#अद्भुद__अतुल्य
#kangra_fort
KANGRA FONT - KATOCH RAJPUT DYNASTY
भारत वर्ष का सबसे प्राचीन किला
महाभारत कालीन - कांगड़ा किला (हिमाचल प्रदेश)
कटोक्ष क्षत्रिय वंश का किला करीब 5000 साल!पुराना है.
कागड़ा (हिमाचल प्रदेश -
यह ऐतिहासिक नगर है यहां पर महाभारत कालीन किला भी है | काँगड़ा हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक नगर तथा जिला है। इसका अधिकतर भाग पहाड़ी है। इसके उत्तर और पूर्व में क्रमानुसार लघु हिमालय तथा बृहत् हिमालय की हिमाच्छादित श्रेणियाँ स्थित हैं। पश्चिम में सिवालिक (शिवालिक) तथा दक्षिण में व्यास और सतलज के मध्य की पहाड़ियाँ हैं। बीच में काँगड़ा तथा कुल्लू की सुंदर उपजाऊ घाटियाँ हैं। काँगड़ा चाय और चावल तथा कुल्लू फलों के लिए प्रसिद्ध है। व्यास (विपासा) नदी उत्तर-पूर्व में रोहतांग से निकलकर पश्चिम में मीर्थल नामक स्थान पर मैदानी भाग में उतरती है। काँगड़ा जिले में कड़ी सर्दी पड़ती है परंतु गर्मी में ऋतु सुहावनी रहती है। इस ऋतु में बहुत से लोग शैलावास के लिए यहाँ आते हैं। जगह-जगह देवस्थान हैं अत: काँगड़ा को देवभूमि के नाम से भी अभिहित किया गया है। हाल ही में लाहुल तथा स्पीत्ती प्रदेश का अलग सीमांत जिला बना दिया गया है और अब काँगड़ा का क्षेत्रफल 4,280 वर्ग मील रह गया है।
काँगड़ा नगर लगभग 2,350 फुट की ऊँचाई पर, पठानकोट से 52 मील पूर्व स्थित है। हिमकिरीट धौलाधार पर्वत तथा काँगड़ा की हरी-भरी घाटी का रमणीक दृश्य यहाँ दृष्टिगोचर हहोता है। यह नगर बाणगंगा तथा माँझी नदियों के बीच बसा हुआ है। दक्षिण में पुराना किला तथा उत्तर में व्रजेश्वरी देवी के मंदिर का सुनहला कलश इस नगर के प्रधान चिह्न हैं। एक ओर पुराना काँकड़ा तथा दूसरी ओर भवन (नया काँगड़ा) की नई बस्तियाँ हैं। काँगड़ा घाटी रेलवे तथा पठानकोट-कुल्लू और धर्मशाला-होशियारपुर सड़कों द्वारा यातायात की सुविधा प्राप्त है। काँगड़ा पहले 'नगरकोट' के नाम से प्रसिद्ध था और ऐसा कहा जाता है कि इसे चन्द्रवँशी कटोच वँश के राजा सुसर्माचंद ने महाभारत के युद्ध के बाद बसाया था। इसका जिक्र आज से 2500 साल भी मिलता है जब एलेक्जेंडर ने इस किले पर कब्ज़ा करना चाह था..लेकिन इसी वँश के उस समय के राजा सम्राट पोरस ने उन्हें यंहा से खदेड़ा था ...उसके बाद छठी शताब्दी में नगरकोट जालंधर अथवा त्रिगर्त राज्य की राजधानी था। राजा संसारचंद (18वीं शताब्दी के चतुर्थ भाग में) के राज्यकाल में यहाँ पर कलाकौशल का बोलबाला था। 'काँगड़ा कलम' विश्वविख्यात है और चित्रशैली में अनुपम स्थान रखती है। काँगड़ा किले, मंदिर, बासमती चावल तथा कटी नाक की पुन: व्यवस्था और नेत्रचिकित्सा के लिए दूर-दूर तक विख्यात था। 1905 के भूकंप में नगर बिल्कुल उजड़ गया था। तत्पश्चात् नई आबादी बसाई गई। यहाँ पर देवीमंदिर के दर्शन के लिए हजारों यात्री प्रति वर्ष आते हैं तथा नवरात्र में बड़ी चहल-पहल रहती है।
प्राचीन काल में त्रिगर्त नाम से विख्यात कांगड़ा हिमाचल की सबसे खूबसूरत घाटियों में एक है। धौलाधर पर्वत श्रंखला से आच्छादित यह घाटी इतिहास और संस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखती है। एक जमाने में यह शहर चंद्र वंश की राजधानी थी। कांगड़ा का उल्लेख 3500 साल पहले वैदिक युग में मिलता है। पुराण, महाभारत और राजतरंगिणी में इस स्थान का जिक्र किया गया है।
कांगड़ा किला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा घाटी में स्थित है। इस किले का निर्माण कांगड़ा के शाही परिवार ने कराया था। यह किला दुनिया के सबसे पुराने किलों में से एक है जबकि यह भारत का सबसे पुराना किला है। यह किला नगरकोट या कोट कांगड़ा के नाम से प्रसिद्ध है जो पुराने कांगड़ा नगर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और यह बाणगंगा और पाताल गंगा नदियों जो किले के लिए खाई के रूप में काम करती हैं, के संगम पर खड़ी पहाड़ी के शीर्ष पर बना है। इसी किले के भीतर ब्रजेश्वरी मंदिर है। यह किला बहुत प्राचीन है। इस किले के भीतर वर्तमान अवशेष जैन और ब्राह्मणवादी मंदिर हैं जो नौंवी-दसवीं शताब्दी ईसवी के हो सकते हैं। इतिहास के आख्यान में इसके प्रारंभिक उल्लेख, 1009 ईसवी में मोहम्मद गजनी द्वारा किए गए आक्रमण के समय के हैं। बाद में मोहम्मद तुगलक और उसके उत्तराधिकारी, फिरोजशाह तुगलक ने इस पर क्रमश: 1337 ईसवी और 1351 ईसवी में अपना कब्जा जमाया।
बाणगंगा और मांझी नदियों के ऊपर स्थित कांगड़ा, 500 राजाओं की वंशावली के पूर्वज, राजा भूमचंद की ‘त्रिगर्त’’ भूमि का राजधानी नगर था। कांगड़ा का किला प्रचुर धन-संपति के भण्डार के लिए इतना प्रसिद्ध था कि मोहम्मद गजनी ने भारत में अपने चौथे अभियान के दौरान पंजाब को हराया और सीधे ही 1009 ईसवी में कांगड़ा पहुंचा। विशाल भवन जो राजाओं के लिए कभी चुनौती बने हुए थे, विशेष तौर पर सन 1905 में आए भूकंप के बाद खंडहरों में तबदील हो गए थे। इस किले के प्रवेश मार्ग को बलुआ पत्थर से निर्मित मेहराब के कब्जों से जोड़े गए मोटे काष्ठ के तख्तों का एक बड़ा द्वार लगाकर सुरक्षित किया गया था। इसकी ऊंचाई लगभग 15 फुट है। इसका नाम रणजीत सिंह द्वार है। चट्टानों के बीच काटी गई एक खाई जो बाणगंगा और मांझी नदियों को जोड़ती है, बाहरी दुनिया से इस किले को पृथक करती है। कांगड़ा किले को नगर कोट के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र स्तर से 350 फुट की ऊंचाई पर स्थित ये किला 4 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। ये किला आज जहां स्थित है उसे पुराना कांगड़ा भी कहा जाता है। कांगड़ा के शासकों की निशानी कांगड़ा किला भूमा चंद ने बनवाया था। वाणगंगा नदी के किनारे बना यह किला 350 फीट ऊंचा है।
http://googleweblight.com/i?u=http://www.royalkangra.com/fortsofkangra.html&hl=en-IN
https://timesofindia.indiatimes.com/travel/palampur/kangra-fort/ps49845109.cms
https://www.rajputland.in/
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