Skip to main content

आज हम आपकों तौमर तँवर की शाखाओं से अवगत करवायेगें।


#तँवर_तौमर_राजवंश🚩
आज हम आपकों तौमर तँवर की शाखाओं से अवगत करवायेगें।
( ध्यान दे तोमर /तँवर वंश को अर्जुननायन भी कहा गया है।) 

इसकी मुख्य शाखाऐं 22बताई गई है। जो पूरे उत्तर मध्य भारत में विशालतम साम्राज्य की तरह फैली हुई है। तँवर वंश क मूल पुरूष प्रतापी राजा पाडूपुत्र अर्जुन के पुत्र परिक्षित जी थे।

 #22प्रमुख_शाखाऐ इस प्रकार से है।

                    #जावंला_तँवर/तौमर🚩
जावला या अनंगपाल के वंशज जावंला तँवर /तौमर कहलाऐ। रूनचा .असील जी के तँवर जाटू सापला/सिम्पल आदि इनकी शाखाऐ। सापला/सिम्पल जैसलमैर के भूभाग में फैल हुए हैं। लोकदेवता रामदेव इसी रूनचा शाखा के है। 

                     #ग्वालेरा_तँवर / तौमर।🚩
दिल्ली छुटने के बाद ग्वालियर राज्य में बस जाने के बाद ग्वालेरा तँवर /तौमर कहलाऐ।

               #जाटू_तँवर/तौमर🚩
जाटू तँवर/तौमर राजपूत वंश राजा अनंगपाल के पौत्र व राजा शालिवाहन के पुत्र राव जैरथ जी जिन्हे जाटू जी भी कहा जाता था। के वंश आगे बढा़ ।

 राव जाटू के साथ भाई राघु व भाई अगंपाल तँवर के पुत्र सतरौला का वंश आज हरियाणा के भूभाग महेन्द्रगढ़ रेवाडी ,कैथल ,करनाल,करूक्षेत्र,भिवानी के विशालतम भूभाग मे फैल हुऐ है। इनके राज्य में 1440 ठिकाने आते है। आज जाटू तँवरों के 84ठिकाने भिवानी ओर उसके आस पास फैल है।

 भिवानी शहर की स्थापना इन्ही तँवरों ने की थी। दस्तावेजो में इन्हे तीन टप्पो टप्पा माना जाता था ज़ो राजा जाटू, रघु ,सतरोला , के परगनों में शामिल है।

⚔पूर्व जनरल विके सिहं भी इसी शाखा में आते हैं।⚔

इनमें जाटू के वंशज काफी फैल गये। ओर उम्र सिहं ने तोशाम ठिकाना कब्जा लिया।
इस कारण उमरैण टप्पा कहलाए जाने लगा। ऐसे ही भिवानी में बछोअन टप्पा कहलाऐ जाने लगा। जाटू के भिवानी वंशज को रहैस व तलवंडी में बैसे वंशजो को राणा कहा जाने लगा।

                #जंगारा_तँवर/तौमर🚩
जंगारा तँवर /तौमर सबसे लडाकू मानी जाती हैं। जंगारा शब्द जंग -अगारा को जोडकर बना है। जिसका अर्थ जंग के लिए भूखा हो।

जंगारा वंश की वंशावली अगंपाल के पुत्र जगपाल से मानी जाती है। इन्दोरिया तँवर इनके ही भाग है। दिल्ली में चौहानों के कब्जे के बाद जंगारा तँवर तँवरो की मुख्य शाखा से अलग होकर रोहिल्याखण्ड के इलाके के राजकुमार धापु धाम के नेत्तव में कुच कर गये। जंगारा तँवरो ने बरेली के आस पास ग्वालों अहीरो व कठेरिया को भगा कर बरेली के भूभाग पर कब्जा कर लिया।
इन्होनें रूहेलो पठानों के नाक में दम कर दिया।तथा उनहै भी चेन से नही बैठने दिया ।

                  #पठानियाँ_तँवर /तौमर🚩
पठानिया वंशज राजा अनंगपाल के पुत्र जैतपाल के वंशज है। जिन्होनें उत्तर भारत में धमेरी साम्राज्य की स्थापना की। ओर पठानकोट रियासत का निर्माण किया।
धमेरी का नाम आगे जाकर नूरपुर पडा । 

यह वंश 1849तक विदेशी आक्रमणकारियों के विरूध्द विशेष अभियान चलाने व उनकों अपनी बाहुबल का अहसास कराने के लिए जाना जाता हैं। चाहे मुस्लिम अक्राता हो या बिट्रीश सरकार के अग्रेज। इस वंश के राजा रामसिहं पठानियाँ अग्रेजों के विरूध्द अपनी वीरता पराक्रम व अदभुत शोर्य के लिए विख्यात हैं।

आज भी लोकगीतों में उनके वीरता का गुणगान किया जाता हैं। यह वंश इतना बहादुर व झुझारू है।आजादी के बाद भी इसके वंशजो ने तीन महावीर चक्र प्राप्त किये। आज पठानियाँ राजवंश के वंशज पंजाब हिमाचल व जम्मू कश्मीर के कुछ भूभाग में फैल हुऐ है।

                   #जंजुआ_तँवर/तौमर🚩
जंजुआ तँवर भी तँवर राजपूतौं के अर्जुन के वंशज है।
जंजुआ राजवंश की उत्पत्ती व अर्जुन के वंशज राजा जन्मजय से मानी जाती है। इन्ही से जंजुआ तँवर /तोमर वंश प्रारम्भ हुआ ।

 जंजुआ वंश तँवर वंश की ही शाखा है। जंजुआ तँवर का विस्तार पूर्वी पाकिस्तान तक फैला हे। ज्यादातर जंजुआ तँवर की शाखा वर्तमान पाकिस्तान में है। जो विपरीत परिस्थितियों के कारण मुस्लिम बन चुके है। कुछ जंजुआ तँवर /तौमर आज भी पंजाब के बडे़ भूभाग में फैल है।जो आज भी सनातनी हिन्दु क्षत्रिय है।

  यह बडी बहादुर व लडाकू वंश है। आज पाकीस्तान में कई आर्मी जनरल जंजुआ राजपूत है। बिट्रीश सरकार ने भी पंजाव के जंजुआ वंश को एक लडाकू जाति माना।
काबुल का प्रसिध्द राजवंश जंजुआ राजवंश था। जिन्होनें गजनवी से लम्बें समय तक सघर्ष किया । यहीं नही इस वंश के वंशज यदुवंशी जादौं पोरस महान के प्रमुख सामंत थे, जिन्होनै सिकन्दर तक को हरा दिया।

             #जर्नाल_तँवर /तौमर🚩 
तँवर वंश की यह भी प्रमुख शाखा है। इन्होने तराइन के युध्द में पृथ्वीराज चौहान का साथ दिया था। व गोरी को हराया था। पृथ्वीराज चौहान के प्रमुख सामंत थे। किसी कारणवश इन्होनें मजबूरन इस्लाम कबूल किया था। मध्य काल में इनका राज्य करनाल .राजौरी तक है। आज इनकी आबादी जम्मू कश्मीर में ओर पाकिस्तान में बहुतयात है।

               #बेरूआर_तँवर/ तौमर,🚩
बेरूआर तँवर तँवर वंश की ही एक शाखा है। जिनका राज्य उत्तर प्रदेश के बलिया व मुज्फरनगर तक चहुओर फैला हुआ है। बढ़वाजी व भाटों के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेरूर नाम की जनजाति थी जिसको पराजित कर इन्होनें बेरूआर तँवर वश की स्थापना की।जिसके कारण इनका नाम बेरू+आरी मतलव दूश्मन पर पडा। 

बेरूआर तँवर के वशंज आज बिहार के मिथिलांचल इलाके फैजाबाद ,बलिया ,गाजिपुर,बनारस ,छपरा ,आदि जिलों मै फैले हुए हैं। यह वंश पूर्वी उत्तर प्रदेश के ओर बिहार के सिमांत इलाके पर एक शक्तिशाली राजपूत वंश है।

          #कोढ़या_तँवर/तौमर 🚩
जवाल के पुत्र पर ही इस वंश का नाम पडा। आज वर्तमान राजस्थान के सीकर जिले के डावला व इसके आस पास इनके प्रमुख ठिकाने है।

       #निहाल_तँवर/तौमर🚩
यह भी दिल्ली महाराज अनंगपाल ( जावल जी) के वंशज है,मुख्यतः मध्य प्रदेश के कुछ भूभाग पर ही पाये जाते है।

    #सलेरिया_तँवर /तौमर🚩
यह भी दिल्ली महाराज अनंगपाल (जावलजी)के वंशज है मुख्यत मध्य प्रदेश के विदिशा के भूभाग में फैल है।
  
  #घोड़वा_तँवर/तौमर🚩
हिमाचल प्रदेश के धमेरी ठिकाना जो वर्तमान नूरपूर के नाम से जाना जाता है।

#तिलोता_तँवर/तोमर 🚩
बिहार के आरा ,शाहवाद भोजपुर व उत्तर प्रदेश के झासी जालौन में मुख्यत है।

    #जनवार_तँवर /तौमर🚩
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर,गंगवाल , आइल,प्रयागपुरा इनके मुख्यत ठिकाने है।
       जनवार तँवर झासी दतिया बुदंलखण्ड में भी इनके प्रमुख ठिकाने है। जनवार तँवर राजा तुगंपाल से पहलें ही अलग हो गए।
    
       #कटीयार_तँवर/तौमर🚩
  धर्मपुर ठिकाना व उसके आस पास उत्तर प्रदेश के हरदौई तँवर कटीयार ।

          #पालीवाल_तँवर /तौमर🚩
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर व फैजाबाद का बडा भूभाग में मुख्खत फैल हुए हैं।
       
            #द्धार_तँवर/तौमर🚩
उत्तर प्रदेश के झासी जालौन हम्मीरपुर में मुख्यत पायें जाते है।

          #जरोलिया_तँवर तोमर 🚩
उत्तर प्रदेश के बुलदशहर के आस पास के तँवर जरोलिया   
तँवर कहलाते है। कुछ जगह इन्हे गोड़ राजपूत भी कहते है।

            #रघु_तँवर/तौमर🚩
रघु तँवर जाटू तँवर की ही शाखा है। ओर भिवानी के आस पास आज भी विराजे हुऐ है।

           #मराठाक्षत्रिय_तँवर 🚩
मराठा तँवर तौर ठाकुर के नाम से प्रखात है।तौर ठाकुर के मराठावाडा में गोदावरी नदी के तीर पर 22 प्रमुख ठिकाने है। इस इलाके को गंगथडी भी कहा जाता है। इसके अलावा मराठा राजपूतों में तावडे़ तान्वरें शिर्क भी तँवरवशी है।
  
#अन्य_तँवर_शाखाऐ-🚩
रैक्वाल ,तिलोता,किसनातिल,चंदरीया,रिठालिया,मोहाल,जौधाण,अनवार,बिलोडिया,अगडिया, मंगरोठीया, पन्ना, बोधयाणा,कोढ़याणा, बैवत, भैपा, तुलिहान।

जय रूणचा री।🚩🚩
जय चिल्याय माता।🚩

https://www.rajputland.in/
#ҡรɦαƭ૨เყα_૨αʝρµƭ


Comments

Popular posts from this blog

सुर्यवंशी गहरवार वंश

#__सुर्यवंशी___गहरवार___वंश 👈🙏🚩 #_गहरवार_क्षत्रीय_वंश सुदूर अतीत में #__सूर्यवंशी राजा मनु से संबन्धित हैं। #_अक्ष्वाकु के बाद #__रामचन्द्र के पुत्र "#_लव' से उनके वंशजो की परंपरा आगे बढ़ाई गई है और इसी में काशी के गहरवार शाखा के कर्त्तृराज को जोड़ा गया है।          लव से कर्त्तृराज तक के उत्तराधिकारियों में गगनसेन, कनकसेन, प्रद्युम्न आदि के नाम महत्वपूर्ण हैं। कर्त्तृराज का गहरवार होना घटना के आधार पर हैं जिसमें काशी मे ऊपर ग्रहों की बुरी दशा के निवारणार्थ उसके प्रयत्नों में "#__ग्रहनिवार' संज्ञा से वह पुकारा जाने लगा था।    कालांतर "ग्रहनिवार' का अपभृंश गहरवार बन गया। बनारस के राजाओं की अनेक समय तक  #__सूर्यवंशी सूर्य-कुलावंतस काशीश्वर पुकारा जाता रहा है। इनकी परंपरा इस प्रकार है - कर्त्तृराज, महिराज, मूर्धराज, उदयराज, गरुड़सेन, समरसेन, आनंदसेन, करनसेन, कुमारसेन, मोहनसेन, राजसेन, काशीराज, श्यामदेव, प्रह्मलाददेव, हम्मीरदेव, आसकरन, अभयकरन, जैतकरन, सोहनपाल और करनपाल। करनपाल के तीन पुत्र थे - वीर, हेमकरण और अरिब्रह्म। करनपाल ने हेम...

क्षत्राणी

# क्षत्राणी मैंने उसको जब-जब देखा, लोहा देखा। लोहे जैसा तपते देखा, गलते देखा, ढलते देखा मैंने उसको गोली जैसा चलते देखा। # यह_ही_है_क्षत्राणी यथार्थ में देखा जाए तो क्षत्राणीयों का इतिहास व उनके क्रियाकलाप उतने प्रकाश में नहीं आए जितने क्षत्रियों के। क्षत्राणीयों के इतिहास पर विहंगम दृष्टि डालने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि क्षत्रिय का महान त्याग व तपस्या का इतिहास वास्तव में क्षत्राणीयों की देन है। राजा हिमवान की पुत्री  # गंगा  ने अपनी तपस्या के बल पर भगवान् श्रीनारायण के चरणों में स्थान पाया और भागीरथ की तपस्या से वे इस सृष्टि का कल्याण करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई। उन्हीं की छोटी बहन  # पार्वती  ने अपनी तपस्या के बल पर भगवान् सदाशिव को पति के रूप में प्राप्त किया व दुष्टों का दलन करने वाले स्वामी कार्तिकेय और देवताओं में अग्रपूजा के अधिकारी गणेश जैसे पुत्रों की माता बनी। महाराजा गाधि की पुत्री व विश्वामित्र जी की बड़ी बहन  # सरस्वती  अपनी तपस्या के बल पर ही जलरूप में प्रवाहित होकर पवित्र सरस्वती नदी का रूप धारण कर सकीं। इसी प्रकार  # नर्मदा...

जय देव

# MUST_READ_AND_SHARE जय देव !  # धर्मवीर_बाबा_हासिल_देव_जी_की_जय_हो  !  # आज_बाबा_हासिल_देव_जी_की_जयंती_है  , बाबाजी को कोटि कोटि नमन ! जिस तरह जय सिंह खिंची चौहान जी , सिक्ख गुरु जी , बाबा बन्दा बहादुर जी और सम्भाजी महाराज के साथ बर्बरता करके शहीद किया गया था उसी तरह इस वीर राजपूत को शहीद किया गया था ! ये वो  # राजपूत_वीर  थे जिन्होंने शहादत देदी लेकिन सर नहीं झुकाया ! दिल्ली के बादशाह ने उन्हें तसीहें देकर शहीद कर दिया लेकिन बाबाजी बादशाह के आगे झुके नहीं ! राजा हमीर देव जम्वाल का बिक्रमी 1456 से लेकर 1483 तक जम्मू पर राज था ! उनके दो बेटे थे - अजैब देव और हासिल देव ! राजा हमीर के देहांत के बाद उनका बड़ा बेटा अजैब देव राजा बना और कुछ समय बाद राजा अजैब देव के छोटे भाई बाबा हासिल देव जी को जम्मू की रियासत का वज़ीर बना दिया गया ! राजा अजैब देव जी की बिक्रम सम्वत 1514 में मृत्यु हो गई ! राजा का बेटा कुंवर बीरम देव उस समय बोहत छोटे थे ! वज़ीर हासिल देव जी ने अपने भतीजे को पाला और साम्राज्य को चलाने में पूर्ण मदद की , और साफ सुथरे ढंग से राज्ये चलाना सिखाय...