Gwalior Fort, Madhya Pradesh
#ग्वालियर फोर्ट, मध्य प्रदेश
#इस किले पर कई राजपूत राजाओं ने राज किया है
#ग्वालियर भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का एक प्रमुख शहर है। ये शहर और इसका क़िला उत्तर भारत के प्राचीन शहरों का केन्द्र रहे हैं। ग्वालियर अपने पुरातन ऎतिहासिक संबंधों, दर्शनीय स्थलों और एक बड़े सांस्कृतिक, औद्योगिक और राजनीतिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। इस शहर को उसका नाम उस ऐतिहासिक पत्थरों से बने क़िले के कारण दिया जाता है, जो एक अलग-थलग, सपाट शिखर वाली 3 किलोमीटर लंबी तथा 90 मीटर ऊँची पहाड़ी पर बना है। इस नगर का उल्लेख गोप पर्वत, गोपाचल दुर्ग, गोपगिरी, गोपदिरी के रूप में हुआ है। इन सभी नामों का मतलब 'ग्वालों की पहाड़ी' होता है। ग्वालियर का एक दृश्य प्राचीन नाम गोपाद्रि या गोपगिरि है।
#जनश्रुति है कि राजपूत नरेश सूरजसेन ने ग्वालियर नाम के साधु के कहने से यह नगर बसाया था।
#ग्वालियर शहर के इस नाम के पीछे भी एक इतिहास छिपा है; आठवीं शताब्दी में एक राजा हुए सूरजसेन, एक बार वे एक अज्ञात बीमारी से ग्रस्त हो मृत्युशैया पर थे, तब 'ग्वालिपा' नामक संत ने उन्हें ठीक कर जीवनदान दिया। उन्हीं के सम्मान में इस शहर की नींव पडी और इसे नाम दिया ग्वालियर। आने वाली शताब्दियों के साथ यह शहर बड़े-बड़े राजवंशो की राजस्थली बना।
#यह शहर सदियों से राजपूतों की प्राचीन राजधानी रहा है, चाहे वे प्रतिहार रहे हों या कछवाहा या तोमर। इस शहर में इनके द्वारा छोडे ग़ये प्राचीन चिह्न स्मारकों, क़िलों, महलों के रूप में मिल जाएंगे। सहेज कर रखे गए अतीत के भव्य स्मृति चिह्नों ने इस शहर को पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाता है।
#ग्वालियर किला, मध्य प्रदेश
ग्वालियर का किला का निर्माण राजपूत राजा राणा मानसिंह तोमर ने मध्य प्रदेश में बनवाया था। यह किला ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। इस किले के आकर्षण का केंद्र सास-बहू मंदिर और गुर्जरी महल है। राणा मान सिंह तौमर ने गुर्जरी से प्रेम विवाह करके उसको गुर्जरी महल मे बसाया था।इसमें मंदिर और म्यूज़ियम भी है। यह राजसी स्मारक भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। इस किले के महत्व को याद रखने के लिए इस पर डाक टिकट भी जारी किया गया है। यह मध्य प्रदेश के सबसे पसंदीदा टूरिस्ट प्लेसेस में से एक है।
#ग्वालियर फोर्ट, मध्य प्रदेश
#इस किले पर कई राजपूत राजाओं ने राज किया है
#ग्वालियर भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का एक प्रमुख शहर है। ये शहर और इसका क़िला उत्तर भारत के प्राचीन शहरों का केन्द्र रहे हैं। ग्वालियर अपने पुरातन ऎतिहासिक संबंधों, दर्शनीय स्थलों और एक बड़े सांस्कृतिक, औद्योगिक और राजनीतिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। इस शहर को उसका नाम उस ऐतिहासिक पत्थरों से बने क़िले के कारण दिया जाता है, जो एक अलग-थलग, सपाट शिखर वाली 3 किलोमीटर लंबी तथा 90 मीटर ऊँची पहाड़ी पर बना है। इस नगर का उल्लेख गोप पर्वत, गोपाचल दुर्ग, गोपगिरी, गोपदिरी के रूप में हुआ है। इन सभी नामों का मतलब 'ग्वालों की पहाड़ी' होता है। ग्वालियर का एक दृश्य प्राचीन नाम गोपाद्रि या गोपगिरि है।
#जनश्रुति है कि राजपूत नरेश सूरजसेन ने ग्वालियर नाम के साधु के कहने से यह नगर बसाया था।
#ग्वालियर शहर के इस नाम के पीछे भी एक इतिहास छिपा है; आठवीं शताब्दी में एक राजा हुए सूरजसेन, एक बार वे एक अज्ञात बीमारी से ग्रस्त हो मृत्युशैया पर थे, तब 'ग्वालिपा' नामक संत ने उन्हें ठीक कर जीवनदान दिया। उन्हीं के सम्मान में इस शहर की नींव पडी और इसे नाम दिया ग्वालियर। आने वाली शताब्दियों के साथ यह शहर बड़े-बड़े राजवंशो की राजस्थली बना।
#यह शहर सदियों से राजपूतों की प्राचीन राजधानी रहा है, चाहे वे प्रतिहार रहे हों या कछवाहा या तोमर। इस शहर में इनके द्वारा छोडे ग़ये प्राचीन चिह्न स्मारकों, क़िलों, महलों के रूप में मिल जाएंगे। सहेज कर रखे गए अतीत के भव्य स्मृति चिह्नों ने इस शहर को पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाता है।
#ग्वालियर किला, मध्य प्रदेश
ग्वालियर का किला का निर्माण राजपूत राजा राणा मानसिंह तोमर ने मध्य प्रदेश में बनवाया था। यह किला ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। इस किले के आकर्षण का केंद्र सास-बहू मंदिर और गुर्जरी महल है। राणा मान सिंह तौमर ने गुर्जरी से प्रेम विवाह करके उसको गुर्जरी महल मे बसाया था।इसमें मंदिर और म्यूज़ियम भी है। यह राजसी स्मारक भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। इस किले के महत्व को याद रखने के लिए इस पर डाक टिकट भी जारी किया गया है। यह मध्य प्रदेश के सबसे पसंदीदा टूरिस्ट प्लेसेस में से एक है।

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