#__सुर्यवंशी___गहरवार___वंश 👈🙏🚩
#_गहरवार_क्षत्रीय_वंश सुदूर अतीत में #__सूर्यवंशी राजा मनु से संबन्धित हैं।
#_अक्ष्वाकु के बाद #__रामचन्द्र के पुत्र "#_लव' से उनके वंशजो की परंपरा आगे बढ़ाई गई है और इसी में काशी के गहरवार शाखा के कर्त्तृराज को जोड़ा गया है।
लव से कर्त्तृराज तक के उत्तराधिकारियों में गगनसेन, कनकसेन, प्रद्युम्न आदि के नाम महत्वपूर्ण हैं।
कर्त्तृराज का गहरवार होना घटना के आधार पर हैं जिसमें काशी मे ऊपर ग्रहों की बुरी दशा के निवारणार्थ उसके प्रयत्नों में "#__ग्रहनिवार' संज्ञा से वह पुकारा जाने लगा था।
कालांतर "ग्रहनिवार' का अपभृंश गहरवार बन गया।
बनारस के राजाओं की अनेक समय तक
#__सूर्यवंशी सूर्य-कुलावंतस काशीश्वर पुकारा जाता रहा है। इनकी परंपरा इस प्रकार है - कर्त्तृराज, महिराज, मूर्धराज, उदयराज, गरुड़सेन, समरसेन, आनंदसेन, करनसेन, कुमारसेन, मोहनसेन, राजसेन, काशीराज, श्यामदेव, प्रह्मलाददेव, हम्मीरदेव, आसकरन, अभयकरन, जैतकरन, सोहनपाल और करनपाल।
करनपाल के तीन पुत्र थे - वीर, हेमकरण और अरिब्रह्म। करनपाल ने हेमकरन को अपने सामने ही गद्दी पर बैठाया था। इसे करनपाल की मृत्यु पर शेष दो भाईयों ने पदच्युत कर देश निकाला दे दिया था।
हेमकरन ने वंश बृद्धि एवं स्वराज्य हेतु देवी मां #__विध्यवासिनी को प्रसन्न करने के लिये घोर तप किया और अंत में स्वयं की वलि देने हेतु अपनी गर्दन पर जब तलवार रखी और स्वयं की बलि देनी चाही तो देवी ने उसे रोक दिया परंतु तलवार की धार से हेमकरन के रक्त की पांच बूंदें गिर गई थीं इन्हीं के कारण हेमकरन का नाम #__पंचमसिंह और रक्त की बूँदे हवन यज्ञ में गिरने से बुंदेला पड़ा था।
ओरक्षा दरबार के पत्र में अभी भी पूर्ववर्ती विरुद्ध के प्रमाण मिलते हैं जैसे - श्री सूर्यकुलावतन्स काशीश्वरपंचम ग्रहनिवार विन्ध्यलखण्डमण्लाहीश्वर श्री महाराजाधिराज ओरछा नरेश। 👈
चूंकि हेमकरन को विन्ध्यवासिनी देवी का वरदान रविवार को मिला था, ओरछा में आज भी पवरात्र महोत्सव में इस दिन नगाड़े बजाये जाते हैं।
#__मिर्जापुर स्थित #__गौरा ( मेरा गांव) 👈
भी हेमकरन के बाद #__गहरवारपुरा के नाम से प्रसिद्ध है।
गढ़कुण्डार इसके बाद बुंदेलों की राजधानी बनी।
वीरभद्र के पाँच विवाह और पाँच पुत्र प्रसिद्ध हैं - इनमें रणधीर द्वितीय रानी से, कर्णपाल तृतीय रानी से, हीराशी, हंसराज और कल्याणसिंह पँचम रानी से थे। वीरभद्र के बाद कर्णपाल (१०८७ ई० से १११२ ई०) गद्दी पर बैठा। उसकी चार पत्नियाँ थीं। प्रथम के कन्नारशाह, उदयशाह और जामशाह पैदा हुए। द्वितीय पत्नी से शौनक देव तथा नन्नुकदेव तथा चतुर्थ पत्नी से वीरसिंहदेव का जन्म हुआ।
कन्नारशाह (१११२ ई० - ११३० ई०), शौनकदेव (११३० ई०-११५२ ई०), नन्नुकदेव (११५२ई०-११६९ ई०) ओरछा की गद्दी पर क्रम से बैठे। इसके बाद वीरसिंह के पुत्र मोहनपति (११६९ ई०-११९७ ई०), अभयभूपति (११६९ ई०-१२१५ ई०) गद्दी पर आये। अर्जुनपाल अभयभूपति का पुत्र था। ये १२१५ ई० से १२३१ ई० तक गद्दी पर रहा। उसने तीन विवाह किए। दूसरी रानी से सोहनपाल का जन्म हुआ। यह ओरछा बसाने में विशेष सहायक माना जाता है।
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गहरवारों का पछोरा नाम से प्रसिद्ध होना।
चूंकि अधिकतर गौत्र घटना , वस्तु , स्थान आदि के नाम पर बने है। जैसे भदावर से भदौरिया, सीकर से सिकरवार, कटहर में रहने से कटारिया, रक्त बूंद के कारण बुंदेला।
इन्हीं में से एक गहरवार ठाकुरों का पछोरा गौत्र भी है। गहरवारों की मूल पद्वी #_काशी रही है।
और यहीं से गहरवार शासक युद्ध काल में भारत के भिन्न भिन्न भागों में पहुंचे । गहरवार शासक काशी , मथुरा , नन्द गांव, वरसाने, दतिया भिटाई खेरा, हरसी , पिछोर(डबरा के पास) पहुंचे ।
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मै उस #_गांव से नही जिसका कोई पहचान नही है
हम तो उस गांव से है जिसका स्वर्णीम ईतिहास है 👈🦁
मीरजापुर जिला माँ विंध्यवासिनी के क्षेत्र के वासी,
गौरा गांव और हम सुर्यवंशी गहरवार इसी क्षेत्र के निवासी 👈🙏🚩
जिला , गाँव , क्षेत्र सबका ईतिहास है बाबू
सुर्यवंशी गहरवार का भी पूरा इतिहास दिया।
अब डिबेट करना हो तो पोस्ट पर आ जाओ बाबू 👈
रुद्र प्रताप सिंह #_गहरवार डिबेड के लिए तैयार है 👈
जय जय #__माँ__भवानी
जय जय #__राजपूताना_
जय जय #__शिव__राणा
जय जय देशभक्त #_महाराजा_जय_चंद्र 🙏🚩

Jai jai rajpootana
ReplyDeleteJai jai rajpootana
ReplyDeleteमेरा नाम विवेक सिंह बुन्देला है और आज मुझे अपने इतिहास के बारे में जानकर बहुत खुशी हुई
ReplyDeleteभाई मुझे ये समझ नहीं आ रहा
ReplyDeleteगहवार की शाखा चंद्रवंशी
और गहवार सुर्यवंशी कैसे हुआ
क्यों कि मैं उन्ही की शाखा हु
कर्मवार क्षत्रिय हू
भाई में कर्मवार हु गहवार की शाखा तो मैं चंद्रवंशी हु
ReplyDeleteऔर गहवार सुर्यवंशी कैसे हुआ
Gaharwar Ko maharaja Chandra Dev k Naam se Chandra vanshi kahte h
ReplyDeleteGaharwar title h rajpoot to Suryavanshi h
ReplyDeleteJai gaharwar suryawanshi Baha'i ham bhi ghatampur hands ke gaharwar thakur hai
ReplyDeleteBhai hm karmawar se ate h gotra bharatdwaj h koi idea nhi h....
ReplyDeleteमैं भी बुन्देला हूँ मुझे बहुत खुशी हुई पोस्ट पड़ कर
ReplyDeleteगहरवार गृहोके नाम से नहीं बना
ReplyDeleteयह रोड़ वंश की एक शाखा हैं
यह गहरोड़ हैं
I am also a Gaharwar kshatreey from Hingutar garh (Dhanapur),Dist.-Chandauli (U.P.)
ReplyDeleteझांसी मेरी जन्मभूमि है पिता जी दादा परदादा छतरपुर रजवाडो के थे मेरे पिता की मृत्यु जब में छोटा था तब हो गई थी मुझे जानकारी चाहिये क्या बुन्देलखण्ड के रजवाडो में कौन कौन से वंश के राजपूत होते थे
ReplyDeleteझाँसी का गजेटियर 1880 से 1910 के बीच का कोई भी मिले पढ़ लीजिये. सारी जानकारी मिल जाएगी.
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