दिल्ली कहे देसूरी, तू जीती मैँ हारी।
कलमा औरंगजेब री, जीती बीके उतारी॥"
मेवाड़ का बड़ा प्रसिद्ध दोहा है जब ओरंगजेब ने सोलंकियो के गढ़ देसुरी को छोटा और कमजोर समझ आक्रमण कर दिया था तब झिलवाडा-रूपनगर के ठाकुर विक्रमाँदित्य सिंह सोलंकी उर्फ़ बीका सोलंकी ने दिल्ली की सल्तनत शासक ओरंगजेब को उस युद्ध में धुल चटाकर उसकी पाग(पगड़ी) को उसी के हाथो अपने पैरो में रखवाया था "
विडंबना है इस देश के इतिहासकारों और राजनेताओ की जो एक माफ़ी मांगकर अपनी जान बचाने वाले कायर मुग़ल राजा के नाम पर सडके और किताबो में महान बता डाला और महान काम करने वालो का आज नामो-निशान नजर नही आता है।
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