डरपोक दूर रहे शेरभाई "जय माँ भवानी" लिखो शेयर करके एकता दिखाओ
मेरा अपराध है कि मैं राजपूत हूँ लोकतंत्र के लिए अछूत हूँ मुझे कभी यवनो ने तो कभी तुरको ने तो कभी चंगेजो ने मंगोलो ने तो कभी यूनानीयो ने हमे मिटाने की कोशिश की फिर भी मै ना मिटा और ना ही झुका ना ही हम सब हारे
मुगल आये मुझे निगलने पर में अक्षुण्ण रहा अटल रहा अटूट रहा भारत के अस्तित्व को मिटने नही दिया कण कण मेरे रक्त से प्रवाहित हैं इस देश कि मिट्टी का फिर भी मुझसे मेरे वजूद के प्रमाण मांगे जाते रहे ।
मै फिर अंग्रेजो से लोहा लेता रहा इस देश कि ओर उठते हर हाथ को काटता रहा ओर खुद भी कटता रहा दोष मेरा सिर्फ इतना कि मे राजपूत हूँ ।
मुगलो ने मुझे दबाना चाहा कि तुम मुगल हो जाओ मैं नही बना और कटे शीश भी लड़ता रहा । अंग्रेजो ने कहा गुलाम हो जाओ मैं मै गुलाम नही बना ।
कालांतर में देश आजाद हुआ तो कांग्रेस आई फिर भी सदियो पुरानी बात निशाने पर तो मैं ही था पर मुझे कांग्रेसी बनना भी बाहुबल के प्रयोग से मंजूर नही हुआ ।मैने भाजपा को सींचा ओर देश हित में विरोधियो के निशाने पर रहा पर अंत भी वही हुआ संदियो पुराना भाजपा ने कहा तुम भाजपूत हो जाओ अब तुम ही बताए मैं जब तुरक नही हुआ मुगल नही हुआ अंग्रेज नही हुआ कांग्रेसी नही हुआ तो मेरे वजूद को छोजकर भाजपूत क्यों बनू कैसे बन जाऊ जब मेरा नाम ही तुमने अपराधी रख दिया है ।
नमस्कार हैं ऐसे लोकतंत्र को सदियो तक मेरे नाम से जो देश चलता आया है आज मेरे नाम को कैसे तुमने अपराधी बना दिया
पर इतमिनान रखीये मै पहले भी नही मिटा मैं अब भी नही मिटूंगा
समानाधिकार धर्मनिरपेक्षता पंथनिरपेक्षता सब दिखावा हैं
तुम्हे मेरी काबिलियत से जलन हैं क्योकि मैं राजपूत हूँ ।
निष्ठावान हूं अपने देश के प्रति अपने समाज के प्रति क्यों कि मै राजपूत।
मै सदियो पुराना इतिहास हूँ पल भर में मिटने न पांऊगा
मैं थका हूँ पर हारा नही हर बार लडता ही जाऊंगा।
।। जय राजपुताना ।।
मेरा अपराध है कि मैं राजपूत हूँ लोकतंत्र के लिए अछूत हूँ मुझे कभी यवनो ने तो कभी तुरको ने तो कभी चंगेजो ने मंगोलो ने तो कभी यूनानीयो ने हमे मिटाने की कोशिश की फिर भी मै ना मिटा और ना ही झुका ना ही हम सब हारे
मुगल आये मुझे निगलने पर में अक्षुण्ण रहा अटल रहा अटूट रहा भारत के अस्तित्व को मिटने नही दिया कण कण मेरे रक्त से प्रवाहित हैं इस देश कि मिट्टी का फिर भी मुझसे मेरे वजूद के प्रमाण मांगे जाते रहे ।
मै फिर अंग्रेजो से लोहा लेता रहा इस देश कि ओर उठते हर हाथ को काटता रहा ओर खुद भी कटता रहा दोष मेरा सिर्फ इतना कि मे राजपूत हूँ ।
मुगलो ने मुझे दबाना चाहा कि तुम मुगल हो जाओ मैं नही बना और कटे शीश भी लड़ता रहा । अंग्रेजो ने कहा गुलाम हो जाओ मैं मै गुलाम नही बना ।
कालांतर में देश आजाद हुआ तो कांग्रेस आई फिर भी सदियो पुरानी बात निशाने पर तो मैं ही था पर मुझे कांग्रेसी बनना भी बाहुबल के प्रयोग से मंजूर नही हुआ ।मैने भाजपा को सींचा ओर देश हित में विरोधियो के निशाने पर रहा पर अंत भी वही हुआ संदियो पुराना भाजपा ने कहा तुम भाजपूत हो जाओ अब तुम ही बताए मैं जब तुरक नही हुआ मुगल नही हुआ अंग्रेज नही हुआ कांग्रेसी नही हुआ तो मेरे वजूद को छोजकर भाजपूत क्यों बनू कैसे बन जाऊ जब मेरा नाम ही तुमने अपराधी रख दिया है ।
नमस्कार हैं ऐसे लोकतंत्र को सदियो तक मेरे नाम से जो देश चलता आया है आज मेरे नाम को कैसे तुमने अपराधी बना दिया
पर इतमिनान रखीये मै पहले भी नही मिटा मैं अब भी नही मिटूंगा
समानाधिकार धर्मनिरपेक्षता पंथनिरपेक्षता सब दिखावा हैं
तुम्हे मेरी काबिलियत से जलन हैं क्योकि मैं राजपूत हूँ ।
निष्ठावान हूं अपने देश के प्रति अपने समाज के प्रति क्यों कि मै राजपूत।
मै सदियो पुराना इतिहास हूँ पल भर में मिटने न पांऊगा
मैं थका हूँ पर हारा नही हर बार लडता ही जाऊंगा।
।। जय राजपुताना ।।

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