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महाराजा_हरि_सिंह: जन्मदिवस पर शत शत नमन


#महाराजा_हरि_सिंह: जन्मदिवस पर शत शत नमन.💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

जम्मू-कश्मीर के अंतिम राजा जिन्हें कश्मीर समस्या का जिम्मेदार साबित करने की पुरजोर कोशिश कि गई.

राजा अमर सिंह के पुत्र राजा हरि सिंह ने 1925 में जम्मू-कश्मीर रियासत की बागडोर अपने हाथ में ली. राजगद्दी पर बैठने के बाद राजा हरि सिंह ने अपनी इस रियासत से वेश्यावृत्ति, बाल-विवाह, अशिक्षा जैसी कई कूप्रथाओं का नामोनिशान मिटा दिया.

ब्रिटेन सरकार हर हाल में जम्मू-कश्मीर रियासत पाकिस्तान को देना चाहती थी. लेकिन भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत वो सिर्फ ब्रिटिश भारत का विभाजन कर सकती थी.हालांकि पाकिस्तान में शामिल होने के लिए राजा हरि सिंह पर काफी दबाव डालने की कोशिश की गई. इसके लिए माउंटबेटन 15 अगस्त से दो महीने पहले श्रीनगर भी गए थे, लेकिन राजा हरि सिंह अपनी रियासत को पाकिस्तान में मिलाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे.

महाराजा हरि सिंह एक साथ तीन तीन मोर्चों पर अकेले लड रहे थे। पहला मोर्चा भारत के गवर्नर जनरल और ब्रिटिश सरकार का था जो उन पर हर तरह से दबाव ही नहीं बल्कि धमका भी रहा था कि रियासत को पाकिस्तान में शामिल करो। दूसरा मोर्चा मुस्लिम कान्फ्रेस और पाकिस्तान सरकार का था जो रियासत को पाकिस्तान में शामिल करवाने के लिये महाराजा को बराबर धमका रही थी और जिन्ना २६ अक्तूबर १९४७ को ईद श्रीनगर में मनाने की तैयारियों में जुटे हुये थे। तीसरा मोर्चा जवाहर लाल नेहरु और उनके साथियों का था जो रियासत के भारत में विलय को तब तक रोके हुये थे, जब तक महाराजा शेख के पक्ष में गद्दी छोड़ नहीं देते। नेहरु ने तो यहाँ तक कहा कि यदि पाकिस्तान श्रीनगर पर भी कब्जा कर लेता है तो भी बाद में हम उसको छुड़ा लेंगे, लेकिन जब तक महाराजा शेख की ताजपोशी नहीं कर देते तब तक रियासत का भारत में विलय नहीं हो सकता। इसे त्रासदी ही कहा जायेगा, जब महाराजा अकेले इन तीन तीन मोर्चों पर लड़ रहे थे तो उनका अपना बेटा, जिसे वे सदा टाईगर कहते थे, उन्हें छोड़ कर नेहरु के मोर्चे में शामिल हो गया।

माउंटबेटन ने राजा हरि सिंह को प्रलोभन दिए, जब इनसे भी काम नहीं बन सका तो फिर चेतावनी भरे शब्दों में हरि सिंह को कहा कि वो किसी भी हाल में पाकिस्तान में अपनी रियासत को शामिल कर ले. लेकिन हरि सिंह अपने फैसले पर अटल रहे और जम्मू-कश्मीर को भारत में शामिल करके उन्होंने अपनी देशभक्ति का परिचय दिया.

राजा हरि सिंह के बारे में यह अफवाहें भी फैलाई गई कि वो जम्मू-कश्मीर को एक अलग देश के रुप में देखना चाहते हैं. लेकिन उन्होंने अपनी देशभक्ति का परिचय देते हुए आज़ादी के करीब दो महीने बाद 26 अक्टूबर 1947 को अपनी रियासत को भारत का हिस्सा बनाने का अहम फैसला लिया और विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर जम्मू-कश्मीर को भारत का एक अभिन्न अंग घोषित किया.जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय से ठीक पहले इस रियासत पर कबालियों के रुप में पाकिस्तानी सेना ने आक्रमण कर उसके काफी हिस्से पर कब्जा कर लिया था.

जम्मू कश्मीर में जो कुछ हो रहा था, उसके लिये किसी न किसी को अपराधी ठहराना जरुरी था, ताकि इतिहास का पेट भरा जा सके। इसके लिये महाराजा हरि सिंह से आसान शिकार और कौन हो सकता था, खासकर उस समय, जब उनका अपना बेटा कर्ण सिंह भी उनका साथ छोड़ कर नेहरु के साथ मिल गया हो.लेकिन आज हकीकत सबके सामने है क्योंकि जम्मू-कश्मीर पर सिर्फ और सिर्फ भारत का अधिकार है और देश जानता है कि कश्मीर समस्या के लिये कौन जिम्मेदार है.

राजा हरि सिंह ने ऐतिहासिक फैसले के ज़रिए अपनी देशभक्ति का सिर्फ परिचय ही नहीं दिया बल्कि जम्मू-कश्मीर के विलय के बाद, अपनी रियासत भारत सरकार के हवाले कर दी।
बदले में क्या मिला उन्हें इन राजनीतिक 2गलो से...

#विचार_जरूर_करें_क्षत्रिय_बंधुओ

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