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सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार पर गुचरो का जो कब्जा करने का असफल प्रयास किया जा रहा है


इतिहास चोरी की घटनाएं अंग्रेजो के ज़माने से शुरू हुई थी, फर्जी ब्राह्मण, फर्जी क्षत्रिय यह सभी अंग्रेजी काल की देन है , उस काम को वामी म्लेच्छ, मुल्ले ओर ईसाई आगे बढ़ा रहे है। साधारण जनता को सावधान रहने की जरूरत है । जो हिन्दू है, वह समान रूप से पवित्र है ।


सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार पर गुचरो का जो कब्जा करने का असफल प्रयास किया जा रहा है वह ईतिहासिक रूप से राजपूतो के अस्तित्व पर सवाल होगा भविष्य में ऐसा पूरी संभवाना है। सभी भाइयो को इसको ज्यादा से ज्यादा विरोध और माहिर भोज प्रतिहार ज्यंतीं मनाने की आवस्यकता है।

अन्यथा भविष्य में इसका दुष्प्रभाव इतना होगा कि वर्तमान में आकलन करना भी मुश्किल ही नही नामुकिन है।

सभी भाइयो से आग्रह है सम्राट माहिर भोज की उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों को ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार करो हर राज्यो में माहिर भोज प्रतिहार की ज्यंतीं की शुरुआत करने की आवस्यकता है।

#प्रतिहार वंश के महान योद्धा शासको के बारे में जिन्होंने अपनी मातृभूमि, सनातन धर्म, प्रजा व राज्य के लिए सदैव ही न्यौछावर थे।

प्रतिहार/परिहार क्षत्रिय वंश के महान राजा

(1) राजा हरिश्चंद्र प्रतिहार
(2) राजा रज्जिल प्रतिहार
(3) राजा नरभट्ट प्रतिहार
(4) राजा नागभट्ट प्रथम
(5) राजा यशोवर्धन प्रतिहार
(6) राजा शिलुक प्रतिहार
(7) राजा कक्कुक प्रतिहार
(8) राजा बाउक प्रतिहार
(9) राजा वत्सराज प्रतिहार
(10) राजा नागभट्ट द्वितीय
(11) राजा मिहिरभोज प्रतिहार
(12) राजा महेन्द्रपाल प्रतिहार
(13) राजा महिपाल प्रतिहार
(14) राजा विनायकपाल प्रतिहार
(15) राजा महेन्द्रपाल द्वितीय
(16) राजा विजयपाल प्रतिहार
(17) राजा राज्यपाल प्रतिहार
(18) राजा त्रिलोचनपाल प्रतिहार
(19) राजा यशपाल प्रतिहार
(20) राजा मेदिनीराय प्रतिहार (चंदेरी राज्य)
(21) राजा वीरराजदेव प्रतिहार (नागौद राज्य के संस्थापक )

प्रतिहार क्षत्रिय वंश का बहुत ही वृहद इतिहास रहा है इन्होने हमेशा ही अपनी मातृभूमि के लिए बलिदान दिया है, एवं अपने नाम के ही स्वरुप प्रतिहार यानी रक्षक बनकर हिंदू सनातन धर्म को बचाये रखा एवं विदेशी आक्रमणकारियों को गाजर मूली की तरह काटा डाला, हमे गर्व है ऐसे हिंदू क्षत्रिय/राजपूत वंश पर जिसने कभी भी मुश्किल घडी मे अपने आत्म विश्वास को नही खोया एवं आखरी सांस तक हिंदू धर्म की रक्षा की।

आप सभी इस संदर्भ में पढ़ सकते है।

(1) राजपूताने का इतिहास - डा. गौरीशंकर हीराचंद ओझा
(2) विंध्य क्षेत्र के प्रतिहार वंश का ऐतिहासिक अनुशीलन - डा. अनुपम सिंह
(3) भारत के प्रहरी - प्रतिहार - डा. विंध्यराज चौहान
(4) प्राचीन भारत का इतिहास - डा. विमलचंद पांडे
(5) उचेहरा (नागौद) का प्रतिहार राज्य - प्रो. ए. एच. निजामी
(6) राजस्थान का इतिहास - डा. गोपीनाथ शर्मा
(7) कन्नौज का इतिहास - डा. रमाशंकर त्रिपाठी
(8) Society and culture Rajasthan (700 -900) - Dr. Shanta Rani sharma
(9) Origin of Rajput - Dr. J. N. Asopa
(10) Glory that was Gurjardesh - Dr. K. M. Munshi.

गोचरो जितना तुम्हारा राज्य था उससे बडा तो सुर्यवंशी मेवाडीयो का दरबार था😂😂
जय राजपुताना🚩🚩

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