युद्ध कर भारत को अरबो से मुक्त कराया।
3. ➡ मिहिर भोज प्रतिहार - एक ऐसा राजा जिसने अरब तुर्क मुस्लिम हूण शक गुर्जर विदेशी आक्रमणकारियों को भागने पर विवश कर दिया और जिसके युग में भारत सोने की चिड़िया कहलाया। प्रतिहार/परिहार क्षत्रिय राजपूत वंश के नवमी शताब्दी में सम्राट मिहिर भोज भारत का सबसे महान शासक था। उसका साम्राज्य आकार, व्यवस्था , प्रशासन और नागरिको की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए चक्रवर्ती गुप्त सम्राटो के समकक्ष सर्वोत्कृष्ट था। भारतीय संस्कृति के शत्रु म्लेछो यानि मुस्लिम तुर्को -अरबो को पराजित ही नहीं किया अपितु उन्हें इतना भयाक्रांत कर दिया था की वे आगे आने वाली एक शताब्दी तक भारत की और आँख उठाकर देखने का भी साहस नहीं कर सके। चुम्बकीय व्यक्तित्व संपन्न सम्राट मिहिर भोज की बड़ी बड़ी भुजाये एवं विशाल नेत्र लोगों में सहज ही प्रभाव एवं आकर्षण पैदा करते थे। वह महान धार्मिक , प्रबल पराक्रमी , प्रतापी , राजनीति निपुण , महान कूटनीतिज्ञ , उच्च संगठक सुयोग्य प्रशाशक , लोककल्याणरंजक तथा भारतीय संस्कृति का निष्ठावान शासक था।
4. ➡ राणा सांगा अपने जीवन काल में 100 से ज्यादा युद्ध किये शरीर पर कुल छोटे बड़े 80 घाव थे एक आँख एक पैर युद्ध में गवाने के बाद भी बाबर से युद्ध लड़ा
5. ➡ राणा कुम्भा मेवाड़ की सीमा सुदृढ़ की अरबी लुटेरो से भारत को बचाया दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दिवार कुंभलगढ़ की दिवार का निर्माण किया
6. ➡ वीर पृथ्वी राज चौहान भारत के अंतिम हिन्दू सम्राट् मुहमद गौरी को 16 बार हराया सभी हिन्दू राजाओ को एक किया अंत में मरने से पहले दुश्मन मोहम्मद गोरी को शब्ध भेदी बाण से मार गिराया
7. ➡ महाराणा प्रताप विश्व के महानतम शासक योद्धाओ में से एक जीवन भर अपने मेवाड़ देश को आजाद करने के लिये युद्ध लड़े मुग़ल शासक अकबर इनके नाम मात्र से खौफ खाता था
8. ➡ रानी दुर्गावती गोंड़वाना की रानी दुर्गावती ने अकबर से वीरता पूर्वक युद्ध लड़ा अंत में हार होने पर अकबर के हरम में जाने की बजाए खंजर से खुद का आत्मदाह कर दिया
9. ➡ वीर जयमल - ने 1567 चित्तोड़ मे 8000 राजपूतो को लेकर अकबर की 60000 मुग़लिया सेना से युद्ध किया जो 40000 को काट कर सभी योद्धा शहिद हुए, किले की 12000 राजपुतानियो ने जौहर किया
10. ➡ वीर छत्रशाल बुंदेला
12 वर्ष की उम्र से इस बुंदेला राजपूत ने औरगन्जेब की नाक मे दम कर दिया मुगलिया शासन के बावजूद अपनी स्वतंत्र रियासत बनाई
"छत्ता तेरे राज में धरती धक् धक् होये,
जित जित घोड़ा मुख करे तिह तिह फत्तेह होये ।।"
11. ➡ दुर्गादास राठौर पूरी उम्र मुग़लो से लड़े जोधपुर के 4 वर्षीय राजा अजित सिंह को औरगंज़ेब के चुंगल से निकाला पूरी जींदगी स्वतंत्रता के लिये घोड़े पर निकाल दी बडे पैमाने पर मुस्लिम धर्मान्तरण रोक
12. ➡ मालदेव - मालदेव जोधपुर के महाराजा थे जो अपने समय में देश के सबसे ताकतवर शासको में में से एक थे मारवाड़ की सीमाओ से मुस्लिम आक्रान्ताओ को बहार खदेड़ा गुजरात मालवा के सुल्तानों को हराया
13. ➡ छत्रपति शिवाजी
छत्रपति शिवाजी मेवाड़ के सिसोदिया वंश से तालुक रखते थे मुग़लो और मुस्लिमो को हराया छोटे बड़े 52 किले जीते हिन्दूत्व का झंडा बुलंद किया महाराणा प्रताप के आदर्शो पर चले
14. ➡ महाराणा राजसिंह
ये मेवाड़ के महाराणा थे राज सिंह खुद को हिन्दुओ के सिरमौर की तरह देखते थे मावाड मेवाड की एकता की और औरंगेजब को मात दी मथुरा से मूर्ति लेकर श्री नाथ द्वारा में लगवाई अपने हिंदुस्तान में औरन्जेब के अत्यचार से पीड़ित हिन्दू महाराणा राज सिंह के मेवाड़ राज्य में शरण लेते
15. ➡ रानी कर्मावत और जवाहर बाई - रानी कर्मावती और जवाहर बाई रानी कर्मावती राणा प्रताप के दादी थी गुजरात/मालवा के बहादुर शाह ने जब चित्तौड पर आक्रमण किया तब रानी कर्मावती में जौहर किया और बहु जवाहर बाई जो राणा विक्रमाँदित्य की पत्नी थी उन्होंने राजपुत वीरांगनाओ की फ़ौज तैयार की और मुस्लिम सेना के खिलाफ लड़ी
"जहा एक और राजपूतानीया जौहर कर रही थी वही दूसरी और राजपुतनिया युद्ध कर रही थी"
16. ➡ रानी पद्मनवती
17. ➡ विरमदेव सोनिगरा
जालोर के शासक वीरमदेव सोनीगरा ने अल्लाउदीन ख़िलजी की सेना से युद्ध की किले में मौजुद 8000 राजपुतनियो ने जौहर किया व 7000 राजपूतो ने 40000 की तुर्की सेना से युद्ध किया और ज्यादा से ज्यादा दुश्मनो का खत्मा किया
18. ➡ राजा भोज
19. ➡ सुहेलदेव बैस
20. ➡ आनंदपाल तोमर
21. ➡ राजा हर्षवर्धन बैस
22. ➡ बन्दा सिंह बहादुर
बांदा सिंह जम्मू राज्य के राजपूत थे जिन्होंने पहले सिख राजपूत राज्य की स्थापना की और वीरता पूर्वक मुग़लो से लड़ते हुए शहिदी को प्राप्त हुए
गुरु गोविद सिंह के आग्रह पर ये वैरागी से योद्धा बने
23. ➡ जाम नरपतजी (जाडेजा) – जाम नरपतजी ने गजनी के पिरोजशाह बादशाह का सर उसी के दरबार मे काट डाला था | अदभुत शौर्य का प्रदर्शन करते हुए वे गजनी के सम्राट बने..
24. ➡ जाम अबडाजी “अडभंग” (जाडेजा) – 140 मुस्लिम लडकियो को बचाने के लिये दिल्ली के बादशाह अलाउदिन की विशाल सेना से युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हुए..
25. ➡ जाम साहेबजी, पबाजी और रवाजी (जाडेजा) – सिंध के मिर्जा ईशा और मिर्जा सले को झारा के युद्ध (प्रथम) मे शर्मनाक हार दी..
26. ➡ जाम सताजी, कुंवर अजाजी और मेरामणजी हाला (जाडेजा) – कर्णावती(अहमदाबाद) के सुल्तान मुझफ्फर शाह को दिल्ली के बादशाह अकबर से बचाने के लिये ‘भूचरमोरी’ मे युद्ध किया और वीरगति प्राप्त की। जुनागढ के नवाब और लोमा काठी की दगाबाजी की वजह से जीता हुआ युद्ध हारे..
27. ➡ राव देशलजी जाडेजा – ईरानी आक्रमणकर्ता शेर बुलंदखान की सेना के आगे अपने बहुत कम योद्धाओ को लेकर देशलजी ने विधर्मीयो को अपने पैरो तले कुचल डाला… ईरानी सेना पागल कुत्तो की तरह भागने को मजबूर हो गयी..
28. ➡ लाखाजी जाडेजा (विंझाण) – सिंध के गुलामशाह कल्होरा से झारा के दुसरे युद्ध मे लडे… अदभुत शौर्य प्रदर्शित कर वीरोचित मृत्यु को प्राप्त हुए..
29. ➡ रायसंगजी झाला (हलवद) – अकबर के दरबार के पंजहथ्था पहलवान के साथ लडे. रायसंगजी की मुठ्ठी के एक ही प्रहार से पहलवान का सिर उसके धड मे घुस गया… अतुलनीय पराक्रम का उदाहरण..
30. ➡ रानजी गोहिल – कर्णावती(अहमदाबाद) के सुल्तान को युद्ध मे हराकर वापस लौट रहे थे, लेकिन उनकी रानीयो ने गलतफहमी की वजह से जौहर कर लिया…ये देख रानजी गोहिल वापिस सुलतान की सेना पर टूट पडे और वीरगति को प्राप्त हुए..
31. ➡ मोखडाजी गोहिल – दिल्ली के सुल्तान की सेना के साथ युद्ध। सिर कट जाने पर भी धड लडता रहा…अदभुत शौर्य का प्रदर्शन..
32. ➡ लाठी के वीर हमीरजी गोहिल – 16 साल की उम्र मे सोमनाथ मंदिर की रक्षा हेतु अपने कुछ मित्रो के साथ मिलकर मुजफ्फरशाह की सेना से भिड गये…उन्होंने कहा-‘भले कोई आवे ना आवे मारी साथे, पण हुन जैस सोमनाथ नी सखाते'(कोई मेरे साथ आए ना आए, लेकिन में सोमनाथ की रक्षा के लिये जाऊँगा) सोमनाथ महादेव को सिर अर्पण कर युद्ध किया…विधर्मीयो को काटते-काटते रणशैया पर सो गये..
33. ➡ लखधीरजी परमार (मुली) – हेजतखाँ की पुत्री को बचाने के लिये सिंध के पादशाह की सेना से लडे, लखधीरजी और उनके परिवार ने सिंध की सेना का बहादुरी से सामना किया और वीरगति को प्राप्त हुए..
34. ➡ रा’नवघण (जुनागढ) – अपनी मुंहबोली बहन जाहल को बचाने के लिये सिंध पर आक्रमण किया। पादशाह को मारकर बहन जाहल को छुडाकर लाये..
35. ➡ सोलंकी वंश में जन्मे वचरा दादा गुजरात के सबसे बड़े लोकदेवता हैँ। इन्होंने गायो की रक्षा के लिये विवाह के फेरो से उठकर आकर युद्ध किया और सर कटने के बाद भी धड़ लड़ता रहा। आज गुजरात के घर घर में इनकी पूजा होती है।
36. ➡ पाटन के सोलंकी वंश की रानी नैकिदेवी के सेनापति वीरधवल वाघेला और भीमदेव सोलंकी 2nd (पाटन) – भीमदेव और सेनापति वीरधवलजी ने मुहम्मद गौरी की सेना को आबु के पर्वतो मे कुचल डाला और कुतुबूदिन ऐबक की सेना को भी गुजरात के बाहर खदेड दिया..
37. ➡ करनदेव वाघेला (पाटन) – अलाउदिन खिलजी की विशाल सेना के साथ लडे, हार गये लेकिन झुके नही, जंगलो मे जाके अपनी अंतिम सांस तक लडते रहे और वीरगति को प्राप्त हुए..
38. ➡ वीरसिंह वाघेला (कलोल) – कलोल के वाघेला सरदार ने गुजरात के सुलतान मोहम्मद बेगडा का सामना किया, सुलतान वीरसिंह की रानी से शादी करना चाहता था, वीरसिंह बहादुरी से लडते हुए वीरगति को प्राप्त हुए….रानी ने भी कुएं मे कुदकर अपनी जान देकर स्वाभीमान की रक्षा की..
39. ➡ ठाकोर रणमलजी जाडेजा (खीरसरा) - जूनागढ़ के नवाब ने खीरसरा पर दो बार हमला किया लेकिन रणमलजी ने उसे हरा दिया, युद्ध की जीत की याद मे जूनागढ की दो तोपे खीरसरा के गढ़ मे मौजूद हैँ ||
40. ➡ राणा वाघोजी झाला (कुवा) - मुस्लिम सुल्तान के खिलाफ बगावत करी, सुल्तान ने खलिल खाँ को भेजा लेकिन वाघोजी ने उसे मार भगाया, तब सुल्तान खुद बडी सेना लेकर आया, वाघोजी रण मे वीरगति को प्राप्त हुए और उनकी रानीयां सती हुई ||
41. ➡ राणा श्री विकमातजी || जेठवा (छाया) - खीमोजी के पुत्र विकमातजी द्वितीय ने पोरबंदर को मुगलो से जीत लिया। वहां पर गढ का निर्माण कराया। तब से आज तक पोरबंदर जेठवाओ की गद्दी रही है ||
42. ➡ राव रणमल राठोर (ईडर) - जफर खाँ ने ईडर को जीतने के लिये हमला किया लेकिन राव रणमल ने उसे हरा दिया. श्रीधर व्यासने राव रणमल के युद्ध का वर्णन 'रणमल छंद' मे किया है ||
43. ➡ तेजमलजी, सारंगजी, वेजरोजी सोलंकी (कालरी) - सुल्तान अहमदशाह ने कालरी पर आक्रमण किया, काफी दिनो तक घेराबंदी चली, खाद्यसामग्री खत्म होने पर सोलंकीओ ने शाका किया, सुल्तान की सेना के मोघल अली खान समेत 42 बडे सरदार, 1300 सैनिक और 17 हाथी मारे गये। तेजमलजी, सारंगजी और वेजरोजी वीरगति को प्राप्त हुए ||
44. ➡ ठाकुर सरतानजी वाला (ढांक) - तातरखां घोरी ने ढांक पर हमला किया, सरतानजी ने सामना किया पर संख्या कम होने की वजह से समाधान कर ढांक तातर खां को सोंप ढांक के पीछे पर्वतो मे चले गये, बाद मे चारण आई नागबाई के आशिर्वाद से अपने 500 साथियो के साथ ढांक पर हमला किया और तातर खां और उसकी सेना को भगा दिया, मुस्लिमो की सेना के नगाडे आज भी उस युद्ध की याद दिलाते ढांक दरबारगढ मे मोजूद है ||
45. ➡ ठाकोर वखतसिंहजी गोहिल (भावनगर) - भावनगर के पास ही तलाजा पर नूरूद्दीन का अधिकार था, ठाकोर वखतसिंहजी ने तलाजा पर आक्रमण किया। नूरुद्दीन की सेना के पास बंदूके थी लेकिन राजपूतो की तलवार के सामने टिक ना सकी। वखतसिंहजी ने खुद अपने हाथो नुरुदीन को मार तलाजा पर कब्जा किया ||
46. ➡ रणमलजी जाडेजा (राजकोट) - राजकोट ठाकोर महेरामनजी को मार कर मासूमखान ने राजकोट को 'मासूमाबाद' बनाया. महेरामनजी के बडे पुत्र रणमलजी और उनके 6 भाईओने 12 वर्षो बाद मासूम खान को मार राजकोट और सरधार जीत लिया, अपने 6 भाईओ को 6-6 गांव की जागीर सोंप खुद राजकोट गद्दी पर बैठे ||
47. ➡ जेसाजी और वेजाजी सरवैया (अमरेली) - जुनागढ के बादशाह ने जब इनकी जागीरे हडप ली तब बागी बनकर ये बादशाह के गांव और खजाने को लूटते रहे लेकिन कभी गरीब प्रजा को परेशान नही किया | बगावत से थककर बादशाह ने इनसे समझौता कर लिया और जागीर वापिस दे दी ||
48. ➡ रा' मांडलिक (जूनागढ) - महमूद बेगडा ने जुनागढ पर आक्रमण कर जीतना चाहा पर कई महिनो तक उपरकोट को जीत नही सका। इससे चिढ़कर जुनागढ के गांवो को लूटने लगा और प्रजा का कत्लेआम करने लगा, तब रा' मांडलिक और उनकी राजपूती सेना ने शाका कर बेगडा की सेना पर हमला कर दिया। संख्या कम होने की वजह से रा' मांडलिक ईडर की ओर सहायता प्राप्त करने निकल गये, बेगडा ने वहा उनका पीछा किया, रा' मांडलिक और उनके साथी बहादुरी से लडते हुए वीरगति को प्राप्त हुए ||
49. ➡ कनकदास चौहान (चांपानेर) - गुजरात के सुल्तान मुजफ्फर शाह ने चांपानेर पर हमला कर उस पर मुस्लिम सल्तनत स्थापित करने की सोची लेकिन चौहानो की तलवारो ने उसको ऐसा स्वाद चखाया की हार कर लौटते समय ही मुजफ्फर शाह की मृत्यु हो गई ||
50. ➡ विजयदास वाजा (सोमनाथ) - सुल्तान मुजफ्फरशाह ने सोमनाथ को लुंटने के लिये आक्रमण किया लेकिन विजयदास वाजा ने उसका सामना करते हुए उसे वापिस लौटने को मजबूर कर दिया, दो साल बाद सुल्तान बडी सेना लेकर आया, विजयदास ने बडी वीरता से उसका सामना कर वीरगति प्राप्त की ||
51.➡ वीर जैता-कुंपा ने मारवाड़ की 15000 राजपूती सेना को लेकर गीररि सुमेल नामक स्थान पर शेर शाह सूरी की 80000 हजार से युद्ध लड़ा जिसमे 60000 का डाले
शेर शाह सूरी को कहने पर मजबुर किया
"मुट्ठी भर बाजरे के लिये हिन्दुस्तान की बादशाहत खो बैठता"
▶आल्हा और उदल
▶ राव जोधा
▶हमीर चौहान
▶झाला मान सिंह झाला मान सिंह
हल्दी घाटी युद्ध में 'सलीम' (बाद में जहाँगीर) पर राणा प्रताप के आक्रमण को देखकर असंख्य मुग़ल सैनिक उसी तरफ़ बढ़े और राणाप्रताप को घेरकर चारों तरफ़ से प्रहार करने लगे। प्रताप के सिर पर मेवाड़ का राजमुकुट लगा हुआ था। इसलिए मुग़ल सैनिक उसी को निशाना बनाकर वार कर रहे थे। राजपूत सैनिक भी राणा को बचाने के लिए प्राण हथेली पर रखकर संघर्ष कर रहे थे। परन्तु धीरे-धीरे प्रताप संकट में फँसते ही चले जा रहे थे। स्थिति की गम्भीरता को परखकर झाला सरदार मन्नाजी ने स्वामिभक्ति का एक अपूर्व आदर्श प्रस्तुत करते हुए मुकुट पहन लिया और अपने प्राणों की बाजी लगाते हुए शहीद हुए
▶अमर सिंह राठौड़
▶रावल रतन सिंह
▶ महाराणा अमर सिंह
▶ राजा करण सिंह बीकानेर
कर्ण सिंह बीकानेर जंगलधर बादशाह जब राजपूताने के राजा कटक नदी के किनारे एक सम्मेलन में गए थे तब औरंगजेब ने राजस्थान के राजाओं को मुस्लिम बनाने का षड्यंत्र रचा और उन्हें बिना सेना के कटक नदी किनारे बुलाया ताकि जबरदस्ती “मुस्लिम” बनाया जा सके| औरंगजेब का मंसूबा जान राजाओं ने बीकानेर के राजा के नेतृत्व में उस षड्यंत्र को विफल किया वहा खड़ी मुग़लो की फ़ौज की नावों में आग लगा दी और भागने पर विवश किया
▶ कांहेडदेव सोनीगरा
▶ बल्लू जी चम्पावत
▶ राव शेखा जी
▶ राव बीका
▶ गोरा बादल
▶ राव चांदा
▶ महाराजा जसवंत सिंह
▶ कल्ला जी
▶ गोगाजी
▶ पाबूजी
▶ रामदेव जी तंवर
▶ डूंगर सिंह भाटी
▶दूल्हा भट्टी
▶जोरावर सिंह
▶बाज सिंह परमार
▶ बज्जर सिंह राठौड़
▶ बैणि माधव सिंह बैस
▶ रानी ईश्वरी सिंह देवी
▶ राम शाह तंवर
▶ हाड़ी रानी
▶ रानी किरण बाई
▶ भीमदेव सोलंकी
▶ राव सुरताण सिंह देवड़ा राव सुरताण देवड़ा सिरोही ने अपनी रियासत बचाने हेतु 1583 में दत्ताणी /रेवदर का युद्ध लड़ा ये राणा प्रताप और राजा चंद्रसेन के समकालीन थे
छोटी सी सेना लेकर अकबर की मुग़ल सेना को भगाया अकबर ने मेवाड़ को सिरोही की और से जीतना चाहा पर राव सुरताण देवड़ा के होते उसके मनसूबे पुरे नही हो पाये महाराणा प्रताप कुछ आबू की पहाड़ियो में भी रहे थे
▶ धीर सेन पुण्ढ़ीर
▶ अखेराज सोनीगरा
▶ राव दूदा मेड़ता जोधपुर बसाने वाले राव जोधा के पुत्र जिन्होने उजड़े मेड़ता को पुनः बसाया और पुष्कर अजमेर के मुग़लो मुस्लिम थानो को नष्ठ किया और 1000 गावो से ज्यादा की मेड़ता नाम की नयी रियासत बनाई इनके वंशज मेड़तिया नाम से प्रसिद्ध हुए वीर जयमल मेड़तिया ,कल्ला जी,मीरा बाई ,राव चांदा इन्ही राव दुदाजी के वंसज है
▶ कैमास दाहिमा
➡ ➡ चंपानेर-पावागढ़ के खींची शाखा के चौहान– कर्णावती(अहमदाबाद) की सल्तनत की नाक के नीचे उससे संघर्ष करते हुए चंपानेर के खींची चौहानो ने 200 साल तक स्वतंत्र राज किया। अंत में रावल पतई जय सिंह जी ने महमूद बेगड़ा के साथ 20 महीनेे चले युद्ध के बाद पकड़े जाने पर उनकी वीरता से प्रभावित हो बेगड़ा द्वारा उन्हें इस्लाम स्वीकार और राज्य वापिस करने का प्रस्ताव देने पर उन्होंने मौत स्वीकार करी और उन्हें तड़पाकर मार डाला गया..
➡ ➡ इडर में राठौड़ो ने सैकड़ो साल तक अपने बगल में स्थित कही ज्यादा ताकतवर मुस्लिम सुल्तानों से लड़ते होने के बावजूद अपना अस्तित्व बनाए रखा और मस्जिदो को तोड़कर वापिस मन्दिर बनाते रहे। राव रणमल ने अपने से कई गुना ताकतवर सुल्तान मुजफ्फर शाह को बुरी तरह हराकर उसका घमण्ड तोडा
➡➡ पुष्कर के पास पूर्व रियासत मेड़ता के मेड़तिया राठोड़ो ने हिंदुओ के तीर्थ पुष्कर की सदैव रक्षा की राज सिंह के नेतृत्व में 700 सहोदर मेड़तिया राजपुतो ने गायो की रक्षा हेतु औरंगजेब की सेना से युद्ध किया और 1700 मुग़लो को मार डाला पर एक भी गाय कटने न दी आज इनवीरो की याद में पुष्कर में गौ घाट बना हुआ है
ऐसे ही हजारो योद्धा जो हिंदुत्व के लिए कुर्बान हो गए।
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