#महाराजधिराज_क्षत्रपति_शिवाजी
1303 इ. में मेवाड़ से महाराणा हम्मीर के चचेरे भाई सज्जन सिह कोल्हापुर चले गए थे। इन्ही की 18 व़ी पीढ़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज पैदा हुए थे। ये सिसोदिया थे।
.. ओरेंगजेब के अत्याचार के बीच हिन्दुओ की राजपुताना तलवार " दक्षिण " की ओर से चमकी ! नाम था क्षत्रपति शिवाजी ! महाराज के बारे में तो हजारो किताबे भी लिखे तो कम पड़ जाए, इसलिए बहुत छोटा उनके जीवन का अध्याय लिख रहा हूँ !
शिवाजी - विश्व के महानतम सिपाहियों, लड़ाकों, युद्धकुशलो , प्रशासकों तथा राजाओ में एक ! उन्हें तो मानो स्वम् परमात्मा ने ओरेंगजेब की बदमाशी अपने शौर्य से, विश्वासघात अपने नीति-निपुण से, तथा लूट खसोट बदला लेकर समाप्त करने के लिए धरती पर भेजा था ! जिस भारतीय पुत्र ने अपने जीवन और सम्मान की बाजी देश व देशवासियों के सम्मान के लिए लगा दी , उसे ख़फ़ी खान जैसे औरंगजेब के विदेशी गुंडे चाटुकार ने " राक्षस पुत्र तथा सरताज-ए- धोखेबाज " कहा है । यह भी तब, जब शिवाजी ने मुस्लिम कैद माब आयी महिलाओं को भी बेटी कह के पाला ! अनजाने में ही सही, ख़फ़ी खान को यह तो स्वीकार करना पड़ा, की " शिवाजी अपनी जाति में बुद्धिमता ओर शौर्य के लिए विख्यात था " !
हिन्दुस्थान में छाए हुए विदेशी यवन शाशको द्वारा किये गए अनवरत अपहरणों की सूचनाओं से शिवाजी का ह्रदय हुंक उठता था । सर्वत्र बलात्कार, लूट, हत्या ओर आतंक का बोलबाला था !
शुरुवात में तो शिवाजी के पास चुने का किला तक नही था ! अपमानित, दुखियारे तथा एकमात्र देश हिन्दूस्थान में पुनर्वासित कर दृढ़ इरादा कर शिवाजी चारो ओर से पहाड़ो से घिरे प्रान्त में पत्थर तथा मिट्टी का दुर्ग बनाने निकल गये ! बीजापुर में मुस्लिम गड़बड़ी का पूर्ण लाभ उठाते हुए उस एक प्रदेश के पश्चात लगातार प्रदेश के प्रदेश जीतते चले गए ।
शिवाजी महाराज कूटनीति तथा व्यूह रचना के इतने निपुण थे की वे भारत मे फैली हुई इस्लामी बाढ़ के बीच केवल पांव टिकाने भर की भूमि के अधिपति थे । फिर भी उन्होंने सफलतापूर्वक एक मुस्लिम शक्ति को दूसरे से भिड़वा दिया, तथा हिन्दू राज्य का विस्तार किया ! चारो ओर से शत्रुओं से घिरे शिवाजी ने ऐसी अप्रत्याशित सफलता पाई थी, की यवन भौचक्के रह गए !
उनकी म्रत्यु के बाद तक मराठा शक्ति इतनी मजबूत थी, की यवनों को सिंध तक जाकर पटखनी दी।
शिवाजी ने एक एक कर आक्रमण करते हुए बीजापुर सहित 40 मुस्लिम दुर्गों पर अधिकार जमा लिया ! सिर्फ दुर्ग पर ही कब्जा नही किया, वहां की भूमि से भी मल्लेछो को खदेड़ दिया !
एक जारज पुत्र सिकंदर अली आदिल , जो बीजापुर का शासक था, वह यह देखकर बड़ा चिंतित हुआ कि शिवाजी तो एक एक बाद एक गढ़ जीतते जा रहे है । इस्लामी शाशन तक धीरे धीरे खत्म हो रहा है, खुले रूप से उसने हिन्दुओ के सामने अपने मन की घ्रणा उबारी, तथा वीर क्षत्रिय शिवाजी को सीधे युद्ध करने की चुंनोती दी ! कायर सिकंदर अली की गीदड़ भभकी सुन शिवाजी भी युद्ध को प्रस्तुत हो गए ! सिकंदर अली के शाही रसोइए के एक पुत्र लंबे चौड़े अफजल खान ने सगर्व कहा की वह शिवाजी को उतनी ही सरलता से भून देगा, जितनी सरलता से उसका पिता शाही भोजन भून देता है ।
अफजल की डिंग से अति प्रशन्न होकर, बीजापुर शाशक ने उसके साथ बहुत बड़ी सेना कर दी ! राक्षस के समान विष उगलता हुआ, शोर मचाता हुआ यवन सैन्य बल मराठा प्रदेश को विनष्ट करने लगा ! एक पूजा स्थल के पश्चात दूसरे को भर्स्ट करने लगा, गायो को काट उसके बाद उसके रक्त को मंदिरो में छिड़ककर उसे मस्जिद में परिवर्तित करने लगा ! गायो की हत्या का अर्थ था, हिन्दुओ को नीचा दिखाना, उनका अपमान करना !
जिआ तरह से इस शक्तिशाली सेना को हराकर इसके घमंडी सेनापति का शिवाजी ने शिरकत डाला, वह कूटनीति साहस एवम देशभक्ति की महानतम चातुर्यपूर्ण कहानियों में से एक है । शिवाजी ने अफजल खान को प्रतापगढ़ की पहाड़ियों के एक शामियाने में मिलने को कहा, धूर्त अफजल खान ने शिवाजी को गर्दन को अपने बगल में दबाकर मार डालने का प्रयत्न किया ! एक क्षण भी व्यतीत किये बिना अफजलखान ने चाकू निकालकर शिवाजी की पीठ पर वार करने का प्रयत्न किया ! शिवाजी ने अपने रेशमी परिधान के नीचे लोहे का कवच पहन रखा था । शिवाजी को तनिक भी हानि पहुंचाए बिना वह छुरी छिटककर दूर जा गिरी ! शिवाजी ने अपने लोहे के पहने नाखूनों से अफजल खान का पेट चिर उसकी आंत बाहर निकाल ली । घने रक्त प्रवाह के कारण पहले तो अचेत हो अफजल खान डगमगाया, ओर दूसरे ही क्षण उसकी लंबी चौड़ी काया ढेर हो गयी । कष्ठ के कारण प्रारम्भ में तो वह दहाड़ा, पर बाद में सहायता के लिए मिन्नतें करने लगा । उसने कुछ ही दूर रखी पालकी तक भी रेंग कर जाने का प्रयत्न किया, लेकिन देहभक्त अंगरक्षकों को तलवारे चलाते देख अंगरक्षक भी रफूचक्कर हो गए ।
अफजल खान के अंगरक्षक सैयद खान ने अपनी तलवार का निशाना शिवाजी की गर्दन को बनाया, लेकिन पलभर ने ही शिवाजी की तलवार ने उसकी बाह काट डाली !
जब अफजल खान का सिर काटकर विजयपूर्वक बर्छी पर टांगकर दुर्ग ले जाया जा रहा था, तब अफजल के सैनिको ने अकस्मात ही शिवाजी की सेना को घेर लिया ! रही सही बीजापुर की पूरी सेना भी काट डाली गई !
बहुत धन तथा ख्याति इस युद्ध से शिवाजी को प्राप्त हुई !
ओरेंगजेब अब तक शिवाजी को पहाड़ी चूहा कहा करता था ! लेकिन अब वह यह जानकर चोंक गया था, की जिसे वह चूहा कहता था, वह कोई साधारण व्यक्ति नही था बल्कि उसने बड़े बड़े यवनों के गर्व को चूर चूर कर दिया था ।
इस पोस्ट के साथ संकलित है शिवाजी महाराज के प्रथम दुर्ग की फ़ोटो, जिसे तोरणा का किला भी कहा जाता है । यह किला 1646 ईस्वी में शिवाजी ने मात्र 16 साल की आयु में अपने कब्जे में किया था । इसी किले से शिवाजी के बुलंदीभरे सफर की शुरुवात हुई थी, उसके बाद तो घर घर भगवा छा गया था ।
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