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दशवी_फेल_चमन_चूतिये_इतिहासकारो_के_लिए


#दशवी_फेल_चमन_चूतिये_इतिहासकारो_के_लिए
थोड़ी बड़ी पोस्ट है पर पढ़ना जरूर सभी 🙏
चुतियो सुनो जब ब्राह्मण वैश्य और शूद्र वर्ण मौजूद है तो फिर क्षत्रिय वर्ण कहां गया स्पष्ट सी बात है क्षत्रियों को बाद में राजपुत्र या राजपूत कहा जाने लगा। ऋग्वेद और शतपथ ब्राह्मण में क्षत्रिय के लिए बार बार राजन्य शब्द का प्रयोग हुआ है। यजुर्वेद के अध्याय-3 में एक श्लोक है इसमें राजपुत्र और राजन्य दोनों शब्दों का प्रयोग है।
#बध्यताम॒ राजपुत्राय बाहु राजन्य कृत।
बध्यताम॒ राजपुत्राण क्रंदता मिततेरम॒।।
कालिदास के मालविकाग्निमित्र, बाण हर्ष चरित्र कोटिल्य के अर्थशास्त्र, और सम्राट विक्रमादित्य परमार के कवि अमर सिंह की रचना में भी राजपुत्र शब्द का प्रयोग हुआ है। हीरानंद ओझा जी डॉक्टर गोपीनाथ शर्मा, पुरुषोत्तम नागेश ओक, डॉक्टर दशरथ शर्मा, डॉक्टर चिंतामणि विनायक वैद्य तथा विदेशी इतिहासकार मिस्टर टेलवीय ह्वीलर जैसे अनेक इतिहासकारों ने सिद्ध किया है कि क्षत्रिय शब्द के लिए बाद में राजपुत्र प्रयोग होने लगा जो बाद में राजपुत्र से राजपूत हो गया।

गूजर जाति गऊचर शब्द से बनी है जिसका अर्थ है गाय चराने वाले। प्राचीन समय में गौ सेवा भी युद्ध के समान ही बहुत पुण्य कार्य था जिन लोगों ने गायों की सेवा स्वीकार की वह गऊचर कहलाए। बाद में गऊचर से बिगड़ते बिगड़ते गूजर शब्द बन गया।

गुर्जर शब्द लक्ष्मण के वंश प्रतिहार के लिए प्रयोग होता है। वनवास काल में लक्ष्मण ने भगवान राम सीता के लिए द्वारपाल यानी प्रतिहार की भूमिका निभाई थी उन्हीं के वंश को प्रतिहार वंश कहा गया। गुजरात का पहले नाम गुर्जरस्त्र था। इस राज्य में राजस्थान के अलवर जयपुर जोधपुर भीनमाल और उसे लगता हुआ गुजरात का सारा क्षेत्र था। इस क्षेत्र पर राज्य करने के कारण प्रतिहार वंश को गुर्जर प्रतिहार कहा गया। अब इस वंश को परिहार पडिहार भी कहा जाता है।
#न केवल प्रतिहार बल्कि चावड़ा और चालुक्य वंश भी गुजरात पर शासन करने के कारण गुर्जर कहलाते हैं। गुर्जर कोई जाति नहीं है बल्कि गुजरात पर शासन करने वाले वंशो को गुर्जर वंश कहां गया है।

भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज कुशवाहो की अनेक रियासतें जयपुर अलवर अमेठी जम्मू कश्मीर पुंछ करौली आदि रियासतें आज भी मौजूद है कुशवाहा वंश के राजपूतों के हजारों गांव भारत में मौजूद हैं।
भगवान राम के दूसरे पुत्र लव के वंशज राघव या बडगूजर कहलाते हैं इस वंश के भी भारत में हजारों गांव हैं। इस वंश के राजपूत मेरठ बुलंदशहर गाजियाबाद एटा मैनपुरी इटावा अलीगढ़ फर्रुखाबाद शमशाबाद बदायूं मुरादाबाद हरियाणा के गुड़गांव और राजस्थान के जयपुर अलवर बीकानेर जिलों में बसते हैं इसके अलावा मध्यप्रदेश में भी हैं।

अब प्रश्न यह है कि राजपूतों के गोत्र शूद्र जातियों में क्यों मिलते हैं? इसका उत्तर है। पुराने समय में जो क्षत्रिय अपने धर्म से भ्रष्ट हो जाते थे उन्हें जाति बहिष्कृत कर दिया जाता था और बाद में वह जो कार्य करने लगते थे उसी जाति में मिल जाते थे।
इसके अलावा कुछ जातियों ने अपने राजाओं के वंश का नाम ही लिखना शुरु कर दिया जबकि उनके गोत्र कुछ और है। जैसे कुछ जातियां अपने आप को कुशवाहा मौर्य राठौर आदि लिखती हैं जबकि कुशवाहा मौर्य राठौर राजपूतों के गोत्र हैं। किसी तरह एक जाति अपने आप को चौहान लिखती है इस जाति के मेरठ बिजनौर हापुड़ बुलंदशहर आदि जिलों में बहुत से गांव हैं। इस जाति में काफी सारे गोत्र हैं।
चौहान क्षत्रियों का एक वंश है ना की कोई जाति। इसी तरह क्षत्रियों के काफी सारे गोत्र गूजरों जाटों व अन्य जातियों में मिलते हैं राजपूतों के काफी सारे गांव इन जातियों में बाद में मिल गए। तोमर राजपूतों के 84 गांव तो केवल मेरठ और गाजियाबाद जिले में है पूरे भारत में तोमर राजपूतों के हजारों गांव है।
चौहान राजपूतों के भी पूरे भारत में हजारों गांव हैं। बूंदी नीमराना जालौर भीलवाड़ा शाकंभरी जैसी अनेक रियासतें पूरे भारत में चौहानों की है।
राजपूतों के पास अपने हर वंश की वंशावली होती है। जागा भाट जो राजपूतों की वंशावली लिखने का काम प्राचीन युगो से ही करते आ रहे हैं वह हर 5 वर्ष में आकर सभी राजपूतों के घर में जाकर उनकी वंशावली सुनाते हैं और नए पैदा हुए सदस्य को उस वंशावली में जोड़ते चले जाते हैं। इसलिए राजपूतों का कोई गोत्र दूसरी जाति में मिलने से वह राजपूत यह क्षत्रिय नहीं बन जाता।
Facebook और Wikipedia पर आजकल ऐसे लोगों की बाढ़ आ गई है जो अपने आप को क्षत्रिय सिद्ध करने में लगे हुए हैं जबकि उनका इतिहास सब जानते हैं। पुराणों के अलावा ब्राह्मणों और जगा भाटो के पास राजपूतों का इतिहास लिखित रूप में है। इसलिए झूठ और कुर्तक के सहारे किसी को क्षत्रिय साबित नहीं किया जा सकता। जो क्षत्रिय हैं वह क्षत्रिय ही रहेगा। और क्षत्रिय केवल राजपुत्र यानी राजपूत हैं।

जय माँ भवानी
 क्षत्रिय धर्म युगे युगे

https://www.rajputland.in/

#ҡรɦαƭ૨เყα_૨αʝρµƭ

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