जोधपुर का मेहरानगढ़ फोर्ट भारत के सबसे विशाल आकार के किलो में से एक है, पहाड़ो की ऊंचाई पर बना यह विशालकाय किला रजपूतो की उन्नति और कला प्रेम का जीता जागता उदाहरण है । यह शानदार किला राव जोधा राठौड़ द्वारा 1459 ईस्वी में बनाया गया था, मेहरानगढ़ किला पहाड़ो की एकदम चोटी पर होने के कारण भारत के सबसे खूबसूरत किलो में से एक है । इस किले में प्रवेश के लिए शानदार गोल घुमावदार रास्ता आज भी पर्यटकों को अचंभित कर देता है मुगल काल मे हुए तोपों से आक्रमण के निशान आज भी इस किले में देखे जा सकते है। इस किले के बायीं तरफ कीरत सिंह सोढ़ा की छतरी है, जो कि एक वीर राजपूत सेनानी थे, इस किले की रक्षा हेतु उन्होंने लड़ते हुए प्राण दे दिए थे । इस किले में कुल सात दरवाजे है, मेहरानगढ़ किले का म्यूजियम भी भारत के सबसे प्रसिद्ध म्यूजियम में से एक है, किले में पुराने शस्त्र, पालकिया वस्त्र आज भी है । इस म्यूजियम में हमे राठौड़ सेना, उनकी पोशाक इन सभी के बारे में भली भांति जानकारी मिल जाती है । इस किले का पूरा श्रेय राठौड़ वंश के राव जोधा को दिया जाता है, 1459 में उन्होंने जोधपुर शहर बसाया था ।
इस किले की वीर गाथाएं आज भी जन जन के कानोमे गूंजती है, एक बार किसी चरवाहे ने इस किले की आलोचना कर दी थी, क्रोध में आकर दुर्गादास राठौड़ ने उस चरवाहे का सिर धड़ से अलग कर दिया । इसी किले से जसवंत सिंहः जी और राजा मालदेव जैसे रणबांकुरे शासन किया करते थे, इस किले के लिए ही लड़ते लड़ते जेता ओर कुंपा जैसे वीरो ने अपने प्राण न्योछावर किये थे।
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