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सूर्यवंश का वंशक्रम---------- पुंडीर क्षत्रिय सीधे भगवान श्रीराम के वंशज हैं


जय श्रीराम,जय क्षात्र धर्म,जय राजपूताना--------
---------सूर्यवंश का वंशक्रम----------
पुंडीर क्षत्रिय सीधे भगवान श्रीराम के वंशज हैं,
श्री रामचन्द्र ----कुश------अतिथि----निषध----नल पृथम-----नभ----पुण्डरीक (पुंडीर क्षत्रियों के आदि पुरुष)-------
गुहिलौत(सिसोदिया),कछवाहा(कुशवाहा),राठौर,गौतम(प्राचीन शाक्य), मौर्य,रघुवंशी,दाहिमा आदि क्षत्रिय वंश भी पुंडीर वंश की तरह एक ही मूल पुरुष श्री रामचन्द्र जी के वंशज हैं........
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------पुंडीर (पुण्डीर) क्षत्रियों के गोत्र आदि-------
वंश- सूर्य
नदी- सरयू
गोत्र- पुलस्त्य
पक्षी- सफ़ेद चील
कुलदेवी- दधिमाता
पेड़- कदम का
वेद-यजुर्वेद
निकास-अयोध्या
घोडा-श्याम वर्ण
इस्ट देव -महादेव
सूत्र-पारस्कर गृह्यसूत्र।
गद्दी- मायापुर हरिद्वार
प्राचीन और मध्यकालीन राज्य-- तेलंगाना, कलिंग, पुण्डरी,लाहौर,मायापुर (हरिद्वार), विजियागढ़,मनहरखेड़ा,नाहन,देहरादून आदि
वर्तमान रियासत----जसमोर
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---------संक्षिप्त इतिहास---------
पुंडीर शाखा के क्षत्रिय पहले अयोध्या से वैशाली(बिहार) की और गए और कालांतर में बिहार,बंगाल,कलिंग,तेलंगाना के विस्तृत क्षेत्र में साम्राज्य स्थापित किया,जिसे पुण्ड्र साम्राज्य कहा जाता है,इसके सिक्के आज भी इस इलाके में मिलते हैं,
तेलंगाना से एक बड़ी शाखा मधुकरदेव(मधासुरराज) के नेतृत्व में विक्रम संवत 602 में हरियाणा के कैथल क्षेत्र में आकर आबाद हुई और पुण्डरी राज्य की स्थापना हुई,

बाद में दसवी सदी में पुंडीर क्षत्रियो ने (जमुना के इस और) मायापुर हरिद्वार राज्य की स्थापना की.इस रियासत में 1440 गांव थे,और यह आज के हरिद्वार,सहारनपुर,मुजफरनगर,बिजनौर,देहरादून आदि क्षेत्रों में फैली हुई थी.

पृथ्वीराज चौहान ने मायापुर के राजा चन्द्र पुंडीर को पंजाब सीमा का सूबेदार भी नियुक्त किया था,जिसके कारण एक समय लाहौर भी पुंडीर क्षत्रियों के अधीन था,चन्द्र पुंडीर का पुत्र धीरसेन पुंडीर बड़ा वीर सेनानायक था,चंदबरदाई कृत पृथ्वीराज रासो में धीरसेन पुंडीर की वीरता के किस्से भरे पड़े हैं,तराइन के पृथम युद्ध में मौहम्मद गौरी को दिल्ली के गोविन्दराज तोमर ने आमने सामने के युद्ध में घायल किया था,और जब गौरी भाग रहा था तो धीरसेन पुंडीर ने ही उसका पीछा कर बंदी बनाया था,
बाद में पृथ्वीराज चौहान ने गौरी को उदारता दिखाते हुए छोड़ दिया,और यह घटना भारत के भविष्य के लिए अभिशाप सिद्ध हुई.…

तराईन के युद्धों और तुर्कों से संघर्ष में मायापुर के पुंडीर राज्य की तीन पुश्तों ने बलिदान दिया,चन्द्र पुंडीर,धीरसेन पुंडीर,पावस पुंडीर वीरगति को प्राप्त हुए.…

आज पुंडीर क्षत्रिय यूपी के सहारनपुर,मुजफरनगर,अलीगढ़,हाथरस,एटा, उत्तराखंड के हरिद्वार,रुड़की,देहरादून तथा गढ़वाल,हिमाचल के नाहन,सिरमौर,सोलन,शिमला आदि जिलो में मिलते हैं,और आज भी समाज,राजनीति में वही वर्चस्व कायम है…
और हाँ वीरता में आज भी पीछे नहीं हैं,फूलन के संहारक और अफगानिस्तान जाकर पृथ्वीराज चौहान की समाधि के अवशेष वापस लाने वाले आधुनिक वीर शिरोमणि "शेर सिंह राणा "भी पुंडीर राजपूत हैं.………

……… अभी के लिए इतना ही.………
यह मात्र संक्षिप्त इतिहास प्रस्तुत किया गया है,पुंडीर वंश का और विस्तृत इतिहास फिर आगे प्रस्तुत किया जाएगा।।।।।।।
जय श्रीराम,जय क्षात्र वंश,जय राजपूताना

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