#पृथ्वीसिंह_महाराजे_ने_शेर_पकड़कर_फाड़_दिया
जोधपुर के महाराज जसवंत सिंहः ओरेंगजेब के दरबार मे थे, उसी समय जंगल से कोई भयानक शेर पकड़कर पिंजरे में बंद करके लाया गया था । ओरेंगजेब ने कहा, ऐसा भयानक शेर तो हमने आज तक नही देखा । इसपर जसवंत सिंहः ने कहा, ऐसे शेर तो हम राजपूतो के आंगन में खेलते है ।
ओरेंगजेब इस बात से क्रोधित हो उठा, उसने जसवंत सिंहः को ललकार कर कहा, की फिर लेकर आओ अपने आंगन के शेर को !!
प्राण जाई पर वचन ना जाई .... यही राजपूतो की नीति थी, जसवंत सिंहः अपने 10 साल पुत्र को लेकर ओरेंगजेब के दरबार मे आ गए । पृथ्वीसिंहः को शेर के पिंजरे में घुसा दिया गया । जैसे ही शेर ने उस 10 वर्षीय तेजस्वी बालक की आंखों में देखा, एक बार तो पीछे हट गया, लेकिन बाद में भाले द्वारा मुगल सेना के उकसाये जाने से वह पृथ्वीसिंहः पर टूट पड़ा । पृथ्वीसिंह ने तुरंत अपनी तलवार निकाल ली । उसी समय पृथ्वीसिंहः का आदेश आ गया -- निहत्थों पर कभी वार नही करते मेरे शेर ...
पृथ्वीसिंह ने अपनी तलवार फेंकी, ओर कुछ ही समय मे शेर का जबड़ा फाड़ पिंजरे के बाहर आ गए । पूरा मुगल दरबार पृथ्वीसिंहः की जयजयकार किये बिना नही रह सका ।
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