#अग्निकुल सिद्धांत के अनुसार #चार #राजपूत_कुलों- *प्रतिहार, परमार, चौहान तथा चालुक्य (सोलंकी)*
का उद्भव अाबू पर्वत पर वशिष्ठ द्वारा किए गए यज्ञ की अग्निकुण्ड से हुआ।
प्र०-(प्रतिहार राजपूत) गुर्जर क्यों कहलाएे?
👉सोमदेव सूरी ने सन ९५९ में यशस्तिलक चम्पू में गुर्जर देश का वर्णन किया है। वह लिखता है कि न केवल प्रतिहार बल्कि चावड़ा,चालुक्य,आदि वंश भी इस देश पर राज करने के कारण गुर्जर कहलाये।
👉कुमारपाल प्रबंध के पृष्ठ १११ पर भी गुर्जर देश का वर्णन है.
👉👉ऐसे ऐसे बहुत सारे प्रूफ है
👉प्रतिहारों ने अरब आक्रमण कारीयों से भारत की रक्षा की अतः इन्हें "द्वारपाल"भी कहा जाता है। प्रतिहार गुर्जरात्रा प्रदेष (गुजरात) के पास निवास करते थे। अतः ये गुर्जर - प्रतिहार कहलाएं।
गुर्जर प्रदेश का #स्वामी होने के कारण #प्रतिहार, गुर्जर प्रतिहार कहलाये। #गुर्जर_जाति से उनका #कोई_सम्बन्ध नहीं था। उनकी राजधानी मीनमाल भी आज के गुजरात के निकट ही स्थित है। #अरबी तथा #चीनी यात्रियों के विवरण में भी गुर्जर को एक क्षेत्र विशेष ही माना गया है। 'उपमितिभन प्रंपचा' तथा कुवलयमाला जैसे समकालीन जैन ग्रंथ भी यही सिद्ध करते हैं। प्रतिहारों के पूर्व, चालुक्य भी गुर्जर कहलाये। अतः प्रतिहार, गुर्जर जाति के न होकर गुर्जर नामक क्षेत्र के स्वामी थे। गौड़-प्रदेश के स्वामी होने के कारण ही बहुसंख्यक ब्राह्मण, गौड़-ब्राह्मण कहलाते हैं।
इसी प्रकार गुजर-बनिये, गुजर-सूथार, गुजर-सोनी, गुजर कुम्हार, गुजर-सिलावट आदि जातियां आज भी मिलती हैं।
अतः गुर्जर प्रदेश का स्वामी होने के कारण प्रतिहार राजपूत, गुर्जर प्रतिहार कहलाये। गुर्जर जाति से उनका कोई सम्बन्ध नहीं था।
माउंट आबू पर्वत पर कए गए यज्ञ के अग्निकुंड से हुई | इस अग्निकुंड से चार प्रसिद्ध राजपूत वंश का उद्गम हुआ था, जो निम्न थे - प्रतिहार, परमार, चौहान और चालुक्य (सोलंकी) |
प्र०- गुजर जाति क्यों नहीं समझ रहे इस बात को??
👉गुजर समुदाय के आगे बीन बजाना मूर्खता है😡
#भैंस के आगे बीन बजाना मूर्खता है दोस्तों😊
👉चोरो का काम है चोरी करना!


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