#जय_माँ_करणी
बीकानेर के खाजूवाला के पास एक ठिकाणा है पूंगलगढ़ ....
पूंगलगढ़ के जागीरदार थे राव शेखा ....
शेखो जी का बस एक काम था .... सुबह उठते ही मां करणी की आलोचना करना .... बुराइयां करना .... माता के अस्तित्व और चमत्कारों को अस्वीकार करना .... माता की निंदा करना ....
शेखो जी की बेटी रँगकवर की शादी तत्कालीन जोधपुर (मारवाड़) के बड़े युवराज और बीकानेर रियासत के संस्थापक महाराजा राव बीका जी से तय होती है .... शादी की तैयारियां चल रही होती है .... शादी के दिन नज़दीक आते आते राव शेखा जी से पुरानी अदावत के चलते मुल्तान के सुल्तान ने पूंगलगढ़ पर हमला कर दिया .... मुल्तान की फौजें पूंगलगढ़ पर चढ़ आई और राव शेखा जी को बंदी बना के मुल्तान की जेल में कैद कर दिया ....
इधर घर मे बेटी की शादी उधर बेटी के पिता राव शेखा जी मुल्तान जेल में कैद ....
अब राव शेखा जी को मां करणी की याद आई और शेखा जी ने हाथ जोड़ के मां करणी का आह्वान करते हुए कहा .... हे मां अगर तू वाकई शक्ति स्वरूपा है तो अपने पुत्र शेखा की रक्षा कर ....
मां करणी तुरंत कँवली (चील) का रूप धारण करती है .... और अपने दोनों पंजो में राव शेखा को पकड़ के मुल्तान जेल से सीधा पूंगलगढ़ अपनी बेटी की चँवरी (लग्न-मंडप) में ला छोड़ती है ....
............................. मां करणी को हमारे राजस्थान में साक्षात मां जगदम्बा हिंगलाज भवानी का अवतार माना जाता है ....
करणी माता का जन्म 1387 में जोधपुर जिले के आसोप गांव में चारण परिवार में हुआ .... करणी मां की माता का नाम देवल बाई और पिता का नाम म्हरोज़ी चारण था .... करणी माता का बचपन का नाम रिधु बाई था .... रिघु बाई की शादी साठीका गांव के किपोजी चारण से हुई लेकिन शादी के कुछ समय बाद करणी माता का मन सांसारिक और वैवाहिक जीवन से उचट गया .... करणी माता ने अपनी छोटी बहन गुलाब की शादी अपने पति से करवाकर गृहस्थ जीवन त्याग दिया ....
तदोपरांत करणी मां जनकल्याण एवं आलौकिक कार्यों में व्यस्त हो गयी .... उनपे चमत्कारी दैवीय शक्तियां थी .... तत्कालीन जांगल प्रदेश (आज की बीकानेर रियासत) के देशनोक नामक स्थान पर एक गुफा में रहकर करणी मां पूजा अर्चना किया करती थी ....
......................... 23 मार्च 1538 को देशनोक की इसी गुफा में 151 वर्ष की उम्र में करणी मां ज्योतिर्लिन हो गयी ....
देशनोक की इसी गुफा में तब से श्रद्धालु मां करणी की विधिवत पूजा अर्चना करने लगे ....
...................... मां करणी के आशीर्वाद से ही मारवाड़ के राव जोधा ने जोधपुर शहर की स्थापना की .... एवं राव जोधा के ज्येष्ठ पुत्र राव बीका ने मां करणी के आशीर्वाद से जांगल प्रदेश को जीत कर बीकानेर शहर एवं रियासत की स्थापना की ....
जोधाणा (जोधपुर/मारवाड़) रियासत और बीकाणा (बीकानेर/थळी) रियासत तत्कालीन भारत और राजपूताने की काफी बड़ी एवं समृद्धशाली गौरवशाली वैभवशाली और शक्तिशाली रियासतें हैं .... मां करणी इन दोनों रियासतों की कुल देवी और प्रमुख आराध्या देवी है ....
मां करणी के आशीर्वाद स्वरूप ही सदियों से मुगलों अंग्रेजों के सैंकड़ों हजारों हमले और आक्रमण सह के भी आज दुर्ग जोधाणा और दुर्ग बीकाणा थार के मरुस्थल में सीना ताने अडिग खड़े हैं ....
..................... देशनोक धाम की इस गुफा एवं मां करणी के प्रति बीकाणा (बीकानेर) रियासत के सबसे यशश्वी महाराजा गंगासिंह जी की अपार श्रद्धा थी .... महाराजा गंगासिंह जी नवरात्रि में बीकानेर से देशनोक धाम 30km पैदल चल के हाथ में ज्योत ले के मां करणी के दरबार में हाजिरी लगाते थे ....
उसी गुफा के ऊपर महाराजा गंगासिंह जी ने मां करणी का शानदार और भव्य मंदिर का निर्माण करवाया .... ये मंदिर मकराना के सफेद संगेमरमर से बना हुआ राजपूती और मुगल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है .... मंदिर की भव्यता और सफेद संगेमरमर के पत्थरों पे नक्काशी की छटा देखते ही बनती है .... महाराजा गंगासिंह जी ने मंदिर के मुख्य किवाड़ (पोल) चांदी की बनवाई एवं मंदिर के सारे छत्रों को स्वर्ण का बनवाया .... मां करणी की मुख्य प्रतिमा मंदिर के गर्भ गृह (गुफा) में है .... इस मंदिर में देश विदेश के लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष आ के मां करणी के श्री चरणों में अपनी हाजिरी लगाते हैं ....
...................... करणी मां को चूहों वाली मां भी कहा जाता है .... प्रतिदिन हर पल करीब 20 से 25 हजार हट्टे कट्टे मोटे ताजे चूहे मां करणी के मंदिर के प्रांगण में धमाचौकड़ी मचाते रहते हैं .... ये चूहे किसी श्रद्धालु को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं .... प्रसाद का पहला भोग भी इन चूहों को लगता है .... चूहों की संख्या इतनी ज्यादा है कि श्रद्धालुओं को अपना पाँव घसीट घसीट के मंदिर परिषर में चलना पड़ता है ....
इतने चूहे होने के बावजूद मंदिर में आजतक ना कोई चूहों से बीमारी फैली ना दुर्गंध फैली ....
मान्यता है कि करणी मां के पति की दुसरी पत्नी और मां करणी की छोटी बहन गुलाब का पुत्र एक दिन कोलायत (बीकानेर) में एक सरोवर में जल पी रहा था .... सरोवर का जल दूषित होने के कारण उस पुत्र की मृत्यु हो गयी .... मां करणी ने यमराज से अपने पुत्र को पुनर्जीवित करने की अरदास की .... और यमराज ने मां करणी के पुत्र को चूहे के रूप में पुनर्जीवित किया ....
इसलिए मां करणी के मंदिर के चूहों को करणी मां का पुत्र कहा/माना जाता है ....
मंदिर के सारे चूहे काले एवं भूरे है .... सफेद चूहा केवल विशेष अवसर पर दिखता है ....
जिस श्रद्धालु को सफेद चूहा दिखे उस श्रद्धालु के पौ बारह सीधे पच्चीस होते हैं ....
जय माँ करणी ....
माजीसा मेहर !!!! ...
#ҡรɦαƭ૨เყα_૨αʝρµƭ
बीकानेर के खाजूवाला के पास एक ठिकाणा है पूंगलगढ़ ....
पूंगलगढ़ के जागीरदार थे राव शेखा ....
शेखो जी का बस एक काम था .... सुबह उठते ही मां करणी की आलोचना करना .... बुराइयां करना .... माता के अस्तित्व और चमत्कारों को अस्वीकार करना .... माता की निंदा करना ....
शेखो जी की बेटी रँगकवर की शादी तत्कालीन जोधपुर (मारवाड़) के बड़े युवराज और बीकानेर रियासत के संस्थापक महाराजा राव बीका जी से तय होती है .... शादी की तैयारियां चल रही होती है .... शादी के दिन नज़दीक आते आते राव शेखा जी से पुरानी अदावत के चलते मुल्तान के सुल्तान ने पूंगलगढ़ पर हमला कर दिया .... मुल्तान की फौजें पूंगलगढ़ पर चढ़ आई और राव शेखा जी को बंदी बना के मुल्तान की जेल में कैद कर दिया ....
इधर घर मे बेटी की शादी उधर बेटी के पिता राव शेखा जी मुल्तान जेल में कैद ....
अब राव शेखा जी को मां करणी की याद आई और शेखा जी ने हाथ जोड़ के मां करणी का आह्वान करते हुए कहा .... हे मां अगर तू वाकई शक्ति स्वरूपा है तो अपने पुत्र शेखा की रक्षा कर ....
मां करणी तुरंत कँवली (चील) का रूप धारण करती है .... और अपने दोनों पंजो में राव शेखा को पकड़ के मुल्तान जेल से सीधा पूंगलगढ़ अपनी बेटी की चँवरी (लग्न-मंडप) में ला छोड़ती है ....
............................. मां करणी को हमारे राजस्थान में साक्षात मां जगदम्बा हिंगलाज भवानी का अवतार माना जाता है ....
करणी माता का जन्म 1387 में जोधपुर जिले के आसोप गांव में चारण परिवार में हुआ .... करणी मां की माता का नाम देवल बाई और पिता का नाम म्हरोज़ी चारण था .... करणी माता का बचपन का नाम रिधु बाई था .... रिघु बाई की शादी साठीका गांव के किपोजी चारण से हुई लेकिन शादी के कुछ समय बाद करणी माता का मन सांसारिक और वैवाहिक जीवन से उचट गया .... करणी माता ने अपनी छोटी बहन गुलाब की शादी अपने पति से करवाकर गृहस्थ जीवन त्याग दिया ....
तदोपरांत करणी मां जनकल्याण एवं आलौकिक कार्यों में व्यस्त हो गयी .... उनपे चमत्कारी दैवीय शक्तियां थी .... तत्कालीन जांगल प्रदेश (आज की बीकानेर रियासत) के देशनोक नामक स्थान पर एक गुफा में रहकर करणी मां पूजा अर्चना किया करती थी ....
......................... 23 मार्च 1538 को देशनोक की इसी गुफा में 151 वर्ष की उम्र में करणी मां ज्योतिर्लिन हो गयी ....
देशनोक की इसी गुफा में तब से श्रद्धालु मां करणी की विधिवत पूजा अर्चना करने लगे ....
...................... मां करणी के आशीर्वाद से ही मारवाड़ के राव जोधा ने जोधपुर शहर की स्थापना की .... एवं राव जोधा के ज्येष्ठ पुत्र राव बीका ने मां करणी के आशीर्वाद से जांगल प्रदेश को जीत कर बीकानेर शहर एवं रियासत की स्थापना की ....
जोधाणा (जोधपुर/मारवाड़) रियासत और बीकाणा (बीकानेर/थळी) रियासत तत्कालीन भारत और राजपूताने की काफी बड़ी एवं समृद्धशाली गौरवशाली वैभवशाली और शक्तिशाली रियासतें हैं .... मां करणी इन दोनों रियासतों की कुल देवी और प्रमुख आराध्या देवी है ....
मां करणी के आशीर्वाद स्वरूप ही सदियों से मुगलों अंग्रेजों के सैंकड़ों हजारों हमले और आक्रमण सह के भी आज दुर्ग जोधाणा और दुर्ग बीकाणा थार के मरुस्थल में सीना ताने अडिग खड़े हैं ....
..................... देशनोक धाम की इस गुफा एवं मां करणी के प्रति बीकाणा (बीकानेर) रियासत के सबसे यशश्वी महाराजा गंगासिंह जी की अपार श्रद्धा थी .... महाराजा गंगासिंह जी नवरात्रि में बीकानेर से देशनोक धाम 30km पैदल चल के हाथ में ज्योत ले के मां करणी के दरबार में हाजिरी लगाते थे ....
उसी गुफा के ऊपर महाराजा गंगासिंह जी ने मां करणी का शानदार और भव्य मंदिर का निर्माण करवाया .... ये मंदिर मकराना के सफेद संगेमरमर से बना हुआ राजपूती और मुगल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है .... मंदिर की भव्यता और सफेद संगेमरमर के पत्थरों पे नक्काशी की छटा देखते ही बनती है .... महाराजा गंगासिंह जी ने मंदिर के मुख्य किवाड़ (पोल) चांदी की बनवाई एवं मंदिर के सारे छत्रों को स्वर्ण का बनवाया .... मां करणी की मुख्य प्रतिमा मंदिर के गर्भ गृह (गुफा) में है .... इस मंदिर में देश विदेश के लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष आ के मां करणी के श्री चरणों में अपनी हाजिरी लगाते हैं ....
...................... करणी मां को चूहों वाली मां भी कहा जाता है .... प्रतिदिन हर पल करीब 20 से 25 हजार हट्टे कट्टे मोटे ताजे चूहे मां करणी के मंदिर के प्रांगण में धमाचौकड़ी मचाते रहते हैं .... ये चूहे किसी श्रद्धालु को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं .... प्रसाद का पहला भोग भी इन चूहों को लगता है .... चूहों की संख्या इतनी ज्यादा है कि श्रद्धालुओं को अपना पाँव घसीट घसीट के मंदिर परिषर में चलना पड़ता है ....
इतने चूहे होने के बावजूद मंदिर में आजतक ना कोई चूहों से बीमारी फैली ना दुर्गंध फैली ....
मान्यता है कि करणी मां के पति की दुसरी पत्नी और मां करणी की छोटी बहन गुलाब का पुत्र एक दिन कोलायत (बीकानेर) में एक सरोवर में जल पी रहा था .... सरोवर का जल दूषित होने के कारण उस पुत्र की मृत्यु हो गयी .... मां करणी ने यमराज से अपने पुत्र को पुनर्जीवित करने की अरदास की .... और यमराज ने मां करणी के पुत्र को चूहे के रूप में पुनर्जीवित किया ....
इसलिए मां करणी के मंदिर के चूहों को करणी मां का पुत्र कहा/माना जाता है ....
मंदिर के सारे चूहे काले एवं भूरे है .... सफेद चूहा केवल विशेष अवसर पर दिखता है ....
जिस श्रद्धालु को सफेद चूहा दिखे उस श्रद्धालु के पौ बारह सीधे पच्चीस होते हैं ....
जय माँ करणी ....
माजीसा मेहर !!!! ...
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