#बलजी_भुरजी
यह कहानी आप जरूर पढ़ें, इससे आप जान पाएंगे, की राजपुत चरित्र क्या होता है, यह कहानी मेने किसी इतिहास की पुस्तक में नही पढ़ी, बल्कि यह कहानी, चश्मदीद लोगोबसे सुनी है, जो खुद इस घटना का साक्ष्य रहे है ।
यह वीर गाथा है, 2 शेखावतो की । पुरे भारत मर जहां हर एक कोने से भारत के हिन्दू वीर आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे, वहीं राजस्थान के शेखावाटी अंचल में बलजी भुरजी नाम के 2 रणबांकुरों ने अनोखी लड़ाई छेड़ रखी थी ।
अंग्रेजो की लूट पाट से भारत की आम जनता त्रस्त हो रही थी, आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय थी । बलजी भुरजी का एक ही काम था, अंग्रेजो की मदद करने वालो को लूटना, ओर लूट का धन गरीबो में बांट देना ।
रियल लाइफ " रोबिन हुड " बल्कि उससे भी कहीं ज़्यादा ...
एक बार बलजी भुरजी में जोधपुर दरबार मे खबर भिजवाई की या तो उन्हें उनकी मुहमांगी रकम दी जाए, नही तो इस बार गणगौर नही निकलने दी जाएगी ।
जोधपुर दरबार भला ऐसी नंगी धमकी को कैसे सहन कर सकता था ? उन्होंने भी तेशके आकर कहा, की हमारी गणगौर हमारे तलवारों के जोर पर निकलेगी ।
" तो निकाल लेना फिर !! देखते है " बलजी भुरजी ने सन्देश भिजवा दिया ।
बलजी भुरजी को पकड़ने के लिए अंग्रेज अफसर से लेकर जोधपुर दरबार के बड़े बड़े योद्धा तक लग गए, लेकिन जोधपुर दरबार ओर अंग्रेज मिलकर भी बलजी भुरजी को पकड़ना तो दूर, अपनी गणगौर तक नही बचा पाए ।
जोधपुर दरबार को उतने ही पैसे देकर गणगौर को मुक्त करवाना पड़ा ।
एक बार की बात है, एक स्त्री कुंवे पर बैठी रो रही थी, बलजी भुरजी दूर से आ ररहे थे, उन्हें जोरो की प्यास लगी थी, सोचा कुंवे वाली स्त्री के पास पानी होगा, लेकिन जब पास जाकर देखा तो वह स्त्री रो रही थी,बलजी भुरजी ने जब कारण पूछा, तो स्त्री ने कहा कि बलजी भुरजी ने उसका सारा धन लूट लिया ।
बलजी भुरजी ने उस स्त्री से कहा - क्या तुमने उस लुटेरे को देखा ? किस दिशा की ओर गए है वो ?
स्त्री ने उत्तर दिशा की ओर हाथ करते हुए कहा, मेने उनकी शक्ल तो नही देखी, लेकीन् वो इस ओर गए है।
बलजी भुरजी तुरन्त उत्तर दिशा की ओर बढ़े, स्त्री ने कहा, रुकिए -- पानी तो पीते जाए ?
बलजी ने जवाब दिया- पानी थोड़ी देर में आकर पीते है ।
लुटेरों का पीछा कर उन्हें पकड़ बलजी भुरजी ने लुटेरों समेत सारा धन उस स्त्री के पाँव में डाल दिया, ओर कहा, बलजी भुरजी को ऐसे ही बदनाम मत किया करो, चलिए अब पानी पिलाइये ।
पाटौदी गांव में एक स्त्री के रोने की आवाज सुनकर बलजी भुरजी रुक गए, स्त्री के पास गए, तो उसने कहा, मेरी बेटी का विवाह है, भात भरने वाला कोई नही ।
बलजी भुरजी ने कहा - हम है न् - हम भरेंगे, तुम्हारा भात
वो स्त्री अंग्रेजो से मिली थी । बलजी भुरजी के भात भरने आने की सूचना अंग्रेजो तक पहुंच गई, ओर यह बात खुद बलजी भुरजी को भी पता चल गई ।
अब क्या करें ? बलजी ने कहा
भात भरने तो जाना ही है - वचन दिया है हमने !
दोनो भाई मौत को सामने देख भी वचन पूरा करने निकल पड़े ।
वहां जाकर अपनी मुँहबोली बहन से कहा - हमने क्या किया, ओर तुमने क्या किया ?
अंग्रेजो से कह दो, की कम से कम भात भरने तक तो गोली ना चलाएं । ओर तू कोई दुःख ना कर, अंग्रेज आज तो हमे नही पकड़ पाएंगे ।
भात भरकर बलजी भुरजी अंग्रेजो को चकमा देकर बैरास गांव आ गए, लेकीन् पूरी पुलिस फोर्स उनके पीछे लगी थी । बैरास के एक खेत मे उन्हें हजारों पुलिस वालों ने चारों ओर से घेर लिया ।
बलजी ने जैसे ही अपनी बंदूक उठाई, भुरजी में बलजी से कहा " यह जमीन हमारे पूर्वजों ने दान कर दी थी, यहां हम किसी के प्राण नही ले सकते । अब हरि मिलन का समय आ गया है प्यारे ।।
उसके बाद ...... उसके बाद क्या ??
बलिदानियों की सूची में दो नाम और अमर हो गए .....

Comments
Post a Comment